कोरोनावायरस लॉकडाउन में भी बिहार में बैंकों ने लोन देने में की कंजूसी, समीक्षा बैठक में वित्त मंत्री ने रिपोर्ट देख लगाई 'क्लास'

कोरोनावायरस संकट और लॉकडाउन में भी बिहार में बैंकों ने लोन देने में कंजूसी बरती. चालू वित्तीय वर्ष की सितंबर तिमाही तक बैंकों के एसीपी (ऐनुअल क्रेडिट प्लान) की उपलब्धि महज 33.39 प्रतिशत रही. इसे लेकर डिप्टी सीएम सह वित्त मंत्री तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि बैंकों को सोच बदलने की जरूरत है. वे सिर्फ राशि जमा करने के लिए नहीं हैं,बल्कि लोगों को ऋण देने और योजनाओं के बेहतर कार्यान्वयन की जरूरत है.
कोरोनावायरस लॉकडाउन में भी बिहार में बैंकों ने लोन देने में कंजूसी बरती. चालू वित्तीय वर्ष की सितंबर तिमाही तक बैंकों के एसीपी (ऐनुअल क्रेडिट प्लान) की उपलब्धि महज 33.39 प्रतिशत रही. इसे लेकर डिप्टी सीएम सह वित्त मंत्री तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि बैंकों को सोच बदलने की जरूरत है. वे सिर्फ राशि जमा करने के लिए नहीं हैं,बल्कि लोगों को ऋण देने और योजनाओं के बेहतर कार्यान्वयन की जरूरत है.
कहा कि बैंकों से दिये जाने वाले लोन की समुचित मॉनीटरिंग के लिए वित्त विभाग जल्द ही एक समन्वय समिति का गठन करेगी. जिन्हें लोन दिया जायेगा, उनकी सतत मॉनीटरिंग शुरू से ही की जायेगी, ताकि ये एनपीए नहीं हैं. वित्त मंत्री सोमवार को 74वीं राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी (एसएलबीसी) की बैठक को संबोधित कर रहे थे. नयी सरकार के गठन होने के बाद यह एसएलबीसी की पहली बैठक है, जिसे तारकिशोर प्रसाद बतौर वित्त मंत्री पहली बार संबोधित कर रहे थे.
चालू वित्तीय वर्ष की सितंबर तिमाही तक बैंकों के एसीपी की उपलब्धि महज 33.39 प्रतिशत रही. सभी बैंकों को इस बार एक लाख 54 हजार 500 करोड़ का लोन बांटने का लक्ष्य दिया गया था, जिसमें सिर्फ 51 हजार 585 करोड़ के ही लोन बांटे गये हैं. जून तिमाही तक यह उपलब्धि 23 हजार 545 करोड़ (15.24 प्रतिशत) तथा बीते वित्तीय वर्ष 2019-20 में एसीपी की उपलब्धि 72.69 प्रतिशत रही है.
डिप्टी सीएम ने बैंकों को इस पर सख्त लहजे में सुधार करने का निर्देश देते हुए कहा कि चालू वित्तीय वर्ष में इस लक्ष्य को पूरा करने की हर संभव कोशिश करें. स्ट्रीट वेंडरों को लोन देने के लिए चलायी जा रही स्वनिधि योजना की स्थिति में जल्द सुधार लाने की बात कही. ज्यादा -से- ज्यादा संख्या में स्ट्रीट वेंडरों को लोन देने की बात कही.
वित्त मंत्री ने सीडी रेशियो में खराब प्रदर्शन करने वाले 18 बैंकों को सख्त निर्देश दिये कि अगली बैठक से पहले अपनी स्थिति सुधार लें. जिन 30 जिलों में बैंकों का प्रदर्शन इस बार औसत या इससे नीचे रहा, उन्हें भी स्थिति सुधारने की हिदायत दी गयी. उन्होंने कहा कि कृषि, उद्योग और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं पर खासतौर से फोकस करें. बैंकों से कहा कि अगली बैठक में उलाहना नहीं परिणाम बैठक होनी चाहिए.
वित्त विभाग के प्रधान सचिव डॉ एस सिद्धार्थ ने बैंकों को एसीपी (ऐनुअल क्रेडिट प्लान) का टारगेट हर हाल में पूरा करने की सख्त हिदायत दी. उन्होंने कहा कि बैंक योजनाओं में लोन देने में किसी तरह की कोताही नहीं बरतें. राज्य का सीडी रेशियो बढ़ाने पर खास फोकस करें. खराब प्रदर्शन करने वाले 18 बैंकों को अपनी स्थिति जल्द सुधारने की सख्त चेतावनी दी, अन्यथा उन पर कार्रवाई की जायेगी.
वर्तमान में राज्य में एनपीए 14 प्रतिशत के आसपास है. उन्होंने प्रत्येक पंचायत स्तर बैंकिंग सुविधा बहाल करने के लिए अनिवार्य रूप से सीएसपी (कस्टमर सर्विस प्वाइंट) खोलने का निर्देश दिया. साथ ही सभी बैंकों को ग्रामीण क्षेत्र में एटीएम और ब्रांच की संख्या बढ़ाने को कहा. उन्होंने आदेश दिया कि अगली बैठक में इसमें बढ़ोतरी दिखनी चाहिए.
Posted By: Utpal kant
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By Prabhat Khabar News Desk
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