Bihar Election 2025: चाचा-भतीजे की लड़ाई में फंसा रामविलास का वोट बैंक, 5 सीटों पर आमने-सामने पशुपति और चिराग

Published by : Abhinandan Pandey Updated At : 18 Oct 2025 10:02 AM

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पशुपति पारस और चिराग पासवान की तस्वीर

Bihar Election 2025: बिहार चुनाव 2025 में सबसे रोचक मुकाबला चाचा-भतीजे के बीच देखने को मिलेगा. रामविलास पासवान की विरासत पर दावा ठोकते हुए चिराग पासवान और पशुपति पारस आमने-सामने हैं. दोनों ने पांच सीटों पर अपने-अपने प्रत्याशी उतार दिए हैं, जिससे सियासी जंग और तीखी हो गई है.

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Bihar Election 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में सबसे दिलचस्प मुकाबला किसी सीट का नहीं, बल्कि चाचा-भतीजे की सियासी भिड़ंत का है. दिवंगत केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की विरासत अब दो हिस्सों में बंट चुकी है एक ओर एनडीए के सहयोगी चिराग पासवान, तो दूसरी ओर अलग राह चुन चुके पशुपति कुमार पारस. दोनों अपनी-अपनी पार्टी और पहचान के साथ जनता के बीच उतर चुके हैं.

पारस ने 25 सीटों पर उतारे अपने उम्मीदवार

जहां चिराग पासवान ने एनडीए में अपनी स्थिति मजबूत कर ली है. वहीं महागठबंधन में जगह न मिलने के बाद पशुपति पारस ने अकेले चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. पारस ने 25 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जिनमें एक सीट पर उनके बेटे भी मैदान में हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि इनमें से 5 सीटों पर सीधे चिराग पासवान की पार्टी के प्रत्याशी भी मैदान में हैं, यानी चाचा-भतीजे के बीच सीधी टक्कर तय है.

वो 5 सीटें जहां होगा पारस बनाम चिराग मुकाबला

  • साहेबपुर कमाल
  • बखरी
  • चेनारी
  • गरखा
  • महुआ

महागठबंधन को हो सकता है फायदा

इन पांचों विधानसभा क्षेत्रों में दोनों दलित नेताओं की उपस्थिति ने समीकरणों को जटिल बना दिया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दलित वोट बैंक में बंटवारा निश्चित है, जिससे महागठबंधन को अप्रत्यक्ष फायदा हो सकता है.

महागठबंधन से बात क्यों नहीं बनी?

सूत्रों के अनुसार, आरजेडी चाहती थी कि पशुपति पारस अपनी पार्टी आरएलजेपी का विलय महागठबंधन में कर लें. पार्टी के सिंबल ‘सिलाई मशीन’ को लेकर भी आरजेडी नेतृत्व चिंतित था. तेजस्वी यादव का तर्क था कि यह प्रतीक चुनावी पहचान के लिहाज से कमजोर है और इससे गठबंधन को नुकसान हो सकता है.
सीट शेयरिंग को लेकर भी दोनों के बीच मतभेद गहराते गए. शुरुआत में पारस 12 सीटों की मांग कर रहे थे, जिसे बाद में घटाकर 8 सीटें कर दिया गया, लेकिन तेजस्वी यादव 2–3 सीटों से अधिक देने को तैयार नहीं थे. यही कारण रहा कि पारस ने अंततः स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया.

सूरजभान का साथ छोड़ना पड़ा भारी

स्थिति तब और कठिन हो गई जब आरएलजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व बाहुबली सांसद सूरजभान सिंह ने पार्टी से दूरी बना ली. उन्होंने आरजेडी का दामन थाम लिया और अब उनकी पत्नी मोकामा से महागठबंधन की उम्मीदवार हैं, जहां उनका सीधा मुकाबला अनंत सिंह से है. सूरजभान के जाने से पशुपति पारस का राजनीतिक आधार कमजोर पड़ा, लेकिन उन्होंने पीछे हटने के बजाय अपनी ताकत दिखाने की रणनीति अपनाई.

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अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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