पश्चिम एशिया संकट का साया ! कच्चे तेल की कीमतों और भारत की रफ्तार पर ADB की रिपोर्ट
सांकेतिक तस्वीर (फोटो : Canva)
ADB Report : एडीबी (ADB) के अनुसार पश्चिम एशिया संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतें 96 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकती हैं, जिससे भारत की जीडीपी दर 0.6% गिरकर 6.3% रह सकती है और महंगाई में भारी उछाल आने की आशंका है.
ADB Report : एशियाई विकास बैंक (ADB) के अनुसार, पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में बढ़ता तनाव वैश्विक अर्थव्यवस्था और विशेष रूप से भारत के लिए चिंता का विषय है. मुख्य अर्थशास्त्री अल्बर्ट पार्क ने चेतावनी दी है कि इसके कारण कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रह सकती हैं.
कच्चे तेल की कीमतों का अनुमान
ADB का अनुमान है कि मौजूदा संकट के कारण तेल की कीमतों में नरमी आने की संभावना कम है.
- 2026 में औसत कीमत: 96 डॉलर प्रति बैरल रहने का अनुमान है.
2027 में औसत कीमत: 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर आ सकती है. पार्क के अनुसार, बाजार में तेल की कमी और वायदा बाजार के प्रीमियम के चलते कीमतें अभी ऊंचे स्तर पर ही टिके रहने की आशंका है. - भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर (जीडीपी और महंगाई)
भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर (जीडीपी और महंगाई)
भारत अपनी तेल और गैस की जरूरतों के लिए आयात पर बहुत अधिक निर्भर है, इसलिए वैश्विक कीमतों का असर यहाँ अधिक गहरा होगा.
- जीडीपी (GDP) वृद्धि दर: तेल की ऊंची कीमतों के कारण भारत की विकास दर में 0.6% की गिरावट आ सकती है, जिससे यह गिरकर 6.3% रह सकती है. (ADB ने पहले इसे 6.9% रहने का अनुमान लगाया था).
- महंगाई (Inflation): इस साल महंगाई दर में 2.4% की भारी बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे यह 6.9% के स्तर पर पहुंच सकती है.
अल नीनो और खाद्य सुरक्षा की चुनौती
तेल संकट के अलावा, खेती और खाद्य सुरक्षा पर भी संकट के बादल हैं.
- फसल की पैदावार: अल्बर्ट पार्क ने कहा कि उर्वरकों (Fertilizer) की बढ़ती कीमतें किसानों को कम खाद इस्तेमाल करने पर मजबूर कर सकती हैं, जिससे पैदावार कम होगी.
- चावल का निर्यात: चावल के वैश्विक व्यापार में भारत की बड़ी हिस्सेदारी है. भारत में फसल खराब होने या कीमतों में उछाल आने का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है.
भविष्य की उम्मीद
नकारात्मक अनुमानों के बावजूद, पार्क ने भारत की अर्थव्यवस्था के लचीलेपन पर भरोसा जताया है. उन्होंने कहा कि “भारत अगले साल वापसी करेगा.” 2026-27 में भले ही विकास दर थोड़ी कम रहे, लेकिन अगले वर्षों में इसमें सुधार की पूरी संभावना है.
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By अभिषेक पाण्डेय
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