बजट 2023: 2047 तक एनीमिया को देश से समाप्त किया जायेगा, निर्मला सीतारमण ने की घोषणा

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बजट 2023: 2047 तक एनीमिया को देश से समाप्त किया जायेगा, निर्मला सीतारमण ने की घोषणा

आम आदमी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें, इसके लिए सरकार देश में रिसर्च को बढ़ावा देगी. रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए सरकार देश में आईसीएमआर के लैब की संख्या बढ़ायेगी.

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Union Budget 2023 : देश की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने देश का बजट पेश करते हुए कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार गंभीर होकर काम कर रही है. एनीमिया हमारे सरकार के समक्ष एक चुनौती की तरह है, इसलिए सरकार ने एनीमिया को देश से समाप्त करने के लिए 2047 तक का लक्ष्य निर्धारित किया है.

देश  की 47 प्रतिशत महिलाएं  एनीमिया की गिरफ्त में

एनीमिया एक ऐसी बीमारी है, जिसकी गिरफ्त में भारतीय महिलााएं और बच्चे हैं. देश की लगभग 47 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया ग्रस्त हैं. इस बीमारी में खून की कमी हो जाती है. देश में बच्चे भी इस बीमारी की गिरफ्त में हैं, इसलिए सरकार ने इस बीमारी के उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया है. सरकार ने यह तय किया है कि चिकित्सा क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा दिया जायेगा.

आईसीएमआर के लैब की संख्या बढ़ाई जायेगी

आम आदमी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें, इसके लिए सरकार देश में रिसर्च को बढ़ावा देगी. रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए सरकार देश में आईसीएमआर के लैब की संख्या बढ़ायेगी. साथ ही 157 नये नर्सिंग काॅलेज खोलेगी.

बजट सकारात्मक

स्वास्थ्य क्षेत्र की निजी कंपनियों के प्रमुखों का कहना है कि बजट सकारात्मक है. उनका कहना है कि यह बजट सकारात्मक होने के साथ ही दूरदर्शी भी है. अपोलो समूह-अस्पताल के अध्यक्ष डॉ के हरि प्रसाद ने एक बयान में कहा कि भारत विश्व में सबसे अधिक आबादी वाला देश बनेगा और स्वास्थ्य क्षेत्र देश की प्रगति का निर्धारण करने वाला अहम सामाजिक-आर्थिक पहलू होगा.

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रजनीश आनंद

लेखक के बारे में

By रजनीश आनंद

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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