रसोई के बजट पर 'तेल' की मार: सरसों और सोयाबीन तेल की कीमतों में उछाल, मूंगफली में दिखी थोड़ी राहत
Published by : Abhishek Pandey Updated At : 17 May 2026 11:46 AM
Mustard-Soybean Oil Price Hike : रसोई के बजट पर फिर मार! मूंगफली तेल भले ही थोड़ा सस्ता हुआ हो, लेकिन सरसों और सोयाबीन तेल की कीमतों में जोरदार उछाल आया है. डॉलर के मुकाबले कमजोर रुपये और आयात शुल्क बढ़ने से बदल गए हैं दाम.
Mustard-Soybean Oil Price Hike : रसोई का बजट संभालने वालों के लिए एक मिली-जुली खबर आ रही है. बीते सप्ताह घरेलू बाजार में सरसों, सोयाबीन, पाम ऑयल (CPO) और बिनौला तेल की कीमतों में जोरदार तेजी दर्ज की गई है.
हालांकि, गुजरात से आ रही गर्मी की नई फसल की आहट के कारण मूंगफली तेल के दामों में थोड़ी गिरावट देखी गई है, जिससे मूंगफली तेल के उपभोक्ताओं को मामूली राहत मिली है. आइए समझते हैं कि पिछले एक हफ्ते में खाद्य तेलों के बाजार में क्या बड़े बदलाव हुए हैं.
क्यों बढ़े खाने वाले तेलों के दाम ?
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तेजी के पीछे वैश्विक बाजारों से ज्यादा घरेलू और तकनीकी कारण रहे:
- कमजोर रुपया: अंतरराष्ट्रीय बाजार में खाद्य तेलों के दाम में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं हुआ था, लेकिन डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया अपने सबसे निचले स्तर (₹96 के पास) पर होने की वजह से विदेशों से तेल मंगाना महंगा हो गया.
- सरकार द्वारा आयात शुल्क (Import Duty) में बढ़ोतरी: सरकार ने कच्चे पाम तेल (CPO) पर आयात शुल्क मूल्य ₹4.5 प्रति क्विंटल और सोयाबीन डीगम तेल पर ₹1.5 प्रति क्विंटल बढ़ा दिया है.
- प्लांट्स द्वारा ज्यादा कीमतों पर खरीद: मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के सोयाबीन प्लांट मालिकों ने खरीद के दाम बढ़ा दिए हैं, जिससे कीमतों को सपोर्ट मिला.
सरसों और सोयाबीन की चमक बढ़ी, किसानों की चांदी
बाजार सूत्रों का कहना है कि सरसों का तेल बाकी तेलों के मुकाबले काफी किफायती है, इसलिए इसकी मांग बहुत ज्यादा है. राहत की बात यह है कि इस बार किसानों को सोयाबीन, सरसों और बिनौला (कपास) की फसलों के लिए सरकार के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से काफी ज्यादा दाम मिल रहे हैं. उदाहरण के लिए, कपास नरमा का भाव इस समय MSP से 10-11% ऊपर ₹9,000 प्रति क्विंटल के पार चल रहा है. अच्छे दाम मिलने से उम्मीद है कि अगली बार किसान इन फसलों की और ज्यादा बुआई करेंगे.
बीते सप्ताह क्या रहे नए रेट्स ?
पिछले सप्ताह के मुकाबले कीमतों में आया बदलाव कुछ इस प्रकार है.
| तेल/तिलहन का प्रकार | बदलाव (प्रति क्विंटल/टिन) | नया थोक भाव (₹) |
| सरसों दाना | ₹175 महंगा | ₹7,175 – ₹7,200 प्रति क्विंटल |
| सरसों तेल | ₹500 महंगा | ₹14,850 प्रति क्विंटल |
| सोयाबीन दाना | ₹350 महंगा | ₹7,300 – ₹7,350 प्रति क्विंटल |
| सोयाबीन दिल्ली तेल | ₹150 महंगा | ₹15,825 प्रति क्विंटल |
| कच्चा पामतेल (CPO) | ₹225 महंगा | ₹13,850 प्रति क्विंटल |
| पामोलीन दिल्ली | ₹250 महंगा | ₹15,650 प्रति क्विंटल |
| बिनौला तेल | ₹400 महंगा | ₹15,650 प्रति क्विंटल |
| मूंगफली तिलहन | ₹125 सस्ता | ₹6,225 – ₹7,000 प्रति क्विंटल |
| मूंगफली तेल (गुजरात) | ₹250 सस्ता | ₹15,500 प्रति क्विंटल |
सूरजमुखी की खेती गायब होने पर जताई चिंता
बाजार के जानकारों ने एक कड़वी सच्चाई की तरफ भी ध्यान दिलाया. 90 के दशक में आंध्र प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में करीब 27 लाख हेक्टेयर में सूरजमुखी (Sunflower) की बेहतरीन खेती होती थी. लेकिन सरकारों की अनदेखी और कुछ समीक्षकों द्वारा महंगाई के नाम पर किसानों को सही दाम न मिलने देने के कारण आज देश में इसकी खेती लगभग खत्म होने की कगार पर है.
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अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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