ICICI ऋण धोखाधड़ी : Decade Achiever से सीबीआई की हिरासत तक,चंदा कोचर की जिंदगी में कैसे आया ये बदलाव
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 28 Dec 2022 5:16 PM
चंदा कोचर पर यह आरोप है कि उन्होंने बैंक के सीईओ पद पर रहते हुए पद का दुरुपयोग किया और अपने पति को आर्थिक लाभ पहुंचाया. चंदा कोचर के पति दीपक कोचर और वीडियोकाॅन ग्रुप के फाउंडर वेणुगोपाल धूत ने एक डील की थी.
ICICI Bank Fraud Case : सीबीआई की एक स्पेशल कोर्ट ने आज ऋण धोखाधड़ी मामले में आईसीआईसीआई बैंक की पूर्व सीईओ चंदा कोचर, उनके पति दीपक कोचर और वीडियोकॉन के फाउंडर वेणुगोपाल धूत की सीबीआई रिमांड 29 दिसंबर तक बढ़ा दी. चंदा कोचर और उसके पति दीपक कोचर को सीबीआई ने सोमवार को रात को गिरफ्तार किया था.
चंदा कोचर पर यह आरोप है कि उन्होंने बैंक के सीईओ पद पर रहते हुए पद का दुरुपयोग किया और अपने पति को आर्थिक लाभ पहुंचाया. चंदा कोचर के पति दीपक कोचर और वीडियोकाॅन ग्रुप के फाउंडर वेणुगोपाल धूत ने एक डील की थी और बैंक से 3250 करोड़ का लोन लिया था. इस लोन को दिलाने में चंदा कोचर की अहम भूमिका थी. इस लोन को पास कराने में आरबीआई के नियमों का उल्लंघ किया गया. मामले की जांच एजेंसी सीबीआई ने चंदा कोचर और दीपक कोचर के अलावा दीपक कोचर द्वारा संचालित नूपावर रिन्यूएबल्स (एनआरएल), सुप्रीम एनर्जी, वीडियोकॉन इंटरनेशनल इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड तथा वीडियोकॉन इंडस्ट्रीज लिमिटेड को भारतीय दंड संहिता की धाराओं और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 2019 के तहत दर्ज प्राथमिकी में आरोपी बनाया है.
3250 करोड़ लोन को मंजूरी आरबीआई की ऋण नीति का उल्लंघन करके दी गयी, इस ऋण मंजूरी के बदले वेणुगोपाल धूत ने सुप्रीम एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड (एसईपीएल) के माध्यम से नूपावर रिन्यूएबल्स में 64 करोड़ रुपये का निवेश किया और 2010 से 2012 के बीच हेरफेर करके पिनेकल एनर्जी ट्रस्ट को एसईपीएल ट्रांसफर किया. पिनेकल एनर्जी ट्रस्ट तथा एनआरएल का प्रबंधन दीपक कोचर कर रहे थे.
चंदा कोचर भले ही आज सीबीआई की हिरासत में हों और उनपर धोखाधड़ी का मामला चल रहा हो, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब चंदा कोचर आदर्श और सशक्त महिला के रूप में जानी जाती थी और उनकी इस पहचान पर मुहर फोर्ब्स और इंडिया टुडे जैसी पत्रिकाओं ने मुहर भी लगायी थी. 2005 में फाॅर्चून ने उन्हें पावरफुल बिजनेस वूमन की लिस्ट में शामिल किया था. 2009 में फोर्ब्स ने उन्हें विश्व की सौ शक्तिशाली महिलाओं में 20वां स्थान दिया था. वहीं 2010 में उन्हें 10 स्थान दिया गया था. बिजनेस टुडे की मोस्ट पावर वूमेन की लिस्ट में उन्हें वर्ष 2011 में जगह मिली. ग्लोबस फाइनांस की लिस्ट में उन्हें 50 सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों की सूची में शामिल किया गया था. 2014 में एसोचैम ने उन्हें डिकेट एचीवर अवार्ड से भी सम्मानित किया था. वहीं 2011 में उन्हें पद्मभूषण भी दिया गया था.
चंदा कोचर ने 1990 के दशक में आईसीआईसीआई बैंक की स्थापना में अहम रोल निभाया. 1993 में उन्हें कोर टीम मेंबर के रूप में नियुक्त किया गया था जिनपर बैंक स्थापित करने की जिम्मेदारी थी. उन्हें 1994 में सहायक महाप्रबंधक (एजीएम) और फिर 1996 में उप महाप्रबंधक (डीजीएम) बनाया गया था. 1996 में कोचर ने ICICI बैंक के नवगठित इंफ्रास्ट्रक्चर इंडस्ट्री ग्रुप का नेतृत्व किया, जिसका उद्देश्य बिजली, दूरसंचार और परिवहन के क्षेत्रों में काम करना और विशेषज्ञता हासिल करना था. इसके बाद चंदा कोचर ने मुड़कर नहीं देखा और लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ती गयीं. 2006 में कोचर आईसीआईसीआई बैंक की डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर बनीं. 2009 में चंदा कोचर बैंक की सीईओ बनीं. 2018 में ऋण धोखाधड़ी मामले के सामने आने के बाद उन्हें पद से इस्तीफा देना पड़ा.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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