मोकामा में घमासान: नीतीश के MLC ने उठाया सवाल- अनंत सिंह के पास JDU की सदस्यता नहीं तो टिकट कैसे?

Published by : Abhinandan Pandey Updated At : 06 Sep 2025 5:08 PM

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अनंत सिंह और नीरज सिंह की फाइल फोटो

Bihar Election 2025: मोकामा की सियासत एक बार फिर सुर्खियों में है. जेल से बाहर आए बाहुबली पूर्व विधायक अनंत सिंह ने चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है. 15 सितंबर को होने वाले एनडीए कार्यकर्ता सम्मेलन से पहले उनके पोस्टर और सक्रियता ने जदयू के भीतर दुविधा और राजनीतिक हलचल दोनों बढ़ा दी है.

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Bihar Politics: बिहार की राजनीति में मोकामा विधानसभा क्षेत्र एक बार फिर सियासी हलचल का केंद्र बन गया है. बाहुबली छवि वाले पूर्व विधायक अनंत सिंह जेल से बाहर आने के बाद अब पूरी तरह सक्रिय हो चुके हैं और उन्होंने यह साफ संकेत दे दिया है कि आगामी विधानसभा चुनाव में वे एक बार फिर मैदान में उतरेंगे. उनके इस ऐलान से न केवल मोकामा की राजनीति गरमा गई है, बल्कि जदयू के भीतर भी नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं.

एनडीए सम्मेलन और पोस्टरों से बढ़ी चर्चा

15 सितंबर को मोकामा के मोर में एनडीए कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित होने वाला है. इस कार्यक्रम के पोस्टरों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जदयू अध्यक्ष ललन सिंह की तस्वीरों के साथ अनंत सिंह की मौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि अनंत सिंह अप्रत्यक्ष रूप से जदयू प्रत्याशी के तौर पर अपनी दावेदारी पेश कर चुके हैं.

गौरतलब है कि जेल से बाहर आने के बाद अनंत सिंह ने पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से मुलाकात की थी और उसके बाद ललन सिंह से भी उनकी भेंट हुई थी. इन मुलाकातों ने उनकी राजनीतिक सक्रियता और संभावित रणनीति को और मजबूती दी है.

नीरज कुमार का कड़ा रुख

जदयू के वरिष्ठ नेता और एमएलसी नीरज कुमार ने अनंत सिंह की इस गतिविधि पर सीधा निशाना साधा है. खुद मोकामा से चुनाव लड़ चुके नीरज कुमार इस बार भी टिकट की दौड़ में हैं. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पार्टी को ऐसे व्यक्ति पर भरोसा करने से पहले सोचना चाहिए जिनकी छवि आपराधिक मामलों से जुड़ी रही है. उन्होंने आगे कहा कि टिकट लेने के पहले पार्टी की सदस्यता लेने पड़ती है. क्या उनके पास हैं सदस्यता? उनका यह बयान न केवल अनंत सिंह पर हमला था, बल्कि पार्टी नेतृत्व को दिया गया एक अप्रत्यक्ष संदेश भी था कि अगर जदयू ने गलत फैसले लिए तो पार्टी की छवि को नुकसान हो सकता है.

मोकामा की सियासी पृष्ठभूमि

मोकामा विधानसभा सीट लंबे समय तक अनंत सिंह का गढ़ मानी जाती रही है. उनकी लोकप्रियता और जनाधार का असर इस क्षेत्र में साफ देखा जाता है. कई बार विधायक चुने जाने के बाद अनंत सिंह ने जदयू छोड़ा और राजद का दामन थाम लिया था. उस दौरान उनकी पत्नी नीलम देवी राजद से चुनाव लड़कर विधायक बनीं. हालांकि, अनंत सिंह के जेल जाने और सदस्यता खत्म होने के बाद मोकामा की सीट जदयू के खाते में चली गई थी. अब जब अनंत सिंह ने खुद चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है तो यह साफ है कि उनकी सक्रियता मोकामा की राजनीति को नई दिशा दे सकती.

जदयू की सबसे बड़ी दुविधा

जदयू के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मोकामा में किसे उम्मीदवार बनाया जाए. अगर पार्टी अनंत सिंह को टिकट देती है तो यह उनकी लोकप्रियता का फायदा उठा सकती है, लेकिन इससे नीरज कुमार जैसे पुराने नेताओं की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है. दूसरी ओर अगर नीरज कुमार को टिकट दिया जाता है तो अनंत सिंह को समर्थकों का विरोध का सामना करना पड़ सकता है. यानी जदयू के सामने “दो धार वाली तलवार” जैसी स्थिति है, जहां किसी भी निर्णय का असर न केवल मोकामा बल्कि पूरे बिहार की सियासत पर पड़ सकता है.

मोकामा बना चुनावी केंद्र

मोकामा विधानसभा सीट अब केवल एक चुनावी क्षेत्र नहीं, बल्कि राजनीतिक रणनीति का केंद्र बन चुकी है. अनंत सिंह अपनी बाहुबली छवि और जनाधार के सहारे दोबारा अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं. वहीं, जदयू के भीतर से उठ रही विरोधी आवाजें पार्टी के लिए मुश्किलें बढ़ा रही हैं.

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अभिनंदन पांडेय पिछले दो वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत प्रिंट मीडिया से की और दैनिक जागरण, भोपाल में काम किया. वर्तमान में वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के हिस्सा हैं. राजनीति, खेल और किस्से-कहानियों में उनकी खास रुचि है. आसान भाषा में खबरों को लोगों तक पहुंचाना और ट्रेंडिंग मुद्दों को समझना उन्हें पसंद है. अभिनंदन ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने की सोच ने उन्हें इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. दैनिक जागरण में रिपोर्टिंग के दौरान उन्होंने भोपाल में बॉलीवुड के कई बड़े कलाकारों और चर्चित हस्तियों के इंटरव्यू किए. यह अनुभव उनके करियर के लिए काफी अहम रहा. इसके बाद उन्होंने प्रभात खबर डिजिटल में इंटर्नशिप की, जहां उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की वास्तविक दुनिया को करीब से समझा. बहुत कम समय में उन्होंने रियल टाइम न्यूज लिखना शुरू कर दिया. इस दौरान उन्होंने सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता भी बेहद जरूरी होती है. फिलहाल वह प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ काम कर रहे हैं. बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान उन्होंने कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में कवर किया, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और वीडियो कंटेंट भी तैयार किए. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और भरोसेमंद खबर पहुंचे. पत्रकारिता में उनका लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और एक विश्वसनीय पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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