कौन हैं जापान की पहली महिला पीएम? 'आयरन लेडी' के नाम से हैं मशहूर

Published by : Pritish Sahay Updated At : 21 Oct 2025 8:41 PM

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Sanae Takaichi

Who is Sanae Takaichi: जापान की पुरुष प्रधान राजनीति में मंगलवार को बहुत बड़ा बदलाव देखने को मिला. घोर रूढ़िवादी मानी जाने वाली साने ताकाइची को देश की पहली महिला प्रधानमंत्री चुना गया है. ताकाइची लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी का नेतृत्व करने वाली पहली महिला भी हैं.

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Who is Sanae Takaichi: जापान की संसद ने मंगलवार को घोर रूढ़िवादी साने ताकाइची को देश की पहली महिला प्रधानमंत्री चुना गया है. जापान की पुरुष प्रधान राजनीति में इसे बहुत बड़ा बदलाव माना जा रहा है. साने ताकाइची अपने घोर रूढ़िवादी सोच के लिए जानी जाती है. यही नहीं वो पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री मार्गरेट थैचर की बड़ी प्रशंसक हैं. जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के रूढ़िवादी दृष्टिकोण की बड़ी समर्थक हैं. चीन के आंखों में खटकने वाले यसुकुनी मंदिर में ताकाइची पूजा अर्चना करने नियमित तौर पर जाती हैं. चीन, उत्तर और दक्षिण कोरिया समेत कई और एशियाई देश मानते हैं कि यह मंदिर दूसरे विश्व युद्ध में जापान की आक्रमता का महिमंडन करता है. साने ताकाइची का राजनीतिक सफर काफी दिलचस्प है.

ताकाइची लेंगी प्रधानमंत्री पद की शपथ

ताकाइची जापान में शिगेरु इशिबा की प्रधानमंत्री पद ग्रहण करेंगी. इशिवा को दो बार हार के बाद इस्तीफा देना पड़ा. साने ताकाइची पहली बार 1993 में अपने गृहनगर नारा से सांसद चुनी गई थीं. उन्होंने राजनयिक अनुभव नहीं होने के बावजूद आर्थिक सुरक्षा, गृह, लैंगिक समानता मंत्री सहित पार्टी और सरकार में कई पदों पर अपनी सेवाएं दीं हैं. ताकाइची ने पहले ही साफ कर दिया है कि उनका फोकस जापान की सेना को मजबूत करने, विकास के लिए अधिक खर्च करने, न्यूक्लियर एनर्जी प्रोग्राम को प्रोत्साहन देने, साइबर सिक्युरिटी और आव्रजन पर रहेगा.

‘मैं केवल काम- काम और काम करूंगी’- ताकाइची

जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री ताकाइची अपने कठिन परिश्रम के लिए काफी विख्यात हैं. अपने छात्र जीवन में ताकाइची ड्रम वादक और मोटरसाइकिल चालक थीं. वो दो बार एलडीपी का नेतृत्व हासिल करने की असफल कोशिश भी कर चुकीं हैं. इसके बाद उन्होंने अपनी सोच की दिशा बदली और अपने सहयोगियों से संपर्क बढ़ाने की पहल की. उन्होंने अपने पार्टी सहयोगियों से ‘घोड़े की तरह काम करने की अपील की और कहा कि मैं ‘काम और जीवन के बीच संतुलन के शब्द को समाप्त कर दूंगी. मैं केवल काम- काम और काम करूंगी.’’

ताकाइची ने काफी संघर्ष के बाद हासिल किया मुकाम

ताकाइची को जापान की पुरुष प्रधान पार्टी में अपनी पहचान के लिए काफी कड़ा संघर्ष करना पड़ा है. जापान की संसद के निचले सदन में सिर्फ 15 फीसदी महिलाएं हैं. कुल 47 प्रांतीय गवर्नर में सिर्फ दो महिलाएं ही इस पद पर हैं. ताकाइची हमेशा लैंगिक समानता के मुद्दों पर बात करने से बचती रही हैं. हालांकि, उन्होंने अपनी सरकार में महिलाओं की संख्या बढ़ाने की बात कही है. लेकिन, शाही उत्तराधिकार केवल पुरुष सदस्य को ही देने की नीति का समर्थन भी किया है.

कई मुद्दों पर ताकाइची का रहा है विरोध

जापान की नव निर्वाचित प्रधानमंत्री टैक्स की सुरक्षा और इतिहास पर सख्त नीति अपना सकती हैं. क्योंकि उन्होंने युद्ध में जापान की आक्रामकता और अत्याचार को स्वीकार करने का जोरदार विरोध किया है. जब कोरियाई मजदूरों का इस्तेमाल किया गया था. यही नहीं ताकाइची उस अभियान का भी हिस्सा रही थीं जिसमें स्कूल के पाठ्य पुस्तकों में से युद्ध के दौरान यौन दासता का संदर्भ हटाने की मांग की गई थी. 

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प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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