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भोपाल में दौड़ी Driverless Bolero, ट्विटर पर चहक उठे आनंद महिंद्रा

Updated at : 02 Apr 2024 4:29 PM (IST)
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भोपाल में दौड़ी Driverless Bolero, ट्विटर पर चहक उठे आनंद महिंद्रा

भोपाल में बिना ड्राइवर के दौड़ती बोलेरो. फोटो: प्रभात खबर

Driverless Bolero: अब देश-दुनिया में हैंडफ्री और मैनफ्री जमाना आ गया है. रोबोट और आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) इसका प्रमाण हैं. इस रोबोट और एआई के जरिए लोग एक से एक कारनामा कर रहे हैं. ऐसा ही एक कारनामा भोपाल के इंजीनियर ने कर दिखाया. बिना ड्राइवर के बोलेरो सड़क पर दौड़ा दी.

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Driverless Bolero: सोशल मीडिया पर महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने ट्विटर (एक्स) पर एक वीडियो पोस्ट किया है, जिसमें ऑफ-रोड एसयूवी कार बोलेरो बिना किसी ड्राइवर के सड़क पर सरपट दौड़ती नजर आ रही है. सबसे बड़ी बात यह है कि इस गाड़ी को रोबोट भोपाल से करीब 22 किलोमीटर दूर अवधपुरी के कंकाली काली माता मंदिर के पास दुर्गा माता रोड पर चला रहा है. ट्विटर पर सबसे पहले इसका एक वीडियो संजीव शर्मा नामक यूजर ने 18 मार्च को पोस्ट किया था, जिसे 1 अप्रैल को री-ट्वीट किया गया. उसके बाद आनंद महिंद्रा ने संजीव शर्मा को टैग करते हुए अपना पोस्ट डाला.

ट्विटर पर जोर-जोर से जयकारा लगाने लगे आनंद महिंद्रा

अपने पोस्ट में आनंद महिंद्रा ने लिखा, ‘पूरे भारत में तकनीकी नवाचार के बढ़ने के प्रमाण. एक इंजीनियर जिसने अभी तक कोई अन्य डिलीवरी ऐप नहीं बनाया. संजीव शर्मा (@sanjeevs_iitr) लेवल 5 की ऑटोनोमस को लक्षित करने के लिए जटिल मैथ का इस्तेमाल कर रहा है.’ उन्होंने अपने पोस्ट में आगे लिखा, ‘मैं जोर-जोर से जयकार लगा रहा हूं. और निश्चित रूप से उनकी कार की पसंद पर बहस नहीं होगी.’

कभी साइकिल सवार को बचाया, तो कभी सड़क पर खाए हिचकोले

सोशल मीडिया मंच ट्विटर के यूजर संजीव शर्मा ने 18 मार्च 2024 को एक वीडियो पोस्ट किया था. यह वीडियो करीब 6.39 मिनट का है. इस वीडियो में एक बिना ड्राइवर के बोलेरो गाड़ी सड़क पर दौड़ती नजर आ रही है. इस दौरान वह कभी साइकिल सवार को बचाता दिखाई दे रही है, तो कभी ऊबड़-खाबड़ सड़क पर हिचकोले खाती है. सही मायने में इस गाड़ी को रोबोट चला रहा है.

अवधपुरी के कंकाली काली माता मंदिर के पास दौड़ रही बोलेरो

मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, बिना ड्राइवर के बोलेरो भोपाल से करीब 22 किमी दूर अवधपुरी के कंकाली काली माता के मंदिर के पास सरपट दौड़ रही थी. इस दौरान वह कभी साइकिल सवार से बचती, तो कभी दूसरी गाड़ियों के अचानक सामने आने पर अपना रास्ता बदल लेती है. ऑटोनोमस कार की दुनिया का यह डेमोस्ट्रेशन हाल में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

सात साल में 80 डेमो

दरअसल, सोशल मीडिया मंच ट्विटर पर बिना ड्राइवर के सड़क पर चलने वाली बोलेरो का वीडियो भोपाल स्थित स्वायत्त रोबोट नामक स्टार्टअप कंपनी के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) संजीव शर्मा ने पोस्ट की थी. इस कंपनी ने मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी में भी अपना प्रदर्शन कर चुकी है. भोपाल के स्वायत्त रोबोट के संस्थापक और सीईओ संजीव शर्मा ने स्वायत्त ड्राइविंग तकनीक में मैथेमेटिकल एल्गोरिदम और एआई तकनीक की पेचीदा जटिलताओं पर रिसर्च किया है. वे लगातार इसके उच्च स्तरीय विकास पर काम कर रहे हैं. इसके बारे में संजीव शर्मा का कहना है कि वे पिछले सात साल में 80 बार डेमो कर चुके हैं.

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2015 से रिसर्च में जुटे हैं स्वायत्त रोबोट के सीईओ

मीडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, आईआईटी रुड़की और कनाडा से पढ़ाई करने वाले स्वायत्त रोबोट के सीईओ संजीव शर्मा साल 2015 से लगातार रिसर्च में जुटे हैं. इस रिसर्च परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए संजीव शर्मा को साल 2021 में अमेरिका स्थित सिलिकॉन वैली से करीब 22 करोड़ रुपये का फंड मिला था. इस समय उनकी कंपनी का बाजार मूल्यांकन करीब 563 करोड़ रुपये है.

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KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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