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बेचे जायेंगे 3000 करोड़ रुपये मूल्य के शत्रु कंपनी के शेयर, देश में 996 में से 588 कंपनियां अब भी सक्रिय

Updated at : 08 Nov 2018 10:47 PM (IST)
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बेचे जायेंगे 3000 करोड़ रुपये मूल्य के शत्रु कंपनी के शेयर, देश में 996 में से 588 कंपनियां अब भी सक्रिय

नयी दिल्ली : सरकार ने गुरुवार को शत्रु शेयरों की बिक्री के लिए तय प्रक्रिया और कार्यप्रणाली को मंजूरी दी. इसकी मौजूदा बाजार कीमत करीब 3,000 करोड़ रुपये है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे मंजूरी दी. शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 के अनुसार शत्रु संपत्ति से आशय वैसी संपत्ति है, जिसका […]

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नयी दिल्ली : सरकार ने गुरुवार को शत्रु शेयरों की बिक्री के लिए तय प्रक्रिया और कार्यप्रणाली को मंजूरी दी. इसकी मौजूदा बाजार कीमत करीब 3,000 करोड़ रुपये है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे मंजूरी दी. शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 के अनुसार शत्रु संपत्ति से आशय वैसी संपत्ति है, जिसका मालिकाना हक या प्रबंधन किसी शत्रु या शत्रु कंपनी के पास है.

इसे भी पढ़ें : 50 साल पुराना शत्रु संपत्ति कानून संशोधन विधेयक पारित

सरकार के इस फैसले के बाद दशकों तक बेकार पड़ी शत्रु अचल संपत्ति को बाजार में भुनाया जा सकेगा. इनकी बिक्री से मिले धन का इस्‍तेमाल विकास और समाज कल्‍याण कार्यक्रमों में किया जा सकता है. बयान के अनुसार, इस प्रकार की संपत्ति की बिक्री से प्राप्त राशि उसी रूप से रखी जायेगी, जैसा कि विनिवेश राशि के मामले में होता है इसकी देखरेख वित्त मंत्रालय करता है. इन शेयरों की बिक्री के लिए निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) को अधिकृत किया गया है.

बयान में कहा गया है कि 20,323 शेयरधारकों के 996 कंपनियों के कुल 6,50,75,877 शेयर सीईपीआई (कस्टोडियन ऑफ एनिमी प्रोपर्टी ऑफ इंडिया) के कब्जे में है. इन 996 कंपनियों में से 588 सक्रिय, 139 कंपनियां सूचीबद्ध हैं और शेष कंपनियां गैर-सूचीबद्ध हैं. इन शेयरों को बेचने की प्रक्रिया के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग तथा गृहमंत्री को शामिल करके वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली वैकल्पिक कार्यप्रणाली (एएम) से मंजूरी प्राप्त करनी होती है.

इस कार्यप्रणाली की सहायता अधिकारियों की उच्चस्तरीय समिति करेगी, जिसके सह-अध्यक्ष दीपम विभाग के सचिव और गृह मंत्रालय के सचिव (आर्थिक मामलों के विभाग, डीएलए, कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय और सीईपीआई के प्रतिनिधियों सहित) होंगे.

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