Bihar: जब जेपी ने कहा-आप लोग काम तो करते हैं, पर हाथ जनता की नब्ज पर नहीं रखते

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 02 Nov 2025 8:58 PM

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जयप्रकाश नारायण

Bihar: साल 1977 का आम चुनाव भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का अहम मोड़ था. जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में यह तानाशाही बनाम लोकतंत्र की लड़ाई बन गया. आपातकाल के विरोध में उठी जनता की लहर ने कांग्रेस को पहली बार सत्ता से बेदखल कर देश में नई राजनीतिक दिशा दी.

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Bihar: साल 1977 का चुनाव जयप्रकाश नारायण (जेपी) के लिए संघर्ष का मोर्चा था. उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की चुनाव की चुनौती स्वीकार की थी. जेपी की बिहार में पहली चुनावी सभा दो फरवरी, 1977 को मुजफ्फरपुर में हुई. विशाल जनसमूह और जेपी बोलने वाले. अपने डेढ़ घंटे के भाषण में जेपी यही समझाते रहे कि यह साधारण चुनाव नहीं है. तानाशाही और लोकशाही के बीच की लड़ाई है. सभा खत्म हुई, लोग चलने लगे. लोगों ने कहा, इस बार जब जनता खुद खड़ी हो गयी है, तो क्या सोचना है कि किसे वोट देना है.

जानिए पूरा वाक्या

जेपी को शाम को पटना लौटना था. हम कई लोग, जो उनके साथ थे, हम सब आपस में यह बात कर रहे थे कि जेपी ने अपने लंबे भाषण में न गरीबी की चर्चा की, न बेरोजगारी की चर्चा की. न ही किसी दूसरी समस्या की. गंगा के किनारे पहुंच कर स्टीमर की प्रतीक्षा में जब जेपी एक झोंपड़ी में चाय पीने के लिए बैठे, तो हमलोगों ने अपने मन की बात जेपी के सामने रखी. उन्होंने जवाब दिया, नहीं. यह समय कोई दूसरा सवाल उठाने का नहीं है.

लोकशाही का सवाल सर्वोपरि है. लोकशाही से ही दूसरी समस्याओं का हल ढूंढ़ने की शक्ति बन सकती है. जेपी ने कहा, आप लोग काम तो करते हैं, लेकिन हाथ जनता की नब्ज पर नहीं रखते. बात समझ में आ गयी. जब चुनाव का नतीजा सामने आया, तो जेपी सही साबित हुए. पूरे चुनाव में जेपी जहां भी जाते लोकशाही व तानाशाही की ही बात समझाते. हमलोगों ने देखा कि जेपी की बात सीधे लोगों के मन में प्रवेश कर जाती थी.

20 मार्च, 1977 को मतदान का दिन था. सुबह पांच बजे वह उठे, ताकि मतदान केंद्र खुलते ही वह वोट दे सकें. उसी दिन शाम को मतगणना की प्रक्रिया शुरू हुई. रात को नौ बजे दिल्ली से फोन आया कि मतदान के रुझान से संकेत मिले हैं कि रायबरेली में इंदिरा गांधी और अमेठी में संजय गांधी पीछे चल रहे हैं. यह खबर सुन कर जेपी ने कहा, वह इसी की पात्र थीं. चुनाव पूरा हुआ.

उत्तर भारत में कांग्रेस का सफाया हो चुका था, लेकिन दक्षिण में जनता पार्टी को इतनी सफलता नहीं मिली थी, जितनी अपेक्षा की गयी थी. कारण, जेपी बीमारी के कारण कम जगहों पर जा सके थे और आंदोलन का प्रभाव भी दक्षिण भारत में उतना नहीं था, जितना कि उत्तर भारत में था. 23 मार्च को जेपी दिल्ली गये. नये सांसदों ने दिल्ली में गांधी समाधि पर शपथ ली. कौन प्रधानमंत्री हो, इस बात का निर्णय जेपी और जेबी कृपलानी पर छोड़ दिया गया. उन्होंने मोरारजी भाई देसाई के पक्ष में निर्णय लिया. सारे कार्यों से वक्त निकाल कर जेपी इंदिरा गांधी से भी मिले. इसके बाद जेपी पटना लौट आये.

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परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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