पांच करोड़ से अधिक किसानों को मिला पीएम किसान योजना का लाभ, सोशल सर्विस पर बढ़ा खर्च

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 04 Jul 2019 6:49 PM

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नयी दिल्ली : संसद में गुरुवार को पेश आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जनसंख्या के बड़े हिस्से को लाभ मिला है. पीएम किसान योजना के तहत 5 करोड़ से अधिक किसानों को लाभ मिला है. सामाजिक सेवाओं पर परिव्यय में जीडीपी का एक फीसदी […]

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नयी दिल्ली : संसद में गुरुवार को पेश आर्थिक समीक्षा में कहा गया है कि पिछले पांच वर्षों के दौरान सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से जनसंख्या के बड़े हिस्से को लाभ मिला है. पीएम किसान योजना के तहत 5 करोड़ से अधिक किसानों को लाभ मिला है. सामाजिक सेवाओं पर परिव्यय में जीडीपी का एक फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई. समीक्षा में कहा गया है कि बैंकिंग सुविधा प्राप्त महिलाओं की संख्या 2005-06 में 15.5 फीसदी थी, जो 2015-16 में बढ़कर 53 फीसदी हो गयी.

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आर्थिक समीक्षा 2018-19 में सामाजिक अवसंरचना विशेषकर शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश के महत्व को रेखांकित किया गया है. समावेशी विकास के लक्ष्य को हासिल करने के लिए इसे विकास रणनीति की प्राथमिकता माना गया है. आर्थिक समीक्षा के अनुसार, गरीबी तथा अन्य समस्याओं को समाप्त करने के लिए ऐसी नीतियां होनी चाहिए, जो स्वास्थ्य और शिक्षा को बेहतर बनाती है, असमानता को कम करती है और दीर्घकालिक उपायों के तहत आर्थिक विकास को गति देती.

केन्‍द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण ने गुरुवार को संसद में आर्थिक समीक्षा 2018-19 पेश की. इसमें कहा गया है कि केंद्र और राज्यों द्वारा सामाजिक सेवाओं पर परिव्यय 2014-15 के 7.68 लाख करोड़ से बढ़कर 2018-19 (बजट अनुमान) में 13.94 लाख करोड़ हो गया. केंद्र और राज्यों द्वारा सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के अनुपात के रूप में सामाजिक सेवाओं पर खर्च में 1 फीसदी से अधिक अंकों की वृद्धि दर्ज की गयी. नतीजतन, सामाजिक सेवाओं पर खर्च वर्ष 2014-15 में 6.2 से बढ़कर वर्ष 2018-19 (बजट अनुमान) में 7.3 फीसदी तक हो गया है. जीडीपी के प्रतिशत के रूप में शिक्षा पर किए जाने वाला खर्च 2014-15 में 2.8 फीसदी था, जो 2018-19 (बजट अनुमान) में बढ़कर 3 फीसदी हो गया.

इसी प्रकार, जीडीपी के प्रतिशत के रूप में स्वास्थ्य पर सार्वजनिक परिव्यय 1.2 से बढ़कर 1.5 फीसदी हो गया. महिला सशक्तीकरण के बारे में समीक्षा में कहा गया है कि महिलाओँ को मुख्य धारा में लाने और समाज में बदलाव के लिए सक्रिय भूमिका निभाने के लिए सरकार ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, उज्ज्वला योजना, पोषण अभियान, प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना जैसे कार्यक्रमों की शुरुआत की है. समय के साथ परिवार के निर्णय में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है.

इसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं के वित्तीय समावेश में भी वृद्धि दर्ज की गयी है. बैंकिंग सेवाएं या बचत खाते जो महिलाएं स्वयं उपयोग करती हैं. वर्ष 2005-06 में महिलाओं का अनुपात 15.5 फीसदी था, जो 2015-16 में बढ़कर 53 फीसदी हो गया है. सभी मंत्रालयों में लिंगानुपात को ध्यान में रखते हुए बजट, योजना और कार्यक्रम बनाये जा रहे हैं.

आर्थिक समीक्षा में पिछले पांच वर्षों के दौरान सरकार द्वारा प्रारंभ किये गये विभिन्न सामाजिक योजनाओं को रेखांकित किया गया है. यह देश के लोगों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाता है. पीएम किसान-2019 के तहत 3.10 करोड़ सीमांत किसानों को 2,000 रुपये की पहली किस्त प्राप्त हुई तथा 23 अप्रैल, 2019 तक 2.10 करोड़ किसानों को दूसरी किस्त प्राप्त हुई है.

समीक्षा के अनुसार, 30 दिसंबर, 2018 तक आयुष्मान भारत के अंतर्गत 6.18 लाख लोग पीएमजेएवाई योजना से लाभांवित हुए हैं. इस दौरान 39.48 लाख ई-कार्ड जारी किये गये हैं. वहीं, 25 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 5.33 लाख गांवों को स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया गया है. 2 अक्टूबर, 2019 तक पूरा देश ओडीएफ हो जायेगा.

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