फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस ट्रेडिंग करने वालों पर टैक्स की मार, बजट में बड़ा झटका

F&O Trading
F&O Trading: बजट प्रस्ताव के मुताबिक, फ्यूचर्स ट्रेड पर STT को मौजूदा 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत किया जाएगा. वहीं, ऑप्शंस प्रीमियम पर लगने वाला STT 0.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत और ऑप्शंस के एक्सरसाइज पर लगने वाला STT 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है.
F&O Trading: केंद्रीय बजट 2026–27 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) ट्रेडिंग को हतोत्साहित करने के लिए सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) में बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है. सरकार का मानना है कि डेरिवेटिव्स सेगमेंट में बढ़ती सट्टेबाजी रिटेल निवेशकों के लिए नुकसानदेह साबित हो रही है, जिसे नियंत्रित करना जरूरी है.
बजट प्रस्ताव के मुताबिक, फ्यूचर्स ट्रेड पर STT को मौजूदा 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत किया जाएगा. वहीं, ऑप्शंस प्रीमियम पर लगने वाला STT 0.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत और ऑप्शंस के एक्सरसाइज पर लगने वाला STT 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है. वित्त मंत्री ने कहा कि इन बदलावों का मकसद डेरिवेटिव्स ट्रेडिंग में अत्यधिक वॉल्यूम को कम करना है.
बजट में शेयर बायबैक को लेकर भी बड़ा बदलाव किया गया है. सरकार ने सभी तरह के शेयरहोल्डर्स के लिए बायबैक को कैपिटल गेन टैक्स के दायरे में लाने का प्रस्ताव दिया है. हालांकि, टैक्स आर्बिट्रेज के दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रमोटर्स पर अतिरिक्त बायबैक टैक्स लगाया जाएगा. इसके तहत कॉरपोरेट प्रमोटर्स के लिए प्रभावी टैक्स दर 22 प्रतिशत और नॉन-कॉरपोरेट प्रमोटर्स के लिए 30 प्रतिशत होगी.
मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि STT में तेज बढ़ोतरी से ट्रेडर्स, हेजर्स और आर्बिट्रेजर्स की लागत बढ़ेगी. कोटक सिक्योरिटीज के एमडी और सीईओ श्रीपाल शाह के अनुसार, इससे डेरिवेटिव्स सेगमेंट में ट्रेडिंग वॉल्यूम घट सकता है. उनका कहना है कि सरकार का इरादा राजस्व बढ़ाने से ज्यादा ट्रेडिंग गतिविधियों को सीमित करने का लगता है.
सेबी और सरकार पहले से ही F&O सेगमेंट में रिटेल निवेशकों को हो रहे भारी नुकसान को लेकर चिंतित हैं. सेबी की एक स्टडी में सामने आया है कि करीब 93 प्रतिशत व्यक्तिगत ट्रेडर्स को इक्विटी F&O ट्रेडिंग में नुकसान उठाना पड़ता है. इसके बावजूद 75 प्रतिशत से ज्यादा घाटे में रहने वाले निवेशक लगातार इस सेगमेंट में ट्रेडिंग करते रहते हैं.
डेरिवेटिव्स बाजार कीमतों की खोज और जोखिम प्रबंधन में मदद करता है, लेकिन इसमें जोखिम भी काफी अधिक होता है. सेबी पहले ही यह साफ कर चुका है कि डेरिवेटिव्स सेगमेंट में बढ़ती सट्टेबाजी इसके मूल उद्देश्य के खिलाफ है. सरकार का मानना है कि STT में बढ़ोतरी और अन्य नियामकीय कदमों से निवेशकों की सुरक्षा मजबूत होगी और बाजार में अनुशासन आएगा.
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By Abhishek Pandey
अभिषेक पाण्डेय पिछले 2 वर्षों से प्रभात खबर (Prabhat Khabar) में डिजिटल जर्नलिस्ट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने पत्रकारिता के प्रतिष्ठित संस्थान 'दादा माखनलाल की बगिया' यानी माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल (MCU) से मीडिया की बारीकियां सीखीं और अपनी शैक्षणिक योग्यता पूरी की है। अभिषेक को वित्तीय जगत (Financial Sector) और बाजार की गहरी समझ है। वे नियमित रूप से स्टॉक मार्केट (Stock Market), पर्सनल फाइनेंस, बजट और बैंकिंग जैसे जटिल विषयों पर गहन शोध के साथ विश्लेषणात्मक लेख लिखते हैं। इसके अतिरिक्त, इंडस्ट्री न्यूज, MSME सेक्टर, एग्रीकल्चर (कृषि) और केंद्र व राज्य सरकार की सरकारी योजनाओं (Sarkari Yojana) का प्रभावी विश्लेषण उनके लेखन के मुख्य क्षेत्र हैं। आम जनमानस से जुड़ी यूटिलिटी (Utility) खबरों और प्रेरणादायक सक्सेस स्टोरीज को पाठकों तक पहुँचाने में उनकी विशेष रुचि है। तथ्यों की सटीकता और सरल भाषा अभिषेक के लेखन की पहचान है, जिसका उद्देश्य पाठकों को हर महत्वपूर्ण बदलाव के प्रति जागरूक और सशक्त बनाना है।
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