कोरोना वायरस का फार्मा सेक्टर पर असर : सरकार ने 26 औषधि सामग्री और दवाओं के निर्यात पर लगायी रोक

Updated at : 03 Mar 2020 6:24 PM (IST)
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कोरोना वायरस का फार्मा सेक्टर पर असर : सरकार ने 26 औषधि सामग्री और दवाओं के निर्यात पर लगायी रोक

कोरोना वायरस का असर भारत के फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज पर देखने को मिल रहा है. इसी का नतीजा है कि सरकार ने पैरासिटामोल, बिटामिन बी और बिटामिन 12 समेत कई दवाओं और करीब 26 दवा सामग्रियों के निर्यात पर तत्काल रोक लगा दी है.

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नयी दिल्ली : चीन से शुरू हुए कोरोना वायरस का असर अब देश के दवा उद्योग में दिखना शुरू हो गया है. सरकार ने 26 तरह की दवा सामग्री और पैरासेटामोल, विटामिन बी1 और बी12 सहित कुछ दवाओं के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है. सरकार के इस कदम के बाद अब कुछ सक्रिय औषधि सामग्री (एपीआई) और फॉर्मुलेशंस के निर्यात के लिए वाणिज्य मंत्रालय के तहत आने वाले विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) से लाइसेंस लेने की जरूरत होगी. अब तक इन दवा सामग्रियों के निर्यात पर किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं था.

डीजीएफटी ने एक अधिसूचना में कहा है कि एपीआई से तैयार कुछ खास तरह के एपीआई और फार्मुलेशंस का निर्यात तुरंत प्रभाव से प्रतिबंधित किया जाता है. यह प्रतिबंध अगले आदेश तक जारी रहेगा. एपीआई विभिन्न प्रकार की दवाओं के निर्माण में कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है.

सरकार की ओर से की गयी यह घोषणा कोरोना वायरस के दुनिया के कई देशों में फैलने के बाद उपजी चिंता को देखते हुए काफी महत्वपूर्ण है. हालांकि, भारत एपीआई का भारी मात्रा में चीन से आयात करता है, लेकिन सीमित मात्रा में यह इसका निर्यात भी करता है. पिछले साल देश से 22.50 करोड़ डॉलर का एपीआई का निर्यात किया गया. वहीं, देश में एपीआई का सालाना आयात 3.5 अरब डॉलर का होता है. इसमें से करीब ढाई अरब डॉलर का आयात चीन से किया जाता है.

देश में सोमवार को कोरोना वायरस के दो नये मामले सामने आये हैं. एक मामला राष्ट्रीय राजधानी में सामने आया है. कोरोना वायरस फैलने से अब तक दुनियाभर में 3,000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. इससे पहले फरवरी में औषधि विभाग ने डीजीएफटी से 12 एपीआई और फॉर्मुलेशंस के निर्यात को प्रतिबंधित करने कहा था. इनमें साधारण एंटीबायोटिक्स और विटामिन शामिल हैं.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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