बजट में बड़ी जीत का ''रिटर्न गिफ्ट'' देंगे PM मोदी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर जोर रहने की संभावना

By Prabhat Khabar Digital Desk
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नयी दिल्लीः केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज संसद में बजट पेश करेंगी. लोकसभा चुनाव में प्रचंड जीत के बाद बनी नरेंद्र मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का ये पहला बजट है. इस बजट के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्यू इंडिया के सपने को पूरा करने के लिए ठोस कदम बढ़ाने की चुनौती है.
माना जाता है कि जब तक देश के ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों की स्थिति को बेहतर नहीं किया जाता, तब तक आर्थिक विकास की गाड़ी को पटरी पर लाना बेहद कठिन होगा. इसलिए बजट 2019 में ग्रामीण अर्थव्यवस्था का बोलबाला रहने की पूरी उम्मीद हैं. देखा जाए, तो कृषि सेक्टर से देश की 17 फीसदी जीडीपी आती है, जबकि भारत की आधी से ज्यादा आबादी जीविकोपार्जन के लिए इसी पर निर्भर करती है.
ऐसे में मांग और आपूर्ति के गणित में ग्रामीण भारत का खास महत्व है. अर्थशास्त्रियों का कहना कि सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद कृषि सेक्टर में सकल वैल्यू (एग्री-GVA) घट रहा है और कृषि-GVA की तुलना में निवेश का मात्रा भी कम हो रही है. ऐसे में कुछ संस्थागत बदलावों की जरूरत है, जिससे 2022 तक निर्यात को बढ़ाकर किसानों की आय को दोगुना किया जा सके. वित्त वर्ष 2018-19 में ग्रामीण और शहरी विकास दर के बीच का फासला घटकर 10 फीसदी रह गया, जिसकी दीर्घावधि औसत 30 फीसदी रहा है.
ग्रामीण दबाव से निपटना और कंजम्प्शन को बढ़ावा देना वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की प्राथमिकताओं में शामिल होगा. खेतों की घट रही पैदावार, मानसून की सुस्त रफ्तार और मांग में नरमी जैसी कई वजहों के चलते ग्रामीण अर्थव्यवस्था कमजोरी पड़ रही है. मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी कृषि क्षेत्र पर विशेष जोर दिया था. फसल बीमा, उत्पादन उत्सर्जन, न्यूनतम समर्थन मूल्य में वृद्धि और खरीदा-फरोख्त में सहूलियत से जुड़ी कई योजनाएं शुरू की गयी थीं.
उम्मीद है कि आज के बजट में कृषि सेक्टर के लिए ढेरों स्कीमें होंगी. एसबीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय संस्थानों और सरकार को किसानों की मदद बुआई से लेकर बिक्री तक करने की जरूरत है. इस रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय से कृषि सेक्टर में पूंजी निर्माण एक ही स्तर पर बना हुआ है. इस रुझान में बदलाव से ही साल 2022 तक किसानों की आय दोगुनी की जा सकती है. मौजूदा समय में सरकार की कई योजनाएं सक्रिय हैं. कुछ नई पहल की पेशकश भी संभव नजर आती है.
मौजूदा समय में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में तीन प्रकार की फसल (अनाज, बजरा और दालें), तिलहन, वार्षिक वाणिज्यिक या बागवानी शामिल हैं. इनसे फसल कर्ज की सिर्फ 30 फीसदी हिस्सेदारी आती है. एसबीआई इकनॉमिक रिसर्च ने कहा है कि सरकार को इस योजना के तहत सभी फसलों को लाना चाहिए, जिससे बैंक जोखिम को बेहतर संभाल पाएं. साथ ही अगले पांच सालों में आय समर्थन स्कीम को भी 6,000 रुपये से बढ़ाकर 8,000 रुपये किया जाना जाहिए.
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