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Home Loan EMI: बिल्डर की गलती से नहीं रुकेगा आपका होम लोन, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

Home Loan EMI: अगर कोई हाउसिंग प्रोजेक्ट अटक जाए या बिल्डर डिफॉल्ट कर दे, तब भी होम लोन अपने-आप नहीं रुकता. टैक्स एवं निवेश विशेषज्ञ बलवंत जैन बताते हैं कि बैंक और बिल्डर की जिम्मेदारी अलग-अलग होती है और ईएमआई न चुकाने से आपका क्रेडिट स्कोर बुरी तरह खराब हो सकता है. बिल्डर की गलती के बावजूद ईएमआई देना जरूरी है. बैंक का लोन अप्रूवल आपके घर की गारंटी नहीं देता. खराब क्रेडिट हिस्ट्री भविष्य में नया लोन लेना मुश्किल बना देती है.

Home Loan EMI: जब कोई आवास परियोजना बीच में अटक जाती है या बिल्डर भाग जाता है, तो सबसे बड़ा झटका घर खरीदार को लगता है. एक तरफ न घर मिलता है, दूसरी तरफ बैंक की ईएमआई सिर पर चलती रहती है. ऐसे हालात में ज्यादातर लोग यह मान लेते हैं कि जब बिल्डर ने धोखा दिया है, तो होम लोन भी अपने-आप रुक जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं है. बिल्डर की गलती या डिफॉल्ट से आपका होम लोन नहीं रुकेगा. आइए, जानते हैं कि इसके बारे में टैक्स एवं निवेश विशेषज्ञ बलवंत जैन क्या कहते हैं?

बैंक और बिल्डर की जिम्मेदारी अलग-अलग

टैक्स एवं निवेश विशेषज्ञ बलवंत जैन कहते हैं कि बैंक और बिल्डर की भूमिका पूरी तरह अलग होती है. बैंक आपको पैसा उधार देता है, जबकि बिल्डर का काम घर बनाकर देना होता है. अगर बिल्डर प्रोजेक्ट में देरी करता है, दिवालिया हो जाता है या फरार हो जाता है, तो उसकी जिम्मेदारी बैंक पर नहीं आती. बैंक के लिए आप कर्ज लेने वाले हैं और लोन एग्रीमेंट के अनुसार ईएमआई चुकाना आपकी कानूनी जिम्मेदारी है, चाहे आपको घर मिला हो या नहीं.

लोन अप्रूवल मालिकाना हक की गारंटी नहीं

बलवंत जैन कहते हैं कि अक्सर खरीदार यह मान लेते हैं कि अगर बैंक ने लोन पास कर दिया, तो प्रोजेक्ट पूरी तरह सुरक्षित है, लेकिन ऐसा सोचना खतरनाक हो सकता है. बैंक की जांच मुख्य रूप से अपने पैसे की सुरक्षा के लिए होती है, न कि खरीदार के पूरे हितों की रक्षा के लिए वह जिम्मेदार है. संपत्ति के कानूनी पहलू, बिल्डर की विश्वसनीयता और समय पर निर्माण की गारंटी की अंतिम जिम्मेदारी खरीदार की ही होती है.

ईएमआई न देने से सबसे बड़ा नुकसान

अगर आप बिल्डर की गलती के कारण ईएमआई रोक देते हैं, तो इसका सीधा असर आपके क्रेडिट स्कोर पर पड़ता है. लगातार ईएमआई न चुकाने से आपका अकाउंट डिफॉल्टर की कैटेगरी में चला जाता है. बैंक इस जानकारी को क्रेडिट ब्यूरो को भेजते हैं, जिससे आपका क्रेडिट इतिहास खराब हो जाता है. इसका मतलब यह है कि भविष्य में आपको न नया होम लोन, न पर्सनल लोन और न ही आसानी से क्रेडिट कार्ड ही मिलेगा.

खराब क्रेडिट स्कोर से बंद हो जाते हैं नए लोन के रास्ते

एक साल या उससे ज्यादा समय तक ईएमआई न देने से क्रेडिट स्कोर बुरी तरह गिर जाता है. बकाया चुका देने के बाद भी स्कोर सुधरने में काफी समय लगता है. जब तक पुराने लोन की सभी बकाया ईएमआई क्लियर नहीं होंगी, तब तक किसी भी बैंक या फाइनेंशियल संस्थान से नया लोन मिलना लगभग नामुमकिन हो जाता है.

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ईएमआई जारी रखें

बलवंत जैन का साफ कहना है कि बिल्डर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई, रेरा में शिकायत या कोर्ट केस अपनी जगह है, लेकिन ईएमआई रोकना भारी भूल हो सकती है. अपने क्रेडिट स्कोर को बचाने के लिए प्री-ईएमआई या ईएमआई नियमित रूप से चुकाते रहना ही समझदारी है. वरना, एक रुका हुआ प्रोजेक्ट न सिर्फ आपका घर छीन लेगा, बल्कि आपकी वित्तीय साख भी सालों के लिए खराब कर देगा.

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KumarVishwat Sen
KumarVishwat Sen
कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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