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इतिहास रचा! 1400 साल में पहली बार चर्च ऑफ इंग्लैंड को मिली महिला स्पिरिचुअल लीडर, जानें कौन हैं सारा मुलैली

Updated at : 03 Oct 2025 5:41 PM (IST)
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Sarah Mullally Church of England Archbishop Of Canterbury

सारा मुलैली, इंग्लैंड चर्च की कैनटरबरी की आर्कबिशप

Who Sarah Mullally: सारा मुलैली जो एख नर्स से कैंटरबरी की पहली महिला आर्कबिशप बनीं. 1,400 साल पुरानी परंपरा में इतिहास रचते हुए एंग्लिकन चर्च में प्रगतिशील बदलाव और नेतृत्व का नया दौर.

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Who Sarah Mullally: कभी आपने सोचा है कि एक नर्स, जो मरीजों की देखभाल करती थी, दुनिया के सबसे पुराने चर्च की स्पिरिचुअल लीडर बन सकती है? सारा मुलैली ने यही कर दिखाया है. 63 साल की सारा अब कैंटरबरी की आर्कबिशप बनकर लगभग 85 मिलियन एंग्लिकन के आध्यात्मिक मार्गदर्शक बनने जा रही हैं. 1400 साल पुरानी इस परंपरा में अब तक सिर्फ पुरुष ही इस पद को संभालते आए हैं.

Who Sarah Mullally: नर्सिंग की दुनिया से चर्च की गलियारों तक

सारा मुलैली की कहानी सीधे हॉलीवुड मूवी जैसी है. 2001 में पादरी बनने से पहले, वह लंदन में प्रशिक्षित नर्स थीं. NHS में काम करते हुए वह देश की चीफ नर्सिंग ऑफिसर तक पहुंचीं, यानी नर्सिंग की दुनिया का सबसे बड़ा पद. लेकिन फिर उन्होंने एक बड़ा बदलाव किया और फुल-टाइम पादरी बनने का फैसला किया. इस फैसले ने उन्हें दया और प्रशासनिक कौशल दोनों में माहिर बना दिया. 2018 में सारा लंदन के बिशप बनीं, जो चर्च ऑफ इंग्लैंड का तीसरा सबसे बड़ा पद है. इस दौरान उन्होंने चर्च के कोविड-19 रिस्पॉन्स की देखरेख की, प्रशासन में आधुनिक सुधार लागू किए और एक मजबूत प्रशासक के रूप में अपनी पहचान बनाई.

सारा मुलैली ने चर्च में समान लिंग वाले जोड़ों के आशीर्वाद का समर्थन किया और शादी व सेक्सुअलिटी पर बहस में हमेशा आगे रही हैं. वह चर्च में मतभेदों को सुलझाने और लोगों की बात ध्यान से सुनने वाली नेता के रूप में जानी जाती हैं.

Who Sarah Mullally in Hindi: सारा की नियुक्ति का महत्व

सारा की नियुक्ति केवल एक पद परिवर्तन नहीं है, बल्कि सदियों पुरानी परंपरा में ऐतिहासिक बदलाव का प्रतीक है. उनके पूर्ववर्ती जस्टिन वेल्बी ने 2014 में महिलाओं को बिशप बनने का अधिकार दिया था, और उसी की वजह से यह संभव हो पाया. अब आर्कबिशप के रूप में सारा के सामने कई चुनौतियां हैं कि चर्च में घटती लोगों की संख्या, आर्थिक संकट और यौन शोषण के मामलों का असर. उन्हें लोगों का विश्वास बहाल करना, युवा पीढ़ी को जोड़ना और चर्च की सार्वजनिक भूमिका को फिर से स्थापित करना होगा.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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