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Ratan Tata को लखटकिया NANO बनाने का कैसे आया आइडिया, मुंबई की तेज बारिश में हुआ क्या?

Updated at : 10 Oct 2024 5:10 PM (IST)
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How did Ratan Tata get the idea of ​​making the lakh rupee Nano.

How did Ratan Tata get the idea of ​​making the lakh rupee Nano

टाटा समूह के शीर्ष पर Ratan Tata का उदय चुनौतियों से भरा रहा. शुरुआती संदेह के बावजूद, उनके पूर्ववर्ती जेआरडी टाटा ने रतन की क्षमता को पहचाना और 1981 में उन्हें अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया.

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Ratan Tata भले ही अब इस दुनिया में ना हों मगर उनके किए हुए काम को ये दुनिया हमेशा याद रखेगी. Tata Nano का निर्माण भी एक ऐसा ही विजन था जिससे पूरी दुनिया हैरत में पड़ गई थी कैसे कोई मात्र एक लाख रुपये में लग्जरी कार बना कर बेच सकता है. मगर रतन टाटा ने इसे संभव कर के दिखाया था, लेकिन ऐसी क्या जरूरत आन पड़ती थी कि रतन टाटा को टाटा नैनो जैसी का निर्माण करना पड़ गया था? आज हम इसी बारे में चर्चा करेंगे.

TATA NANO का निर्माण

इनोवेशन और परोपकार के पर्याय रतन टाटा ने एक बार एक परिवार को मुंबई की मूसलाधार बारिश में एक साधारण स्कूटर पर सवार होकर जाते देखा था. इस साधारण लेकिन मार्मिक दृश्य ने एक क्रांतिकारी विचार को जन्म दिया और रतन टाटा ने एक ऐसी कार जन्म दिया जो हर भारतीय की पहुँच में हो. नैनो को इसी अवधारणा से बनाया गया.

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कैसे उभरे रतन टाटा

टाटा समूह के शीर्ष पर रतन टाटा का उदय चुनौतियों से भरा रहा. शुरुआती संदेह के बावजूद, उनके पूर्ववर्ती जेआरडी टाटा ने रतन की क्षमता को पहचाना और 1981 में उन्हें अपना उत्तराधिकारी नियुक्त किया. रतन, जो अपने शांत व्यवहार और विनम्रता के लिए जाने जाते थे, को कॉर्पोरेट दिग्गज का नेतृत्व करने की उनकी क्षमता पर संदेह था.

जेआरडी टाटा की कमी रतन टाटा ने पूरी

भारतीय व्यापार जगत की एक महान हस्ती जेआरडी टाटा अपने पीछे एक महत्वपूर्ण शून्य छोड़ गए थे. हालांकि, रतन टाटा ने खुद को उस शून्य को भरने में सक्षम साबित किया. उन्होंने नेल्को और कपड़ा उद्योग जैसे संघर्षरत व्यवसायों को बदल दिया और उन्हें लाभदायक उपक्रमों में बदल दिया. उनके नेतृत्व की पहचान व्यावसायिक कौशल और सामाजिक जिम्मेदारी के संयोजन से हुई.

रतन टाटा की उपलब्धि

रतन टाटा की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में से एक टेटली, कोरस और जगुआर लैंड रोवर जैसे वैश्विक ब्रांडों का सफल अधिग्रहण था. उन्होंने टाटा समूह को नया रूप दिया, इसके संचालन को आधुनिक बनाया और इसे वैश्विक खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया. उनकी दूरदर्शिता और बदलती बाजार स्थितियों के अनुकूल ढलने की उनकी क्षमता ने समूह की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. रतन टाटा की विरासत व्यवसाय से परे है. किफायती स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा जैसे सामाजिक कारणों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता ने उन्हें व्यापक सम्मान और प्रशंसा दिलाई है. अधिक समतापूर्ण और समावेशी समाज का उनका दृष्टिकोण लाखों लोगों को प्रेरित करता है.

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Abhishek Anand

लेखक के बारे में

By Abhishek Anand

'हम वो जमात हैं जो खंजर नहीं, कलम से वार करते हैं'....टीवी और वेब जर्नलिज्म में अच्छी पकड़ के साथ 10 साल से ज्यादा का अनुभव. झारखंड की राजनीतिक और क्षेत्रीय रिपोर्टिंग के साथ-साथ विभिन्न विषयों और क्षेत्रों में रिपोर्टिंग. राजनीतिक और क्षेत्रीय पत्रकारिता का शौक.

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