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रांची़ : फूड समिट में भाग लेने आ रहे दुमका के छह किसान घायल

Updated at : 30 Nov 2018 6:19 AM (IST)
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रांची़ : फूड समिट में भाग लेने आ रहे दुमका के छह किसान घायल

रांची़ : ग्लोबल एग्रीकल्चर एंड फूड समिट में भाग लेने के लिए रांची आ रहे दुमका के छह किसान बुधवार की रात घायल हो गये. इनमें महेशपुर, दुमका के महालाल बास्की (32) का सिर फूट गया. काठीकुंड, दुमका के अशोक कुमार टुडू (42) की नाक कट गयी. जियापानी, दुमका निवासी भुवनेश्वर मांझी (58) के गाल […]

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रांची़ : ग्लोबल एग्रीकल्चर एंड फूड समिट में भाग लेने के लिए रांची आ रहे दुमका के छह किसान बुधवार की रात घायल हो गये. इनमें महेशपुर, दुमका के महालाल बास्की (32) का सिर फूट गया. काठीकुंड, दुमका के अशोक कुमार टुडू (42) की नाक कट गयी. जियापानी, दुमका निवासी भुवनेश्वर मांझी (58) के गाल में चोट लगी है.
इसके अलावा मोहरा, दुमका के शंभु मंडल(68), कांजो, दुमका के श्रीकृष्ण यादव (60) व जियापानी दुमका के अर्जुन मंडल (50) को भी चोट लगी है. गुरुवार को मजिस्ट्रेट राजीव कुमार श्रीवास्तव ने घायल किसानों का उपचार रिम्स में कराया. घायल किसान भुवनेश्वर मांझी ने बताया कि रात करीब तीन बजे ओरमांझी टोल प्लाजा के स्पीड ब्रेकर पर बस काफी उछल गयी थी. उसी दौरान पीछे बैठे किसान चोटिल हो गये. मेदांता अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद सभी खेलगांव पहुंचे. वहां से उन्हें रिम्स लाया गया.
रांची : झाविमो के केंद्रीय प्रवक्ता योगेंद्र प्रताप सिंह ने कहा है कि फूड समिट का हश्र मोमेंटम झारखंड जैसा ही होगा. समिट को किसानों का महाकुंभ बताने वाली सरकार को पता है कि यह सरकारी डोभा है.
समिट से किसानों को कोई लाभ नहीं होगा. यह आयोजन केवल सरकारी पैसों के दुरुपयोग व बंदरबांट के लिए है. उन्होंने कहा कि सरकार ने 2017 में मोमेंटम झारखंड के आयोजन के दौरान 11 हजार देसी-विदेशी डेलीगेट्स की मौजूदगी में 3.10 लाख करोड़ के 210 एमओयू कर निवेश के बड़े-बड़े दावे किये थे. आज 21 महीने बाद तक एक भी एमओयू जमीन पर नहीं उतर सका है.
आइवॉश के लिए कुछ कंपनियों को लाया गया है, लेकिन उनका काम भी बहुत धीमी गति से चल रहा है. छह लाख लोगों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रोजगार देने का दंभ भर कर केवल कुछ हजार लोगों को निजी सेक्टर में रोजगार का लाॅलीपाॅप पकड़ा दिया गया है. उन्होंने कहा कि राज्य में किसान लगातार आत्महत्या कर रहे हैं, लेकिन महत्वाकांक्षी योजना चलाने के बजाय सरकार किसानों के साथ जनता को भी गुमराह करने में लगी हुई है. मोमेंटम झारखंड की नाकामी के लिए सरकार को जनता से माफी मांगते हुए दोषियों पर कार्रवाई करनी चाहिए.
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