अमेरिका ने अपने नागरिकों से कहा- 'तुरंत ईरान छोड़ें', बॉर्डर पार करने के लिए दी यह सलाह

Updated at : 06 Feb 2026 10:12 AM (IST)
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US Warning Leave Iran border Advisory

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप.

US Warning Leave Iran: ईरान में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने अपने नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने की चेतावनी दी है. इंटरनेट पर पाबंदियों और फ्लाइट कैंसिल होने के कारण, सभी की नजरें मस्कट में होने वाली अहम न्यूक्लियर बातचीत पर टिकी हैं. क्या दोनों देशों के बीच विवाद सुलझ जाएगा, या हालात और बिगड़ेंगे?

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US Warning Leave Iran: ईरान में तनाव के बीच हालात बिगड़ते देख अमेरिका ने अपने नागरिकों के लिए ‘रेड अलर्ट’ जारी कर दिया है. शुक्रवार को ईरान में मौजूद वर्चुअल अमेरिकी दूतावास (US Embassy) ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अमेरिकी नागरिक ‘तुरंत ईरान छोड़ दें’. दूतावास के मुताबिक, वहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम, सड़कों की बंदी, ट्रांसपोर्ट में दिक्कतें और इंटरनेट पर पाबंदी जैसे हालात बने हुए हैं.

सरकार ने इंटरनेट पर लगाया ताला

एडवाइजरी में बताया गया है कि ईरान सरकार मोबाइल और लैंडलाइन इंटरनेट नेटवर्क को लगातार ब्लॉक कर रही है. एयरलाइंस ने भी ईरान आने-जाने वाली फ्लाइट्स को या तो कम कर दिया है या पूरी तरह कैंसिल कर दिया है. अमेरिकी नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे इंटरनेट बंद होने के लिए तैयार रहें और बातचीत के लिए दूसरे रास्ते ढूंढें. अगर सुरक्षित हो, तो वे सड़क के रास्ते आर्मेनिया या तुर्की की तरफ निकल जाएं.

‘सरकार की मदद का इंतजार न करें, खुद का प्लान बनाएं’

अमेरिकी दूतावास ने साफ-साफ कहा है कि ईरान अभी छोड़ें. देश से बाहर निकलने के लिए ऐसा प्लान बनाएं जिसमें अमेरिकी सरकार की मदद पर निर्भर न रहना पड़े. साथ ही ये भी कहा गया है:

  • फ्लाइट्स कभी भी कैंसिल हो सकती हैं, इसलिए अपनी एयरलाइन से लगातार संपर्क में रहें.
  • अगर बाहर निकलना मुमकिन न हो, तो अपने घर या किसी सुरक्षित बिल्डिंग के अंदर ही रहें.
  • खाने-पीने का सामान, पानी और दवाइयों का स्टॉक अपने पास रखें.
  • प्रदर्शनों (demonstrations) से दूर रहें, लो-प्रोफाइल रहें और अपने फोन को हमेशा चार्ज रखें.

दोहरी नागरिकता वालों के लिए बड़ी मुश्किल

एडवाइजरी में एक जरूरी बात यह भी कही गई है कि जिन लोगों के पास अमेरिका और ईरान दोनों की नागरिकता है, उन्हें ईरानी पासपोर्ट पर ही बाहर निकलना होगा. ईरान सरकार दोहरी नागरिकता को नहीं मानती और उनके साथ ईरानी नागरिकों जैसा ही बर्ताव करेगी. अमेरिका ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी पासपोर्ट दिखाना या अमेरिका से कनेक्शन होना ही वहां गिरफ्तारी की वजह बन सकता है.

कौन से बॉर्डर खुले हैं और कहां है एंट्री?

अगर आप सड़क के रास्ते निकलना चाहते हैं, तो दूतावास ने इन रूट्स की जानकारी दी है:

आर्मेनिया: 5 फरवरी (गुरुवार) तक आगरक/नोरदुज (Agarak/Norduz) बॉर्डर खुला है. अमेरिकी नागरिकों को वहां 180 दिनों तक बिना वीजा रहने की अनुमति है.

तुर्की: गुरबुलक, कापिकोय और एसेंदेरे बॉर्डर खुले हैं. यहां 90 दिनों तक वीजा-फ्री एंट्री मिल सकती है.

तुर्कमेनिस्तान: यहां के बॉर्डर खुले तो हैं, लेकिन वहां जाने से पहले तुर्कमेनिस्तान सरकार से स्पेशल परमिशन लेनी होगी. इसके लिए अश्गाबात में मौजूद अमेरिकी दूतावास को ईमेल करना होगा.

अजरबैजान: यहां के जमीनी बॉर्डर आम ट्रैफिक के लिए बंद हैं. अगर कोई और रास्ता न बचे, तभी यहां का विकल्प चुनें, क्योंकि इसमें काफी समय लग सकता है.

ओमान में ‘फेस-टू-फेस’ बातचीत

एक तरफ तनाव है, तो दूसरी तरफ बातचीत की मेज भी सजी है. तेहरान टाइम्स और जेरूसलम पोस्ट की रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची ओमान की राजधानी मस्कट पहुंच चुके हैं. शुक्रवार को दोनों देशों के बीच न्यूक्लियर डील (Nuclear Talks) को लेकर सीधी बातचीत होनी है. जून में ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों के बाद यह पहला मौका है जब दोनों देशों के बड़े अधिकारी आमने-सामने होंगे.

बातचीत कहां अटक रही है?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के बीच एजेंडे को लेकर काफी मतभेद हैं:

अमेरिका चाहता है: न्यूक्लियर प्रोग्राम के साथ-साथ ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल प्रोग्राम और क्षेत्रीय गुटों को दिए जा रहे समर्थन पर भी बात हो.

ईरान की जिद: ईरान चाहता है कि बातचीत सिर्फ परमाणु गतिविधियों तक ही सीमित रहे.

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि ईरान पूरी ताकत के साथ अपनी बात रखेगा, ताकि एक सम्मानजनक समझौता हो सके. वहीं, अमेरिका ने साफ कर दिया है कि उसके पास ‘सारे विकल्प खुले’ हैं.

यह मीटिंग ऐसे समय में हो रही है जब ईरान में घरेलू विरोध प्रदर्शन और सैन्य तनाव चरम पर है. पश्चिमी देशों को चिंता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन (enrichment) को उस लेवल तक ले जा रहा है, जिससे परमाणु हथियार बनाना आसान हो जाए. ओमान, जो 1979 से दोनों देशों के बीच मध्यस्थ (mediator) रहा है, एक बार फिर इस बातचीत की मेजबानी कर रहा है.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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