रामगढ़ में लोको पायलटों का 'हल्ला बोल'! कॉशन पेपर के लिए YM ऑफिस जाने से इनकार

Updated at : 05 Apr 2026 4:11 PM (IST)
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Loco Pilot Protest Ramgarh

रामगढ़ में लोको पायलटों का प्रदर्शन, Symbolic Pic Credit- AI

Loco Pilot Protest Ramgarh: धनबाद रेल मंडल के पतरातू में लोको पायलटों ने कॉशन पेपर की व्यवस्था को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है. कर्मचारियों ने वाईएम कार्यालय जाकर पेपर लेने पर आपत्ति जताते हुए इसे क्रू लॉबी में उपलब्ध कराने की मांग की है. पढ़ें, कैसे इस प्रशासनिक पेंच से ट्रेनों के परिचालन पर असर पड़ रहा है.

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Loco Pilot Protest Ramgarh, रामगढ़, (अजय कुमार की रिपोर्ट): धनबाद रेल मंडल के सीआईसी सेक्शन अंतर्गत रामगढ़ के पतरातू में, लोको पायलट और सहायक लोको पायलटों ने कॉशन पेपर की अव्यवहारिक व्यवस्था के विरोध में रविवार को जोरदार आंदोलन शुरू कर दिया है. लोको रनिंग कर्मियों का तर्क है कि ऑन-ड्यूटी तैनात कर्मचारियों को सुरक्षा से संबंधित ‘कॉशन पेपर’ या तो क्रू लॉबी में ही दिया जाना चाहिए या सीधे इंजन में उपलब्ध कराना चाहिए. वर्तमान में प्रचलित प्रक्रिया के कारण रेल परिचालन में अनावश्यक बाधा उत्पन्न हो रही है, जिससे कर्मियों में भारी असंतोष व्याप्त है.

वाईएम कार्यालय के चक्कर काटने पर जताई कड़ी आपत्ति

आंदोलनकारी कर्मचारियों ने बताया कि वर्तमान व्यवस्था के तहत उन्हें सबसे पहले क्रू लॉबी में अपनी उपस्थिति दर्ज (रिपोर्ट) करानी पड़ती है, जिसके बाद उन्हें ‘कॉशन पेपर’ लेने के लिए वाईएम (Yard Master) कार्यालय जाना पड़ता है. इस दोहरी प्रक्रिया में काफी समय बर्बाद हो जाता है, जिससे निर्धारित समय सीमा के भीतर इंजन तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण हो जाता है. कर्मियों का आरोप है कि यदि इस प्रशासनिक देरी के कारण ट्रेन लेट होती है, तो रेल प्रशासन सारा दोष लोको पायलट के मत्थे मढ़ देता है. इसी दमनकारी नीति के विरोध में अब रनिंग कर्मियों ने वाईएम कार्यालय जाकर कॉशन पेपर लेने से साफ इनकार कर दिया है.

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सुरक्षित परिचालन के लिए ‘कॉशन पेपर’ का महत्व

रेलवे की शब्दावली में ‘कॉशन पेपर’ एक अत्यंत संवेदनशील और अनिवार्य दस्तावेज होता है, जो ट्रेन के सुरक्षित संचालन के लिए लोको पायलट को सौंपा जाता है. इसमें ट्रैक की वर्तमान स्थिति, विभिन्न खंडों (Sections) में गति सीमा (Speed Limit) और सिग्नल से संबंधित महत्वपूर्ण चेतावनियां दर्ज होती हैं. लोको पायलट इसी अधिकार पत्र के आधार पर ट्रेन की रफ्तार और सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं. कर्मियों का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण दस्तावेज की प्राप्ति प्रक्रिया को जटिल बनाने से न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि चालक के मानसिक एकाग्रता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.

रेलवे प्रशासन को दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

पतरातू के लोको पायलटों ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि यदि उनकी मांगों पर अविलंब संज्ञान नहीं लिया गया और व्यवस्था को सरल नहीं बनाया गया, तो वे अपने आंदोलन को और अधिक तेज करेंगे. उन्होंने रेलवे के उच्चाधिकारियों से अपील की है कि डिजिटल युग में भी ऐसी पुरानी और थकाऊ प्रक्रियाओं को ढोना अनुचित है. फिलहाल, इस आंदोलन के कारण पतरातू क्षेत्र में रेल परिचालन की सुगमता पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जिस पर रेल प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार है.

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Sameer Oraon

लेखक के बारे में

By Sameer Oraon

इंटरनेशनल स्कूल ऑफ बिजनेस एंड मीडिया से बीबीए मीडिया में ग्रेजुएट होने के बाद साल 2019 में भारतीय जनसंचार संस्थान दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. 5 साल से अधिक समय से प्रभात खबर में डिजिटल पत्रकार के रूप में कार्यरत हूं. इससे पहले डेली हंट में बतौर प्रूफ रीडर एसोसिएट के रूप में काम किया. झारखंड के सभी समसामयिक मुद्दे खासकर राजनीति, लाइफ स्टाइल, हेल्थ से जुड़े विषयों पर लिखने और पढ़ने में गहरी रुचि है. तीन साल से अधिक समय से झारखंड डेस्क पर काम कर रहा हूं. फिर लंबे समय तक लाइफ स्टाइल के क्षेत्र में भी काम किया हूं. इसके अलावा स्पोर्ट्स में भी गहरी रुचि है.

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