हार्इवे के किनारे शराब बिक्री पर दिये अपने ही फैसले को निष्प्रभावी कर रहा है सुप्रीम कोर्ट, जानिये क्यों...?

By Prabhat Khabar Digital Desk
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नयी दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च, 2017 को देश के तमाम नेशनल आैर स्टेट हार्इवे के किनारे 500 मीटर के दायरे में खुली शराब की दुकानों आैर बीयर बारों को बंद करने के फैसले को अब निष्प्रभावी कर रहा है. इसके पीछे सबसे बड़ा कारण देश में शराब की बिक्री से होने वाली करीब 1.45 लाख करोड़ रुपये की राजस्व वसूली माना जा रहा है. देश के नेशनल आैर स्टेट हार्इवे के किनारे 500 मीटर के दायरे में खुली शराब की दुकानों को बंद किये जाने को लेकर एक गैर-सरकारी संगठन की आेर से दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है कि अगर राज्य सरकारें शहर के अंदर से गुजरने वाली नेशनल आैर स्टेट हार्इवे को डिनोटिफार्इ कर रही हैं, तो यह गलत नहीं है.

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि अगर कोर्इ राजमार्ग शहर के बीच से होकर गुजर रहा है, तो उसे डिनोटिफार्इ करके 500 मीटर के इलाके में शराब की दुकानें खोली जा सकती हैं. कोर्ट ने यह भी कहा है कि अगर कोर्इ राजमार्ग शहर के अंदर से होकर गुजरता है आैर उसे डिनोटिफार्इ किया जाता है, तो इसमें कुछ गलत नहीं है. इस संबंध में कोर्ट ने कहा है कि शहर के अंदर के राजमार्ग और बिना शहर के राजमार्ग में बहुत अंतर है. राजमार्ग का मतलब जहां तेज रफ्तार में गाडि़यां चलती हों. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजमार्ग के 500 मीटर दायरे में शराब की बिक्री पर रोक के पीछे सोच यह है कि लोग शराब पीकर तेज रफ्तार में गाड़ी न चलायें, लेकिन शहर में इस तरह की रफ्तार देखने को नहीं मिलती.

दरअसल, मंगलवार को भारत के मुख्य न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर ने चंडीगढ़ में हाईवे को डिनोटिफाई करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की. इस मामले में याचिकाकर्ता का कहना है कि राष्‍ट्रीय राजमार्गों और राज्यों के राजमार्ग से 500 मीटर तक शराब की दुकानों पर रोक के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निष्प्रभावी करने के लिए ये कदम उठाया गया है. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि राजमार्ग को डिनोटिफाई सिर्फ इसलिए किया जा रहा है, ताकि शराब की दुकाने बंद न हों और राज्यों को पैसा मिल सके.

सुप्रीम कोर्ट की आेर से 31 मार्च, 2017 के फैसले को निष्प्रभावी करने के पीछे यह माना जा रहा है कि देश में शराब की बिक्री से राज्य सरकारों को राजस्व की वसूली होती है, जिससे राज्य में अन्य मद से होने वाले परियोजनाआें के काम को पूरा किया जाता है. एसोचैम की आेर से मार्च, 2016 में पेश की गयी एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर साल करीब 1.45 करोड़ रुपये तक शराब का कारोबार होता है. एक अन्य रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि देश में शराब के कारोबार से यहां की ज्यादातर राज्य सरकारों को उनकी आमदनी का करीब 16 फीसदी राशि आबकारी टैक्स से प्राप्त होता है. आबकारी टैक्स से मिलने वाली भारी-भरकम रकम काे राज्य सरकारें योजना आैर गैर-योजना मद में खर्च करती हैं.

इसके साथ ही, अगर पिछले साल के जून में विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट पर गौर करें, तो पता चलता है कि भारत में हर साल करीब 28.60 अरब लीटर शराब की बिक्री होती है. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपनी रिपोर्ट में इस बात का जिक्र किया है कि भारत में वर्ष 2005 तक करीब 16 लीटर प्रतिव्यक्ति शराब की खपत थी, जो 2012 में बढ़कर 22 लीटर तक पहुंच गयी थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2005 से लेकर 2015 तक के सात साल के दौरान भारत में शराब की खपत में करीब 38 फीसदी का इजाफा हुआ है.

इसके साथ ही, विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में यहां की कुल आबादी के करीब 13 फीसदी लोग शराब का सेवन करते हैं, लेकिन इसी रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि शराब पीकर सड़कों पर तेज गति से गाड़ी चलाने की वजह से हर रोज करीब 15 लोगों की सड़क हादसों में मौत हो जाती है. सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च के फैसले में इस बात का जिक्र किया था कि चूंकि देश के होने वाले सड़क हादसों में हर रोज करीब 15 लोगों की मौत शराब पीकर गाड़ी चलाने की वजह से हो रही है.

अक्सर देखा यह जाता है कि शराब का सेवन करने के बाद लोग नेशनल हार्इवे आैर अन्य सड़कों पर तेज गति से गाड़ी चलाते हैं. इसी के मद्देनजर सुप्रीम कोर्ट ने 31 मार्च के अपने फैसले में नेशनल आैर स्टेट हार्इवे के किनारे 500 मीटर के दायरे में खुली शराब की दुकानों आैर बीयर बारों को बंद करने का फैसला किया था, लेकिन इस बीच देखा यह भी जा रहा है कि नेशलन आैर स्टेट हार्इवे के किनारे शराब की दुकानों को बंद करने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शहरों से होकर गुजरने वाले नेशनल आैर स्टेट हार्इवे के किनारे की दुकानों को भी बंद कर दिया गया.

इन दुकानों के बंद होने के बाद राज्य सरकारों को आबकारी टैक्स में कमी होने की वजह से राजस्व का नुकसान उठाने के बाद उन्होंने शहर के अंदर से गुजरने वाले नेशनल आैर स्टेट हार्इवे को डिनोटिफार्इ करना शुरू कर दिया था, ताकि उसके 500 मीटर के दायरे में शराब की दुकानों को खोला जा सके या फिर पहले से जो दुकानें संचालित की जा रही थीं, उसे जारी रखा जा सके. अब जबकि कर्इ राज्यों ने इन सड़कों को डिनोटिफार्इ करना शुरू कर दिया, तो उसके खिलाफ दायर याचिका की सुनवार्इ के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही फैसले को निष्प्रभावी करने की प्रक्रिया शुरू कर दिया है.

बताया जा रहा आैर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवार्इ के दौरान यह बात कहा भी है कि शहरों के अंदर से गुजरने वाले नेशनल आैर स्टेट हार्इवे को इसलिए डिनोटिफार्इ करके नाम बदला जा रहा है, ताकि राज्य सरकारों को राजस्व का नुकसान न हो आैर न ही सड़कों के किनारे खुली शराब की दुकानों को बंद करना पड़े.

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