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जानें कैसे 80सी के तहत पाएं 1.50 लाख तक की छूट

Updated at : 21 Jan 2019 6:18 AM (IST)
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जानें कैसे 80सी के तहत पाएं 1.50 लाख तक की छूट

बिनोद कुमार बंका, चार्टेट एकाउंटेंट अगर आपने अभी तक आयकर बचाने के लिए कोई पहल नहीं की है, तो आपको आयकर दाखिल करते समय पश्चाताप का सामना करना पड़ सकता है कि समय रहते आपने सही दिशा में निवेश करते हुए कर बचाने का काम क्यों नहीं किया. अब आपके पास मात्र ढाई माह का […]

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बिनोद कुमार

बंका, चार्टेट एकाउंटेंट

अगर आपने अभी तक आयकर बचाने के लिए कोई पहल नहीं की है, तो आपको आयकर दाखिल करते समय पश्चाताप का सामना करना पड़ सकता है कि समय रहते आपने सही दिशा में निवेश करते हुए कर बचाने का काम क्यों नहीं किया. अब आपके पास मात्र ढाई माह का समय बचा है. इसलिए आयकर विभाग द्वारा दी गयी कर बचत के उपायों का उपयोग करते हुए आयकर में छूट का लाभ उठाएं.

जरूरी खर्चों पर मिलती है छूट

आयकर विभाग की सबसे लोकप्रिय और चर्चित अधिनियम 80सी है. इसके तहत आपको अधिकतम Rs 1.50 लाख तक के निवेश पर कर में छूट मिलती है. घर के जरूरी खर्चों को इसमें शामिल किया गया है, जैसे बच्चों की ट्यूशन फीस, जीवन बीमा का प्रीमियम देना, ईपीएफ, होम लोन का भुगतान आदि.

सुकन्या समृद्धि योजना

बेटी के जन्म के बाद से 10 साल की आयु होने तक इस योजना में निवेश किया जा सकता है. इसमें किये गये निवेश पर 8.5 फीसदी का ब्याज भी मिलता है और इसमें मिलने वाले ब्याज पर भी कोई टैक्स नहीं लगता.

नेशनल पेंशन स्कीम

रिटायरमेंट के बाद अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए यह पेंशन योजना है जिसमें आप हर साल Rs 1.50 लाख तक का निवेश कर 80सी के तहत छूट प्राप्त कर सकते हैं. इसके अतिरिक्त Rs 50,000 का निवेश कर सेक्शन 80सीसीडी(1बी) के तहत भी टैक्स छूट का लाभ ले सकते हैं. यानी कुल मिला कर दो लाख तक की छूट प्राप्त की जा सकती है. इसके अलावा अगर आपका नियोक्ता (जिस कंपनी में आप नौकरी करते हैं) आपकी बेसिक सैलरी का 10 फीसदी एनपीएस में निवेश करता है, तो उस पर भी कर में छूट मिलता है.

पीपीएफ

पीपीएफ में लंबी अवधि के लिए निवेश किया जा सकता है जिस पर आपको कर में छूट प्राप्त होता है. इसमें किये गये निवेश के साथ-साथ मिलने वाले ब्याज पर भी छूट प्राप्त होता है.

नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट

इसमें निवेश कर Rs 1.50 लाख तक की छूट प्राप्त की जा सकती है. इस पर अर्जित ब्याज प्रत्येक वर्ष की आय में शामिल किया जाता है. चूंकि पहले चार साल का ब्याज मैच्यूरिटी पर दिया जाता है. इसलिए उसे संबंधित वर्ष में रिइन्वेस्टमेंट मानकर उसकी भी छूट मिलती है. इसमें पैसा पांच साल के लिए लॉक रहता है.

डाकघरों में पांच वर्षों के टर्म डिपॉजिट एवं बैंक के टैक्स सेवर एफडी पर छूट

डाकघरों में पांच साल के टर्म डिपॉजिट को भी कर में छूट मिलती है. बैंकों में भी टैक्स को बचाने के लिए किये गये फिक्स्ड डिपोजिट पर भी छूट का प्रावधान है.

यूलिप

यह एक ऐसी योजना है जिसमें दो तरह के फायदे होते हैं. इसमें निवेश पर जहां आपको 8.5 फीसदी का ब्याज मिलता है, वहीं इस निवेश पर आपको कर में छूट भी प्राप्त होता है.

होम लोन के मूलधन के भुगतान पर

आपके होम लोन की मासिक किस्त के शुरुआती सालों में ब्याज की हिस्सेदारी अधिक होती है और मूलधन की कम. होम लोन की मासिक किस्त के रूप में आप बैंक को जितनी रकम देते हैं, उस पर भी कर में छूट प्राप्त कर सकते हैं.

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