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खाद्य तेलों पर बढ़ेगी सख्ती, कीमत कंट्रोल करने के लिए सरकार जल्द लाएगी नया नियम

Updated at : 24 Jul 2025 10:49 PM (IST)
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Edible Oil Regulation

Edible Oil Regulation

Edible Oil Regulation: खाद्य तेल क्षेत्र में पारदर्शिता और निगरानी बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार अगले सप्ताह नया 'वनस्पति तेल उत्पाद, उत्पादन और उपलब्धता (वीओपीपीए) विनियमन आदेश 2025' जारी करेगी. इस आदेश से खाद्य तेल के उत्पादन, मूल्य और स्टॉक की डिजिटल रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी. सरकार को वास्तविक समय में आंकड़े मिल सकेंगे, जिससे मूल्य नियंत्रण और उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी. यह आदेश उद्योग में अनुशासन लाएगा और उपभोक्ता हितों की रक्षा करेगा.

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Edible Oil Regulation: खाद्य तेलों की कीमत और गुणवत्ता पर नियंत्रण को लेकर केंद्र सरकार अब बड़ा कदम उठाने जा रही है. आने वाले सप्ताह में सरकार एक नया विनियमन आदेश जारी करेगी, जिससे वनस्पति तेल के उत्पादन, स्टॉक और मूल्य संबंधी जानकारी का डिजिटल ट्रैकिंग संभव हो सकेगा.

वीओपीपीए आदेश लेगा पुराने कानून की जगह

खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने बताया कि 2025 वनस्पति तेल उत्पाद, उत्पादन और उपलब्धता (वीओपीपीए) विनियमन आदेश के तहत मौजूदा 2011 के आदेश को बदल दिया जाएगा. यह नया आदेश डिजिटल रिपोर्टिंग को अनिवार्य बनाकर उत्पादन और स्टॉक की निगरानी को वास्तविक समय में मुमकिन बनाएगा.

पारदर्शिता और नियामक नियंत्रण में सुधार की उम्मीद

यह नया विनियमन सरकार को संघों पर निर्भर हुए बिना तेल उद्योग की गतिविधियों पर सीधा नियंत्रण और निगरानी देगा. चोपड़ा ने कहा कि वर्तमान में सरकार को उद्योग संघों से डेटा एकत्र करना पड़ता है, जिससे निगरानी में बाधा आती है. नए ढांचे से यह प्रक्रिया पारदर्शी और स्वतःस्फूर्त होगी.

उपभोक्ताओं को सस्ता तेल दिलाने की दिशा में पहल

खाद्य सचिव ने कहा कि सरकार ने कच्चे तेलों पर आयात शुल्क में कटौती इसलिए की है, ताकि उपभोक्ताओं को राहत मिल सके और अंतरराष्ट्रीय बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम हो. सरकार यह भी सुनिश्चित कर रही है कि इस कटौती का लाभ आम जनता तक पहुंचे.

खाद्य तेलों में अब भी ऊंची महंगाई दर चिंता का विषय

संजीव चोपड़ा ने बताया कि खाद्य मुद्रास्फीति में कमी के बावजूद तेलों में महंगाई बरकरार है. मूंगफली तेल को छोड़ दिया जाए, तो बाकी सभी खाद्य तेलों में 20–30% की सालाना महंगाई देखी गई है. सरकार इस पर भी नजर रखे हुए है.

सरसों तेल के लिए 7 लाख टन का बफर स्टॉक तैयार

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार के पास नेफेड द्वारा रखा गया 7 लाख टन सरसों का बफर स्टॉक मौजूद है. आवश्यकता पड़ने पर इसे जारी कर बाजार कीमतों को नियंत्रित किया जा सकता है. वर्तमान में सरसों तेल की कीमतें स्थिर बनी हुई हैं.

आत्मनिर्भरता की राह में अब भी कई चुनौतियां

भारत तिलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य तो रखता है, लेकिन सचिव ने स्वीकार किया कि सोयाबीन, सूरजमुखी और सरसों जैसी फसलों की पैदावार अभी भी वैश्विक औसत से कम है. इसे सुधारने के लिए अनुसंधान, तकनीकी निवेश और नई किस्मों के प्रयोग की आवश्यकता है.

नई किस्मों से उम्मीदें, योजनाओं से मिल रही गति

सरकार प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना और राष्ट्रीय खाद्य तेल-तिलहन मिशन जैसे कार्यक्रमों से उत्पादन बढ़ाने का प्रयास कर रही है. अब बीज प्रतिस्थापन दर सुधारने और किसानों तक नई किस्मों की पहुंच सुनिश्चित करने पर ज़ोर दिया जा रहा है.

उद्योग जगत का नजरिया

गोलमेज सम्मेलन में बोलते हुए अमेरिकी सोयाबीन निर्यात परिषद के केविन रोपके ने कहा कि सभी देशों के लिए हर वस्तु में आत्मनिर्भर बनना संभव नहीं. अमेरिका भारत को सोयाबीन तेल निर्यात के अवसर तलाश सकता है.

वैश्विक परिस्थितियां बदल रही हैं

आईवीपीए अध्यक्ष सुधाकर देसाई ने कहा कि भारत के खाद्य तेल आयात में हाल में 8% की गिरावट आई है. लेकिन, अब वैश्विक कीमतों में नरमी से स्थिति सुधर रही है. उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी स्टॉक को रणनीतिक रूप से जारी करने की आवश्यकता हो सकती है.

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नीति निर्माण में डेटा की भूमिका अहम

सुधाकर देसाई ने स्पष्ट किया कि वैश्विक आपूर्ति-खपत का असंतुलन, मूल्य अस्थिरता और भूराजनीतिक तनाव जैसे कारक तेल उद्योग को प्रभावित करते हैं. इन स्थितियों में डेटा-संचालित नीति और संवाद की भूमिका निर्णायक होगी. इस सम्मेलन में गोदरेज इंडस्ट्रीज़ के अध्यक्ष नादिर बी गोदरेज और आईटीसी के एग्रीबिजनेस प्रमुख एस शिवकुमार जैसे दिग्गजों ने भी शिरकत की और नीति सुझावों को साझा किया.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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