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लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस से हटाओ जीएसटी, ममता बनर्जी ने वित्त मंत्री को लिखी चिट्ठी

Updated at : 03 Aug 2024 2:11 PM (IST)
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लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस से हटाओ जीएसटी, ममता बनर्जी ने वित्त मंत्री को लिखी चिट्ठी

लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस से जीएसटी हटाने के लिए ममता बनर्जी ने निर्मला सीतारमण को चिट्ठी लिखी.

GST: लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस का मुख्य उद्देश्य बीमारी, दुर्घटना और अकाल मृत्यु जैसे अप्रत्याशित घटनाओं में वित्तीय सुरक्षा और सहायता देना है. अगर केंद्र सरकार लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमयम से जीएसटी वापस नहीं लेती है, तो उनकी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) आंदोलन करेगी.

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GST: लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर लगने वाले जीएसटी (वस्तु एवं सेवाकर) को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी नाराज दिखाई दे रही हैं. इन दोनों प्रकार के इंश्योरेंस के प्रीमियम से जीएसटी को हटाने के लिए उन्होंने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को चिट्ठी लिखी है. निर्मला सीतारमण को लिखी चिट्ठी में उन्होंने लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमियम पर लगने वाले 18 फीसदी जीएसटी को जनविरोधी करार दिया है. इस चिट्ठी में उन्होंने इन दोनों प्रकार के इंश्योरेंस से जीएसटी हटाने की मांग की है.

जीएसटी वापस नहीं लेने पर आंदोलन करेगी टीएमसी

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को शुक्रवार को लिखी चिट्ठी में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लिखा है कि लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस का मुख्य उद्देश्य बीमारी, दुर्घटना और अकाल मृत्यु जैसे अप्रत्याशित घटनाओं में वित्तीय सुरक्षा और सहायता देना है. वित्त मंत्री को चिट्ठी लिखने से एक दिन पहले गुरुवार को उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने एक पोस्ट में लिखा है कि अगर केंद्र सरकार लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस के प्रीमयम से जीएसटी वापस नहीं लेती है, तो उनकी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) आंदोलन करेगी.

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इंश्योरेंस प्रीमियम पर जीएसटी से बढ़ता है वित्तीय बोझ

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि मैं बहुत दुख के साथ आपको लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियों और इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स पर 18 फीसदी जीएसटी लगाए जाने और नई कर व्यवस्था में आयकर अधिनियम की धारा 80सी और 80डी के तहत कटौती वापस लेने के बारे में लिख रही हूं. यह मेरे हिसाब से बेहद जनविरोधी है. उन्होंने कहा कि इंश्योरेंस प्रीमियम पर जीएसटी लगाए जाने से आम आदमी पर वित्तीय बोझ बढ़ता है. वित्तीय बोझ बढ़ने के डर से कई लोग अपने मौजूद कवरेज को जारी रखने से कतराते हैं और ज्यादातर लोग नहीं पॉलिसी नहीं लेते हैं.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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