सरकार ने Telegram पर लगाया प्रतिबंध, WhatsApp पर क्यों नहीं?

Edited by Rajeev Kumar
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Telegram पर कार्रवाई, WhatsApp क्यों बच गया? // एआई-जेनरेटेड रिप्रेजेंटेशनल इलस्ट्रेशन

NEET री-टेस्ट से पहले टेलीग्राम पर कार्रवाई के बाद सवाल उठ रहे हैं कि व्हाट्सऐप को क्यों नहीं रोका गया. जानिए दोनों प्लैटफॉर्म्स में क्या अंतर है और सरकार की चिंता आखिर क्या है.

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NEET री-टेस्ट से पहले भारत सरकार ने मैसेजिंग प्लैटफॉर्म टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाकर लाखों यूजर्स को चौंका दिया है. यह फैसला ऐसे समय आया है जब परीक्षा से जुड़ी फर्जी जानकारी, कथित पेपर लीक और ठगी के मामलों को लेकर चिंताएं बढ़ रही थीं. लेकिन इस कार्रवाई के बाद एक सवाल तेजी से चर्चा में है कि जब टेलीग्राम और व्हाट्सऐप दोनों ही लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप हैं, तो फिर कार्रवाई सिर्फ टेलीग्राम पर ही क्यों हुई?

NEET री-टेस्ट से पहले बढ़ी चिंता

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के मुताबिक कुछ टेलीग्राम चैनलों और ग्रुप्स पर कथित तौर पर NEET परीक्षा के पेपर बेचने और छात्रों को गुमराह करने वाली सामग्री साझा की जा रही थी. जांच एजेंसियों को ऐसे कई सार्वजनिक चैनल मिले जहां लाखों रुपये लेकर परीक्षा प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे थे. रिपोर्ट के अनुसार कई बार चैनल हटाए जाने के बावजूद नई आईडी और नए ग्रुप बनाकर गतिविधियां दोबारा शुरू हो जाती थीं.

इसी वजह से NTA ने सरकार को टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की, जिसे मंजूरी दे दी गई.

टेलीग्राम को अपराधी क्यों पसंद करते हैं?

टेलीग्राम की सबसे बड़ी खासियत इसकी गुमनामी है. यहां यूजर अपना मोबाइल नंबर छिपाकर सिर्फ यूजरनेम के जरिए भी प्लैटफॉर्म का इस्तेमाल कर सकता है. इसके अलावा कोई भी व्यक्ति आसानी से ऐसा चैनल बना सकता है जिसमें लाखों सदस्य जुड़ सकते हैं, जबकि चैनल चलाने वाले की पहचान सामने नहीं आती.

टेलीग्राम पर बड़ी साइज की फाइलें भी आसानी से शेयर की जा सकती हैं. यही वजह है कि फिल्मों की पाइरेसी से लेकर कथित फर्जी दस्तावेजों और परीक्षा पेपरों तक की शेयरिंग के लिए इस प्लैटफॉर्म का इस्तेमाल होने की शिकायतें पहले भी सामने आती रही हैं.

एडिट फीचर भी बना चिंता की वजह

जांच एजेंसियों ने यह भी पाया कि कुछ चैनल एडमिन पुराने संदेशों को बाद में एडिट करके उन्हें कथित पेपर लीक का सबूत दिखाने की कोशिश कर रहे थे. टेलीग्राम में पुराने मैसेज को एडिट करने की सुविधा लंबे समय तक उपलब्ध रहती है, जिससे गलत जानकारी को नया रूप देकर पेश करना आसान हो सकता है.

इसी कारण भारत में फिलहाल टेलीग्राम के कुछ एडिटिंग फीचर्स पर भी अस्थायी रोक लगाई गई है.

फिर व्हाट्सऐप पर कार्रवाई क्यों नहीं?

विशेषज्ञों का मानना है कि व्हाट्सऐप और टेलीग्राम की कार्यप्रणाली में बड़ा अंतर है. व्हाट्सऐप पर अकाउंट मोबाइल नंबर से जुड़ा होता है और वहां बड़े सार्वजनिक चैनलों की तुलना में पहचान छिपाना अपेक्षाकृत कठिन माना जाता है.

इसके अलावा व्हाट्सऐप की मूल कंपनी मेटा सार्वजनिक गतिविधियों और संदिग्ध व्यवहार की पहचान के लिए एआई आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम का इस्तेमाल करती है. कंपनी का दावा है कि वह निजी चैट नहीं पढ़ती, लेकिन संदिग्ध पैटर्न और दुरुपयोग की पहचान कर कार्रवाई करती है. यही वजह मानी जा रही है कि धोखाधड़ी करने वाले समूह अक्सर टेलीग्राम को प्राथमिकता देते हैं.

क्या टेलीग्राम हमेशा के लिए बंद रहेगा?

फिलहाल यह प्रतिबंध परीक्षा प्रक्रिया को सुरक्षित रखने और गलत सूचनाओं पर रोक लगाने के उद्देश्य से लगाया गया है. टेलीग्राम की ओर से भी कहा गया है कि प्लेटफॉर्म पर मॉडरेशन लगातार बढ़ाया जा रहा है और हानिकारक कंटेंट हटाने के लिए एआई टूल्स का इस्तेमाल किया जा रहा है.

हालांकि यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि डिजिटल प्लैटफॉर्म्स की लोकप्रियता जितनी तेजी से बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से उनके दुरुपयोग की चुनौतियां भी सामने आ रही हैं. आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार और टेक कंपनियां इस संतुलन को कैसे बनाए रखती हैं. यह भी पढ़ें- NEET री-एग्जाम से पहले मोदी सरकार का बड़ा एक्शन, 22 जून तक Telegram बैन

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Rajeev Kumar

लेखक के बारे में

By Rajeev Kumar

राजीव कुमार हिंदी डिजिटल मीडिया के अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर के तौर पर कार्यरत हैं. 15 वर्षों से अधिक के पत्रकारिता अनुभव के दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल सेक्टर की हजारों खबरों, एक्सप्लेनर, एनालिसिस और फीचर स्टोरीज पर काम किया है. सरल भाषा, गहरी रिसर्च और यूजर-फर्स्ट अप्रोच उनकी लेखन शैली की सबसे बड़ी पहचान है. राजीव की विशेषज्ञता स्मार्टफोन, गैजेट्स, एआई, मशीन लर्निंग, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), साइबर सिक्योरिटी, टेलीकॉम, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, ICE और हाइब्रिड कारों, ऑटोनोमस ड्राइविंग तथा डिजिटल ट्रेंड्स जैसे विषयों में रही है. वे लगातार बदलती टेक और ऑटो इंडस्ट्री पर नजर रखते हैं और रिपोर्ट्स, आधिकारिक डेटा, कंपनी अपडेट्स तथा एक्सपर्ट इनसाइट्स के आधार पर सटीक और भरोसेमंद जानकारी पाठकों तक पहुंचाते हैं. डिजिटल मीडिया में राजीव की खास पहचान SEO-ऑप्टिमाइज्ड और डेटा-ड्रिवेन कंटेंट के लिए भी रही है. गूगल डिस्कवर और यूजर एंगेजमेंट को ध्यान में रखते हुए वे ऐसे आर्टिकल्स तैयार करते हैं, जो न केवल जानकारीपूर्ण होते हैं, बल्कि पाठकों की जरूरत और सर्च ट्रेंड्स से भी मेल खाते हैं. टेक और ऑटो सेक्टर पर उनके रिव्यू, एक्सपर्ट इंटरव्यू, तुलना आधारित लेख और एक्सप्लेनर स्टोरीज को पाठकों द्वारा काफी पसंद किया जाता है. राजीव ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत वर्ष 2011 में प्रभात खबर दैनिक से की थी. शुरुआती दौर में उन्होंने देश-विदेश, कारोबार, संपादकीय, साहित्य, मनोरंजन और फीचर लेखन जैसे विभिन्न बीट्स पर काम किया. इसके बाद डिजिटल प्लैटफॉर्म पर उन्होंने ग्राउंड रिपोर्टिंग, वैल्यू-ऐडेड स्टोरीज और ट्रेंड आधारित कंटेंट के जरिए अपनी अलग पहचान बनाई. जमशेदपुर में जन्मे राजीव ने प्रारंभिक शिक्षा सीबीएसई स्कूल से प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने रांची यूनिवर्सिटी से बॉटनी ऑनर्स और भारतीय विद्या भवन, पुणे से हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार में डिप्लोमा किया. पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws+1H पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें खबरों की गहराई समझने और उन्हें आसान, स्पष्ट और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में मदद करती है. राजीव की सबसे बड़ी पहचान है, क्रेडिब्लिटी, क्लैरिटी और ऑडियंस-फर्स्ट अप्रोच. वे सिर्फ टेक ऐंड ऑटो को कवर नहीं करते, बल्कि उसे ऐसे पेश करते हैं कि हर व्यक्ति उसे समझ सके, उससे जुड़ सके और उससे फायदा उठा सके. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

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