घर के कागजों में सिर्फ नाम होना काफी नहीं, जान लें जॉइंट ओनरशिप के ये जरूरी नियम

सांकेतिक तस्वीर (फोटो : Canva)
Joint Property Ownership Rules : क्या आप जानते हैं कि जॉइंट प्रॉपर्टी में पार्टनर की मौत के बाद उसका हिस्सा किसे मिलता है? जॉइंट टेनेंसी और टेनेंसी इन कॉमन के बीच का अंतर समझें ताकि भविष्य में कोई कानूनी विवाद न हो.
Joint Property Ownership Rules : भारत में अक्सर पति-पत्नी या माता-पिता और बच्चे मिलकर प्रॉपर्टी खरीदते हैं. ज्यादातर लोग यही मानते हैं कि अगर दो लोगों के नाम पर घर है, तो एक की मौत के बाद मालिकाना हक अपने-आप दूसरे को मिल जाएगा. लेकिन कानूनी रूप से ऐसा हमेशा नहीं होता. प्रॉपर्टी पर आपका हक इस बात पर निर्भर करता है कि खरीदते समय आपने ओनरशिप का कौन सा तरीका चुना था.
जॉइंट टेनेंसी (Joint Tenancy): जब पार्टनर को मिलता है पूरा हक
इसे ‘सर्वाइवरशिप’ का अधिकार भी कहते हैं. अगर प्रॉपर्टी ‘जॉइंट टेनेंसी’ के तहत खरीदी गई है, तो एक मालिक की मृत्यु के बाद उसका हिस्सा सीधे जीवित पार्टनर के पास चला जाता है. इसमें किसी वसीयत की जरूरत नहीं होती और मरने वाले के बच्चे या अन्य रिश्तेदार उस हिस्से पर दावा नहीं कर सकते.
टेनेंसी इन कॉमन (Tenancy in Common): परिवार का होता है असली हक
भारत में ज्यादातर प्रॉपर्टी इसी तरीके से खरीदी जाती हैं. इसमें अगर एक मालिक की मौत होती है, तो उसका हिस्सा दूसरे पार्टनर को नहीं मिलता. बल्कि, वह हिस्सा मरने वाले के कानूनी वारिसों (जैसे बच्चों या पत्नी) को मिलता है. अगर मालिक ने वसीयत लिखी है, तो हिस्सा वसीयत के अनुसार दिया जाएगा.
नॉमिनी और मालिक के बीच का फर्क
लोग अक्सर नॉमिनी (Nominee) बनाने को ही सब कुछ मान लेते हैं. कानून की नजर में नॉमिनी सिर्फ एक ‘ट्रस्टी’ या रखवाला होता है. असली मालिकाना हक उत्तराधिकार कानूनों या वसीयत से ही तय होता है. नॉमिनी का काम सिर्फ असली वारिसों तक प्रॉपर्टी पहुंचाने में मदद करना है.
ओनरशिप का ढांचा क्यों है जरूरी?
प्रॉपर्टी के विवाद अक्सर इसलिए होते हैं क्योंकि लोग कागजों में यह साफ नहीं करते कि ओनरशिप किस तरह की है.
- दस्तावेजों की जांच: अगर कागजों में सर्वाइवरशिप का जिक्र नहीं है, तो कानून उसे ‘टेनेंसी इन कॉमन’ मानता है.
- वसीयत की भूमिका: जॉइंट टेनेंसी में वसीयत काम नहीं करती, लेकिन टेनेंसी इन कॉमन में वसीयत ही सबसे अहम होती है.
- काम की बात: प्रॉपर्टी खरीदते समय या बाद में यह जरूर स्पष्ट कर लें कि आपकी ओनरशिप का प्रकार क्या है. सही कानूनी जानकारी और स्पष्ट दस्तावेज भविष्य में परिवार के बीच होने वाले झगड़ों को रोक सकते हैं.
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By Abhishek Pandey
अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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