ज्यादातर किशोर सोशल मीडिया को अपने लिए मानते हैं जरूरी

समय-समय पर आनेवाली तमाम रिपोर्ट में इस बात को लेकर तस्दीक की जाती है कि सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल से एकाग्रता और याददाश्त प्रभावित होने का खतरा रहता है, लेकिन ज्यादातर किशोर इसके उलट सोचते हैं. हाल में पीउ रिसर्च सेंटर द्वारा किये गये सर्वे में बताया गया है कि अमेरिका में ज्यादा टीनएजर्स […]
समय-समय पर आनेवाली तमाम रिपोर्ट में इस बात को लेकर तस्दीक की जाती है कि सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल से एकाग्रता और याददाश्त प्रभावित होने का खतरा रहता है, लेकिन ज्यादातर किशोर इसके उलट सोचते हैं. हाल में पीउ रिसर्च सेंटर द्वारा किये गये सर्वे में बताया गया है कि अमेरिका में ज्यादा टीनएजर्स का मानना है कि इंस्टाग्राम, टि्वटर और फेसबुक इस्तेमाल करने के दोस्ती बढ़ाने और अपना लोगों के बीच विचार रखने में मदद मिलती है.
अध्ययन के मुताबिक, 81 प्रतिशत से अधिक बच्चे सोचते हैं कि सोशल मीडिया के माध्यम से अपने दोस्तों के साथ जुड़ने में मदद मिलती है, जबकि 69 प्रतिशत किशोरों का मानना है कि सोशल मीडिया के माध्यम से वे समाज के अलग-अलग वर्ग के लोगों को जुड़ पाते हैं. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 68 प्रतिशत बच्चों का मानना है कि सोशल मीडिया पर जुड़ने से उन्हें ऐसा लगता है कि बुरे वक्त में लोग उनका साथ देंगे.
लगभग 37 प्रतिशत किशोर ज्यादा लाइक और कमेंट पाने के लिए पोस्ट करते वक्त दबाव महसूस करते हैं. इससे पहले भी आयी रिपोर्ट में इस आशय का दावा किया जा चुका है.
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