बजट 2023: 2047 तक एनीमिया को देश से समाप्त किया जायेगा, निर्मला सीतारमण ने की घोषणा
Published by : Rajneesh Anand Updated At : 01 Feb 2023 1:29 PM
आम आदमी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें, इसके लिए सरकार देश में रिसर्च को बढ़ावा देगी. रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए सरकार देश में आईसीएमआर के लैब की संख्या बढ़ायेगी.
Union Budget 2023 : देश की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने देश का बजट पेश करते हुए कहा कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में सरकार गंभीर होकर काम कर रही है. एनीमिया हमारे सरकार के समक्ष एक चुनौती की तरह है, इसलिए सरकार ने एनीमिया को देश से समाप्त करने के लिए 2047 तक का लक्ष्य निर्धारित किया है.
एनीमिया एक ऐसी बीमारी है, जिसकी गिरफ्त में भारतीय महिलााएं और बच्चे हैं. देश की लगभग 47 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया ग्रस्त हैं. इस बीमारी में खून की कमी हो जाती है. देश में बच्चे भी इस बीमारी की गिरफ्त में हैं, इसलिए सरकार ने इस बीमारी के उन्मूलन का लक्ष्य निर्धारित किया है. सरकार ने यह तय किया है कि चिकित्सा क्षेत्र में निजी निवेश को बढ़ावा दिया जायेगा.
आम आदमी को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलें, इसके लिए सरकार देश में रिसर्च को बढ़ावा देगी. रिसर्च को बढ़ावा देने के लिए सरकार देश में आईसीएमआर के लैब की संख्या बढ़ायेगी. साथ ही 157 नये नर्सिंग काॅलेज खोलेगी.
स्वास्थ्य क्षेत्र की निजी कंपनियों के प्रमुखों का कहना है कि बजट सकारात्मक है. उनका कहना है कि यह बजट सकारात्मक होने के साथ ही दूरदर्शी भी है. अपोलो समूह-अस्पताल के अध्यक्ष डॉ के हरि प्रसाद ने एक बयान में कहा कि भारत विश्व में सबसे अधिक आबादी वाला देश बनेगा और स्वास्थ्य क्षेत्र देश की प्रगति का निर्धारण करने वाला अहम सामाजिक-आर्थिक पहलू होगा.
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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