बैंक लॉकर या डिजीलॉकर, आपके कीमती कागजात के लिए कौन सा ऑप्शन है सबसे सेफ?

Digital Locker vs Bank Locker
Digital Locker vs Bank Locker: जरूरी डॉक्यूमेंट्स के लिए बैंक लॉकर बेस्ट है या डिजीलॉकर? जानें अपनी कीमती प्रॉपर्टी पेपर और डिजिटल आईडी को सुरक्षित रखने का सही तरीका क्या है.
Digital Locker vs Bank Locker: अब वो दौर गया जब लोग सिर्फ लोहे की भारी अलमारी और पीतल की चाबी को ही लॉकर समझते थे. आज हमारे सबसे जरूरी डाक्यूमेंट्स जैसे आधार, पैन कार्ड और इंश्योरेंस पॉलिसी वाले कागज से ज्यादा हमारे फोन में पीडीएफ (PDF) बनकर रहते हैं. ऐसे में सुरक्षा का मतलब भी बदल गया है. अब सवाल सिर्फ चोरी का नहीं, बल्कि सही समय पर सही कागज मिलने का है. ऐसे में आपके जरुरी डाक्यूमेंट्स अब कहां रखना ज्यादा सेफ है डिजिटल लॉकर में या फिर बैंक लॉकर में? आइये जानतें हैं.
क्या डिजिटल लॉकर कागजों को खोने से बचाएगा?
डिजिटल लॉकर जैसे DigiLocker का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यहां आपके डाक्यूमेंट्स का खोने का डर नहीं होता. आग, पानी या घर बदलते समय अक्सर कागज गुम हो जाते हैं, लेकिन डिजिटल लॉकर में ये हमेशा सुरक्षित रहते हैं. सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें मौजूद सरकारी डॉक्यूमेंट्स को असली कागज के बराबर ही कानूनी मान्यता मिलती है. यानी अब आपको केवाईसी (KYC) या वीजा के लिए हर जगह फोटोकॉपी लेकर घूमने की जरूरत नहीं है.
क्या बैंक लॉकर आज भी जरूरी है?
बिल्कुल, डिजिटल दौर के बावजूद बैंक लॉकर की अहमियत कम नहीं हुई है. घर की रजिस्ट्री (Property Deeds), वसीयत या नोटरी किए हुए समझौते आज भी कागज पर ही मांगे जाते हैं. इन चीजों के लिए एक स्कैन कॉपी काफी नहीं है. बैंक लॉकर का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे कोई हैक नहीं कर सकता. यहां खतरा इंटरनेट का नहीं, बल्कि चाबी संभालकर रखने और बैंक के चक्कर काटने जैसी मेहनत का होता है.
सबसे बड़ा खतरा क्या है?
डिजिटल लॉकर में सबसे बड़ी दिक्कत तब आती है जब आप अपना पासवर्ड भूल जाएं या अपना पुराना मोबाइल नंबर बदल लें. अगर आपने जानकारी अपडेट नहीं की, तो एक्सेस पाना सिरदर्द बन सकता है. वहीं, बैंक लॉकर के साथ दिक्कत यह है कि अगर सालों तक इसे इस्तेमाल न किया जाए, तो कई बार परिवारों को सालों बाद पता चलता है कि बुजुर्गों का कोई लॉकर भी था, जिसकी जानकारी न होने के कारण उसे खोलना कानूनी उलझन बन जाता है.
सही तरीका क्या है?
समझदारी इसी में है कि आप दोनों का इस्तेमाल करें. जो ओरिजिनल कागज दोबारा नहीं बन सकते, उन्हें बैंक की तिजोरी में रखें. लेकिन जो चीजें रोजाना काम आती हैं, उन्हें डिजीलॉकर में सेव करें. एक छोटी सी लिस्ट बनाकर किसी भरोसेमंद सदस्य को जरूर बताएं कि कौन सा कागज कहां रखा है.
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लेखक के बारे में
By Soumya Shahdeo
सौम्या शाहदेव ने बैचलर ऑफ़ आर्ट्स इन इंग्लिश लिटरेचर में ग्रेजुएशन किया है और वह इस समय प्रभात खबर डिजिटल के बिजनेस सेक्शन में कॉन्टेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह ज़्यादातर पर्सनल फाइनेंस से जुड़ी खबरें लिखती हैं, जैसे बचत, निवेश, बैंकिंग, लोन और आम लोगों से जुड़े पैसे के फैसलों के बारे में. इसके अलावा, वह बुक रिव्यू भी करती हैं और नई किताबों व लेखकों को पढ़ना-समझना पसंद करती हैं. खाली समय में उन्हें नोवेल्स पढ़ना और ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो लोगों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती हैं.
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