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सिर्फ 10 मिनट में नहीं मिलेगी क्विक डिलीवरी! ब्लिंकिट ने टैगलाइन हटाया, अब स्विगी और जेप्टो की बारी

Updated at : 13 Jan 2026 7:04 PM (IST)
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Delivery In 10 Minutes

ब्लिंकिट ने 10 मिनट में डिलीवरी के दावे वाला टैगलाइन हटाया.

Delivery In 10 Minutes: भारत के क्विक कॉमर्स सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. ब्लिंकिट ने अपने प्लेटफॉर्म से 10 मिनट में डिलीवरी का दावा हटा दिया है. यह कदम केंद्रीय श्रम मंत्रालय की दखल और गिग वर्कर्स की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच उठाया गया है. अब संकेत हैं कि स्विगी इंस्टामार्ट और जेप्टो भी अपनी ब्रांडिंग रणनीति बदल सकते हैं. यह फैसला डिलीवरी कर्मियों के कल्याण और सेक्टर की दिशा को नया मोड़ दे सकता है.

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Delivery In 10 Minutes: क्विक कॉमर्स सेक्टर में बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है. इटर्नल ग्रुप के स्वामित्व वाली इकाई ब्लिंकिट ने अपने सभी प्लेटफॉर्म से 10 मिनट में डिलीवरी का दावा हटा दिया है. कंपनी ने अपनी प्रमुख टैगलाइन 10 मिनट में 10,000 से अधिक उत्पाद से बदलकर अब आपके दरवाजे पर 30,000 से अधिक उत्पाद कर दी है. कंपनी की ओर से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब डिलीवरी कर्मियों के कल्याण को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे और सरकार ने इस पर संज्ञान लिया था.

श्रम मंत्रालय के दखल के बाद बदला रुख

सूत्रों के मुताबिक, यह बदलाव केंद्रीय श्रम मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद किया गया है. मंत्रालय ने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के साथ बातचीत कर इतनी सख्त समय-सीमा में डिलीवरी के दबाव से गिग वर्कर्स पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर चिंता जताई थी. चर्चा का मुख्य उद्देश्य डिलीवरी कर्मियों के लिए बेहतर सुरक्षा, कामकाजी हालात और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करना था. मंत्रालय का कहना है कि बेहद कम समय में डिलीवरी के लक्ष्य सड़क दुर्घटनाओं, मानसिक दबाव और स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ा सकते हैं.

स्विगी और जेप्टो भी कर सकते हैं बदलाव

ब्लिंकिट के इस कदम के बाद संकेत मिल रहे हैं कि स्विगी इंस्टामार्ट और जेप्टो जैसे अन्य क्विक कॉमर्स मंच भी जल्द ही अपनी 10 मिनट में डिलीवरी ब्रांडिंग से दूरी बना सकते हैं. फिलहाल, गूगल प्ले स्टोर और आईओएस ऐप स्टोर पर जेप्टो, इंस्टामार्ट और बिगबास्केट के लिए 10 मिनट वाली ब्रांडिंग दिखाई दे रही है, लेकिन ब्लिंकिट के लिए यह अब हटा दी गई है. उद्योग से जुड़े जानकारों का मानना है कि सरकारी दबाव और सार्वजनिक बहस के चलते आने वाले समय में पूरे सेक्टर की मार्केटिंग रणनीति बदल सकती है.

गिग वर्कर्स की हड़ताल ने खींचा ध्यान

10 मिनट में डिलीवरी के वादे के खिलाफ गिग वर्कर्स की नाराजगी पहले ही सामने आ चुकी थी. वर्ष 2025 की पूर्व संध्या पर देशभर में गिगकर्मियों ने हड़ताल की थी. इस दौरान उन्होंने अत्यधिक दबाव, असुरक्षित परिस्थितियों, कम आय और स्वास्थ्य जोखिमों का मुद्दा उठाया था. इस हड़ताल ने सरकार, उद्योग और समाज का ध्यान डिलीवरी कर्मियों की वास्तविक स्थिति की ओर खींचा.

दीपिंदर गोयल का बयान और कंपनी का पक्ष

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पुराना ट्विटर) पर इटर्नल ग्रुप के सीईओ दीपिंदर गोयल ने कहा था कि 10 मिनट में डिलीवरी का वादा डिलीवरी कर्मियों पर दबाव नहीं डालता और न ही यह असुरक्षित ड्राइविंग को बढ़ावा देता है, क्योंकि डिलीवरी पार्टनर्स को ऐप पर कोई 10 मिनट का टाइमर नहीं दिखाया जाता. उन्होंने यह भी कहा था कि तेज डिलीवरी मुख्य रूप से इसलिए संभव होती है, क्योंकि डार्क स्टोर्स ग्राहकों के बहुत पास होते हैं, न कि इसलिए कि सड़क पर तेज रफ्तार से गाड़ी चलाई जाती है. इसके बावजूद, बढ़ती आलोचना और सरकारी हस्तक्षेप के बाद ब्लिंकिट ने अपना ब्रांड संदेश बदल दिया.

संसद में भी उठा गिग वर्कर्स का मुद्दा

गिग वर्कर्स की स्थिति संसद में भी गूंज चुकी है. अभी हाल ही में खत्म हुए संसद के सत्र में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने गिग वर्कर्स के दर्द और पीड़ा का मुद्दा उठाया था. उन्होंने कहा कि ऐप-आधारित डिलीवरी कर्मी अत्यधिक दबाव में और कई बार खराब मौसम जैसी कठिन परिस्थितियों में काम करते हैं. उन्होंने क्विक कॉमर्स और दूसरे प्लेटफॉर्म बिजनेस के लिए स्पष्ट नियम बनाने और गिग वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा देने की मांग की. संसद में उन्होंने सम्मान, सुरक्षा और उचित वेतन पर जोर दिया था.

सामाजिक सुरक्षा संहिता और ई-श्रम पोर्टल

पहली बार गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स की परिभाषा सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 में दी गई है, जो 21 नवंबर 2025 से लागू हो चुकी है. इस संहिता में जीवन और विकलांगता बीमा, दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य और मातृत्व लाभ, वृद्धावस्था सुरक्षा जैसे उपायों का प्रावधान है. इसके अलावा, कल्याणकारी योजनाओं के वित्तपोषण के लिए सामाजिक सुरक्षा कोष और राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्ड की स्थापना का भी प्रावधान किया गया है. श्रम मंत्रालय ने 26 अगस्त 2021 को ई-श्रम पोर्टल लॉन्च कर असंगठित श्रमिकों और प्लेटफॉर्म वर्कर्स का राष्ट्रीय डेटाबेस भी तैयार किया है.

गिग वर्कर की आवाज

केंद्रीय श्रम मंत्रालय के दखल पर एक गिग वर्कर ने कहा, “सरकार ने जो किया है, वह अच्छा है. यह बहुत मुश्किल था. मेरे दो एक्सीडेंट हुए हैं, पैर दो बार फ्रैक्चर हुआ. अगर हमें ज्यादा समय मिलेगा, तो हमें ज्यादा सुविधा और सुरक्षा मिलेगी. पहले बहुत जल्दी डिलीवरी करनी पड़ती थी. जरा सी देरी से रेटिंग और रैंक पर असर पड़ता था.”

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क्विक कॉमर्स सेक्टर में बदलाव के संकेत

ब्लिंकिट के फैसले को क्विक कॉमर्स मॉडल में बड़े बदलाव की शुरुआत माना जा रहा है. आने वाले समय में कंपनियां सिर्फ स्पीड के बजाय सुरक्षा, भरोसे और स्थिर डिलीवरी अनुभव पर ज्यादा जोर दे सकती हैं. इससे न सिर्फ गिग वर्कर्स की स्थिति में सुधार हो सकता है, बल्कि पूरे सेक्टर की छवि भी बदल सकती है.

भाषा इनपुट के साथ

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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