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Budget 2023 : झारखंड में मातृत्व लाभ, पेंशन और राशन को प्राथमिकता दे सरकार

Updated at : 31 Jan 2023 9:13 PM (IST)
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Budget 2023 : झारखंड में मातृत्व लाभ, पेंशन और राशन को प्राथमिकता दे सरकार

भोजन का अभियान झारखंड ने कहा है कि कुपोषण खत्म करने के लिए सरकार को मध्याह्न भोजन और आंगनबाड़ी केंद्रों में हर दिन बच्चों को अंडा देना चाहिए. सरकारी स्कूलों में सप्ताह में पांच अंडे और आंगनबाड़ी केंद्रों में सप्ताह में 6 अंडे देने का वादा हेमंत सोरेन की सरकार ने बार-बार किया है.

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भोजन का अधिकार अधिनियम झारखंड ने प्रदेश की हेमंत सोरेन सरकार से मांग की है कि वह वर्ष 2023-24 के बजट में अंडा, मातृत्व हक, पेंशन और राशन को प्राथमिका दे. बुधवार को राजधानी रांची में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस संस्था ने कहा कि झारखंड में कुपोषण की खतरनाक स्थिति को दूर करने के लिए यह जरूरी है.

कुपोषण खत्म करने के लिए बच्चों को अंडा देना जरूरी

भोजन का अभियान झारखंड ने कहा है कि राज्य से कुपोषण को खत्म करने के लिए सरकार को मध्याह्न भोजन और आंगनबाड़ी केंद्रों में हर दिन बच्चों को अंडा देना चाहिए. संस्था की ओर से कहा गया है कि सरकारी स्कूलों में सप्ताह में पांच अंडे और आंगनबाड़ी केंद्रों में सप्ताह में 6 अंडे देने का वादा झारखंड की हेमंत सोरेन की सरकार ने बार-बार किया है. लेकिन, आज तक उन वादों को पूरा नहीं किया.

प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद भोजन का अधिकार अधिनियम झारखंड ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की, जिसमें कहा कि अभी स्कूलों में एक सप्ताह में बच्चों को दो अंडे मिलते हैं. छह साल से कम उम्र के बच्चों को एक भी अंडा अभी नहीं मिल रहा है. इसमें कहा गया है कि झारखंड में कुपोषण से निबटने में अंडा अहम भूमिका निभा सकता है. पिछले सप्ताह सैकड़ों लोगों ने झारखंड के मुख्यमंत्री को चिट्ठी लिखकर मध्याह्न भोजन और आंगनबाड़ी केंद्रों में हर दिन अंडा देने की मांग की थी. इसमें यह भी बताया गया है कि देश के कई राज्य पहले से ही ऐसा कर रहे हैं.

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मातृत्व लाभ का सार्वभौमीकरण

संस्था ने मातृत्व अधिकारों के सार्वभौमीकरण की भी मांग की है. उसका कहना है कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत महिलाओं को पहले बच्चे के लिए 5,000 रुपये का मातृत्व लाभ दिया जाता है (अगर दूसरा बच्चा लड़की है, तो उसके लिए विस्तारित). यह राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, जो बिना किसी शर्त के 6,000 रुपये मातृत्व लाभ देने के लिए कहता है.

मातृत्व लाभ से माताओं को अपने पोषण में सुधार करने और अपने नवजात बच्चे की बेहतर देखभाल करने में मदद मिल सकती है. झारखंड में यह पात्रता विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, जहां शिशु मृत्यु दर 38 फीसदी है. यहां 57 फीसदी गर्भवती महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं. सरका को एनएफएसए मानदंडों के अनुरूप हर बच्चे पर मातृत्व अधिकार सुनिश्चित करना चाहिए और लाभ की राशि का समय पर वितरण करना चाहिए.

सामाजिक सुरक्षा पेंशन का विस्तार

संस्था ने कहा है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में जो घोषणा पत्र जारी किया था, उसमें बुजुर्गों, विधवा और नि:शक्तों के लिए सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि को 1,000 रुपये से बढ़ाकर 2,500 रुपये प्रति माह करने का वादा किया था. बावजूद इसके अब भी लोगों को 1,000 रुपये ही पेंशन मिल रही है. सरकार को तुरंत इस मासिक पेंशन को बढ़ाकर कम से कम 3,000 रुपये कर देना चाहिए.

ग्रीन राशन कार्ड धारकों को नियमित चावल की आपूर्ति

भोजन का अधिकार अधिनियम झारखंड ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि ग्रीन कार्ड धारकों को नियमित रूप से चावल की आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए. ग्रीन राशन कार्ड जारी करने के इस सरकार के फैसले को संस्था ने सराहनीय कदम बताया है. साथ ही कहका है कि पिछले कई महीनों से इस श्रेणी के राशन कार्ड धारकों को चावल की आपूर्ति नियमित रूप से नहीं हो रही है. सरकार को इसका समाधान तुरंत करना चाहिए.

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Mithilesh Jha

लेखक के बारे में

By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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