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Job Layoffs : महामारी के बाद आईटी कंपनियों ने 78,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, जानें क्या है कारण

Updated at : 26 Jan 2023 3:28 PM (IST)
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Job Layoffs : महामारी के बाद आईटी कंपनियों ने 78,000 कर्मचारियों को नौकरी से निकाला, जानें क्या है कारण

कोरोना महामारी की समाप्ति के बाद से अल्फाबेट (12,000 कर्मचारी), अमेजन (18,000), फेसबुक की मातृ कंपनी मेटा (11,000), ट्विटर (4,000), माइक्रोसॉफ्ट (10,000) और सेल्सफोर्स (8,000) सहित प्रमुख तकनीकी कंपनियों से बड़ी संख्या में कर्मचारियों को निकाल दिया गया.

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डरहम (अमेरिका) : दुनिया भर की दिग्गज आईटी कंपनियां (सूचना एवं प्रौद्योगिकी) हमेशा किसी न किसी बात को लेकर सुर्खियों में रहती हैं. आमतौर पर वह अगली बड़ी चीज के बारे में बताती रहती हैं. हालांकि, हाल के दिनों में तकनीकी समाचार हलकों में किसी नए गैजेट या नवाचार पर चर्चा की बजाय, बड़ी टेक कंपनियों में भारी छंटनी की खबरें सुर्खियों में बनी हुई हैं. पिछले साल बिग टेक कंपनियों द्वारा वैश्विक स्तर पर 70,000 से अधिक लोगों को नौकरी से निकाला गया है और इसमें उन कंपनियों (और अन्य संगठनों) को शामिल नहीं किया गया है, जो बजट में कम गुंजाइश होने के कारण व्यवसाय गंवा रहे हैं और कर्मचारियों को हटा रहे हैं. वास्तव में इस बड़े पैमाने पर हलचल का कारण क्या था और उद्योग के लिए तथा आपके लिए इसका क्या मतलब है?

महामारी के बाद 78000 को आईटी कंपनियों ने निकाला

समाचार एजेंसी भाषा की एक रिपोर्ट के अनुसार, कोरोना महामारी की समाप्ति के बाद से अल्फाबेट (12,000 कर्मचारी), अमेजन (18,000), फेसबुक की मातृ कंपनी मेटा (11,000), ट्विटर (4,000), माइक्रोसॉफ्ट (10,000) और सेल्सफोर्स (8,000) सहित प्रमुख तकनीकी कंपनियों से बड़ी संख्या में कर्मचारियों को निकाल दिया गया. इसके अलावा, टेस्ला, नेटफ्लिक्स, रॉबिन हुड, स्नैप, कॉइनबेस और स्पॉटिफ सहित अन्य घरेलू नाम भी इस सूची में शामिल हैं, लेकिन उनकी छंटनी ऊपर बताई गई संख्या की तुलना में काफी कम है.

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को अपना रहीं कंपनियां

रिपोर्ट के अनुसार, महत्वपूर्ण रूप से इन आंकड़ों में कारोबार में कमी के कारण की जाने वाली छंटनी शामिल नहीं है, जैसे कि विज्ञापन एजेंसियां ​​कर्मचारियों की छंटनी करती हैं क्योंकि विज्ञापन खर्च कम हो जाता है या तकनीकी उत्पाद ऑर्डर कम होने के कारण निर्माताओं का आकार कम हो जाता है. इसके अलावा, स्वेच्छा से नौकरी छोड़ने वालों के बारे में नहीं भूलना चाहिए, क्योंकि वे कार्यालय आना नहीं हते हैं. अपने प्रबंधकों से नफरत करते हैं या एलोन मस्क के काम करने के तरीके से खुश नहीं हैं. उपरोक्त सभी के सीधे प्रभाव परामर्श, विपणन, विज्ञापन और विनिर्माण क्षेत्रों में महसूस किए जाएंगे, क्योंकि कंपनियां खर्च कम करेंगी और इसे एआई (आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस) में नवाचार में लगाएंगी.

छंटनी की वजह क्या है?

विज्ञापन खर्च और राजस्व कम होने से कंपनियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है. कई टेक कंपनियों को विज्ञापन के जरिए पैसा मिलता है. इसलिए, जब तक धन आने का यह रास्ता खुला था (जो कि विशेष रूप से कोविड से पहले के वर्षों में था) तब तक कर्मचारियों पर खुले हाथ से खर्च किया जाता था. पिछले साल विज्ञापन राजस्व में कमी आई, जिसका कारण आंशिक रूप से महामारी से उत्पन्न वैश्विक मंदी की आशंकाएं थीं. यह अपरिहार्य छंटनी थी. ऐप्पल एक अपवाद है. इसने हाल के वर्षों में अपने कर्मचारियों की संख्या में वृद्धि से परहेज किया और इसके परिणामस्वरूप कर्मचारियों की संख्या को कम नहीं करना पड़ा.

उपभोक्ताओं के लिए इसका क्या मतलब है?

हालांकि, सुर्खियां चौंकाने वाली हो सकती हैं, लेकिन छंटनी वास्तव में उपभोक्ताओं के लिए बहुत मायने नहीं रखेगी. कुल मिलाकर तकनीकी उत्पादों और सेवाओं पर काम अभी भी बढ़ रहा है. यहां तक ​​कि ट्विटर के बारे में कई लोगों ने अब तक खत्म होने की भविष्यवाणी की थी, वह अब अपने राजस्व के स्रोतों में विविधता लाने की कोशिश कर रहा है. इसका मतलब है कि कुछ परियोजनाएं, जैसे मार्क जुकरबर्ग की मेटावर्स उस रफ्तार से विकसित नहीं होंगी, जैसी कारोबार के दिग्गजों ने शुरू में उम्मीद की थी. पिछले कुछ वर्षों में कम ब्याज दरों के साथ-साथ उच्च कोविड-संबंधित खपत ने कारोबार के दिग्गजों को नवीन उत्पादों में निवेश करने का विश्वास दिलाया. एआई के अलावा, वह निवेश अब धीमा हो रहा है या खत्म हो चुका है.

जिनकी नौकरी चली गई, उनका क्या?

सवाल यह पैदा होता है कि प्रभावित व्यक्तियों के लिए छंटनी विनाशकारी हो सकती है, लेकिन इस मामले में प्रभावित कौन है? अधिकांश मामलों में अपनी नौकरी खोने वाले लोग शिक्षित और अत्यधिक योग्य रोजगार पेशेवर हैं. उन्हें विच्छेद पैकेज और समर्थन दिया जा रहा है, जो अक्सर न्यूनतम कानूनी आवश्यकताओं से अधिक होता है. उदाहरण के लिए, अमेजन ने विशेष रूप से संकेत दिया है कि इसका नुकसान तकनीकी कर्मचारियों और उनका समर्थन करने वालों में होगा, गोदामों में नहीं. आपके सीवी पर एक बड़े टेक नियोक्ता का नाम होना एक वास्तविक लाभ होगा, क्योंकि ये व्यक्ति अधिक प्रतिस्पर्धी रोजगार बाजार में चले जाते हैं. भले ही यह देखने में ऐसा न लगे, लेकिन यह काफी गर्म होगा जैसा कि कई लोगों ने आशंका जताई थी.

उद्योग के लिए क्या है मतलब?

रिपोर्ट में कहा गया है कि अनुभवी तकनीकी पेशेवर एक बार फिर से काम की तलाश में हैं. वेतन कम होने की संभावना है और रोजगार सुरक्षित करने के लिए उच्च स्तर के अनुभव और शिक्षा की आवश्यकता होगी. उद्योग में ये सुधार संभावित रूप से एक संकेत है कि यह बाजार के अन्य अधिक स्थापित भागों के अनुरूप गिर रहा है. हालिया छंटनी पर लोगों की नजर है, लेकिन वे समग्र अर्थव्यवस्था को ज्यादा प्रभावित नहीं करेंगे. वास्तव में, भले ही बिग टेक ने 1,00,000 कर्मचारियों को हटा दिया हो, फिर भी यह तकनीकी कार्यबल का एक अंश होगा.

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महामारी के दौरान बड़े पैमाने पर नियुक्तियां

रिपोर्ट की गई संख्याएं बड़ी लग सकती हैं, लेकिन उन्हें अक्सर समग्र वेतन व्यय या वास्तव में समग्र कर्मचारियों के अनुपात के रूप में रिपोर्ट नहीं किया जाता है. कुछ टेक कंपनियों के लिए वे महामारी के दौरान शुरू में हासिल की गई नई नियुक्तियों की भारी मात्रा का एक अंश भर हैं. बिग टेक अभी भी एक बड़ा नियोक्ता है और इसके बड़े उत्पाद हमारे जीवन के कई पहलुओं को प्रभावित करते रहेंगे.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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