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नये निवेशक म्यूचुअल फंड के मिथ से रहें दूर, जानें एक्सपर्ट व्यू

Updated at : 29 Oct 2018 8:05 AM (IST)
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नये निवेशक म्यूचुअल फंड के मिथ से रहें दूर, जानें एक्सपर्ट व्यू

म्यूचुअल फंड निवेश से जुड़े कुछ ऐसे मिथ (धारणा) और फैक्ट (सच) हैं जिन्हें जानना एक नये निवेशक के लिए बहुत जरूरी है. जब वे इन धारणाओं से दूर रहेंगे तभी वे सही निर्णय ले सकेंगे और एक बेहतर निवेशक बन सकेंगे. प्रवीण मुरारका, निदेशक, पूनम सिक्युरिटीज पहला मिथ म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए […]

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म्यूचुअल फंड निवेश से जुड़े कुछ ऐसे मिथ (धारणा) और फैक्ट (सच) हैं जिन्हें जानना एक नये निवेशक के लिए बहुत जरूरी है. जब वे इन धारणाओं से दूर रहेंगे तभी वे सही निर्णय ले सकेंगे और एक बेहतर निवेशक बन सकेंगे.
प्रवीण मुरारका, निदेशक, पूनम सिक्युरिटीज
पहला मिथ
म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए डिमैट अकाउंट होना चाहिए.सच्चाई है कि म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए डिमैट अकाउंट होना जरूरी नहीं है. जब भी म्यूचुअल फंड में निवेश होता है तो हमें उसके एवज में यूनिट्स मिलती है. इन यूनिट्स की पूरी जानकारी आपको अकाउंट स्टेटमेंट के माध्यम से मिलती रहती है, जो कंपनी आपको भेजती रहती है. लेकिन जब आप एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (इटीएफ) में निवेश करते हैं तो उन यूनिट्स के लिए ही डिमैट खाते की जरूरत होती है.
म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए बहुत सारा पैसा होना जरूरी है.
इस मिथ की सच्चाई को बताने के लिए आजकल देश में ‘म्यूचुअल फंड सही है’ नाम से टीवी पर विज्ञापन भी लगातार आ रहा है.इसमें बताया जाता है कि आप Rs 500 से भी निवेश शुरू कर सकते हैं, एसआइपी के माध्यम से. और अगर आप एक बार में एकमुश्त राशि निवेश करना चाहते हैं, तो भी आप इएलएसएस में कम से कम Rs 500 जमा कर सकते हैं. वैसे दूसरे म्यूचुअल फंड स्कीम में एकमुश्त निवेश के लिए Rs 5000 जमा कर सकते हैं और जब चाहें उसमें और निवेश कर सकते हैं.
म्यूचुअल फंड में निवेश केवल लंबी अवधि के लिए होता है.
सच्चाई यह है कि निवेशक अपनी इच्छानुसार छोटी या लंबी अवधि के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए निवेश कर सकता है. इसके लिए कोई बाध्यता नहीं है. छोटी अवधि (शार्ट टर्म) का मतलब कुछ दिनों या कुछ महीने या कुछ साल हो सकता है.
आप जब चाहें अपना पैसा एक दिन में निकाल सकते हैं. जैसे लिक्विड म्यूचुअल फंड जिसमें 90 दिन या उससे कम समय के लिए निवेश किया जाता है. वहीं लंबी अवधि के लिए लांग टर्म इनकम फंड भी है जहां तीन साल से लेकर 10 साल तक के लिए निवेश कर सकते हैं. अत: निवेशक कम या लंबी अवधि के लिए निवेश करने के लिए पूर्णतया स्वतंत्र होता है.
म्यूचुअल फंड में निवेश केवल विशेषज्ञों के लिए ही है.
ऐसा बिलकुल नहीं है. सच्चाई यह है कि म्यूचुअल फंड ऐसे निवेशकों के लिए ही बनाया गया है जिनको निवेश की बहुत ज्यादा जानकारी और अनुभव नहीं है, और जो निवेश कर बेहतर लाभ कमाना चाहते हैं. म्यूचुअल फंड निवेश स्टॉक मार्केट के विशेषज्ञों द्वारा मैनेज किया जाता है. अत: एक आम आदमी जिसको स्टॉक मार्केट के बारे में कुछ भी पता नहीं होता, वह भी इक्विटी में निवेश का लाभ म्यूचुअल फंड के माध्यम से ले सकता है. शीर्ष म्यूचुअल फंड में निवेश से बेहतर लाभ की पूरी गारंटी है.
नये निवेशकों में यह धारणा आम है. पर सच्चाई यह है कि किसी भी म्यूचुअल फंड की रेटिंग पूरी तरह डायनमिक होती है. जिस फंड का जैसा परफॉरमेंस होता है वैसे ही उसकी रेटिंग होता है.
इसलिए अगर किसी फंड की रेटिंग बहुत अच्छी है, तो जरूरी नहीं कि वह भविष्य में भी वह उसी रेटिंग पर बना रहेगा. शीर्ष रेटिंग वाले फंड से उम्मीद रहती है कि वे आगे भी अच्छा करेंगे. लेकिन ध्यान देने की बात है कि शीर्ष फंड हमेशा अच्छा ही करेगा, इसकी कोई गारंटी नहीं दी जा सकती है.
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