लाल नंबर प्लेट वाली कारों का क्या होता है मतलब? बहुत कम लोग जानते हैं ये बात

Updated at : 12 Mar 2026 4:53 PM (IST)
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Red Number Plate Car

लाल नंबर प्लेट वाली कार (Photo: AI Generated)

Red Number Plate Car: नई कार खरीदने के बाद जब तक उसका स्थायी RTO रजिस्ट्रेशन नहीं हो जाता, तब तक उसे टेंपरेरी रजिस्ट्रेशन दिया जाता है. उसी दौरान इस तरह की लाल नंबर प्लेट लगाई जाती है. राष्ट्रीय प्रतीक वाली लाल प्लेट देश के राष्ट्रपति जैसे बड़े संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की गाड़ियों पर भी लगाई जाती है.

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अगर आपने कभी सड़क पर लाल रंग की नंबर प्लेट वाली कार देखी हो, तो शायद आपके मन में भी ये सवाल आया होगा कि आखिर इसका मतलब क्या होता है. भारत में गाड़ियों की नंबर प्लेट सिर्फ नंबर दिखाने के लिए नहीं होती, बल्कि उनका रंग भी बहुत कुछ बताता है. जैसे कि गाड़ी किस काम के लिए इस्तेमाल हो रही है और उसका रजिस्ट्रेशन किस तरह का है. आमतौर पर लोग सफेद और पीली नंबर प्लेट से तो अच्छी तरह वाकिफ होते हैं, लेकिन लाल नंबर प्लेट अक्सर लोगों के मन में जिज्ञासा पैदा कर देती है. आइए आपको इसके बारे में डिटेल में बताते हैं.

नई कारों को मिलती है टेंपरेरी लाल नंबर प्लेट

नई कार खरीदते समय आपने कई बार लाल रंग की नंबर प्लेट देखी होगी. दरअसल, यह प्लेट बताती है कि गाड़ी अभी बिल्कुल नई है और उसे आरटीओ (Regional Transport Office) से स्थायी रजिस्ट्रेशन नंबर नहीं मिला है. ऐसी स्थिति में गाड़ी के मालिक को एक टेंपरेरी नंबर प्लेट दी जाती है, ताकि वह जरूरी कागजी प्रोसेस पूरी होने तक गाड़ी को कानूनी तौर पर सड़क पर चला सके. जब आरटीओ से स्थायी रजिस्ट्रेशन जारी हो जाता है, तो इस लाल नंबर प्लेट की जगह नॉर्मल नंबर प्लेट लगा दी जाती है.

टेंपरेरी रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियम

आम तौर पर यह प्लेट करीब 30 दिनों तक वैलिड रहती है. अगर कोई व्यक्ति इस टाइम पीरियड के खत्म होने के बाद भी टेंपरेरी नंबर के साथ गाड़ी चलाता है, तो यह कानूनन गलत माना जाता है. ट्रांसपोर्ट नियमों के मुताबिक, ऐसा करने पर 10,000 रुपये तक का जुर्माना भी लग सकता है. बता दें कि कार मालिक अपनी गाड़ी को पर्सनल कामों के लिए चला सकत हैं, जैसे कि डीलरशिप से घर ले जाना या स्थायी रजिस्ट्रेशन की प्रोसेस पूरी करना. हालांकि एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि टेंपरेरी रजिस्ट्रेशन वाली गाड़ी का इस्तेमाल कमर्शियल कामों के लिए नहीं किया जा सकता.

टेंपरेरी रजिस्ट्रेशन वाली गाड़ियों का इस्तेमाल आम तौर पर उसी राज्य के भीतर करने के लिए होता है, जहां उनका रजिस्ट्रेशन हुआ है. अगर आपको ऐसी गाड़ी को दूसरे राज्य में ले जाना है, तो कई मामलों में इसके लिए अलग से अनुमति लेनी पड़ सकती है.

इसके अलावा, एक और जरूरी नियम याद रखना चाहिए कि टेंपरेरी रजिस्ट्रेशन के दौरान भी गाड़ी का वैलिड इंश्योरेंस होना अनिवार्य है. यानी सड़क पर चलने वाली किसी भी अन्य गाड़ी की तरह, इस दौरान भी इंश्योरेंस के नियम पूरी तरह लागू रहते हैं.

बड़े पद पर बैठे अधिकारियों के लिए लाल नंबर प्लेट

दिलचस्प बात यह है कि लाल रंग की एक और नंबर प्लेट भी होती है. इसका इस्तेमाल बिल्कुल अलग मकसद के लिए किया जाता है. देश के कुछ बेहद बड़े संवैधानिक पदों पर बैठे अधिकारियों जैसे भारत के राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति या राज्यों के राज्यपाल की गाड़ियों में कई बार नॉर्मल रजिस्ट्रेशन नंबर की जगह लाल रंग की प्लेट पर राष्ट्रीय प्रतीक (अशोक स्तंभ) लगा होता है.

ये नंबर प्लेट सिर्फ नंबर दिखाने के लिए नहीं होती, बल्कि उस गाड़ी के आधिकारिक दर्जे को दर्शाती है. यही वजह है कि ऐसी प्लेटों का इस्तेमाल सख्ती से केवल शीर्ष सरकारी पदों पर बैठे लोगों की गाड़ियों के लिए ही किया जाता है.

यह भी पढ़ें: भारत में कुछ कारों पर नीली नंबर प्लेट क्यों होती है? जानिए कौन होते हैं इसके असली मालिक

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Ankit Anand

लेखक के बारे में

By Ankit Anand

अंकित आनंद, प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वह पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं. टेक जर्नलिस्ट के तौर पर अंकित स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) न्यूज, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी खबरें कवर करते हैं. इसके अलावा, वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी अहम खबरों पर भी लिखते हैं. अंकित ने GGSIP यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन की है.

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