इंटेलिजेंस फेलियर? पुरानी जानकारी के कारण ईरान के स्कूल को सैन्य अड्डा समझ बैठी US सेना

28 फरवरी को मिनाब में IRGC बेस पर अमेरिकी हमले के दौरान 'शजरे तय्यिबा' स्कूल मिसाइल की चपेट में आ गया था. (तस्वीर खोदी गई कब्र की है)
US Strike Iran School Intelligence Failure: ईरान के मिनाब में अमेरिकी मिसाइल हमले में 160 से ज्यादा बच्चों की मौत के पीछे बड़ी खुफिया चूक सामने आई है. जांच में खुलासा हुआ कि अमेरिकी डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी ने पुराने डेटा के आधार पर स्कूल को सैन्य अड्डा समझ लिया था. पेंटागन की इस गलती पर अब अमेरिका में ही सवाल उठ रहे हैं, जबकि ट्रंप ने अभी जिम्मेदारी तय करने से इनकार किया है.
US Strike Iran School Intelligence Failure: ईरान के मिनाब में 28 फरवरी को हुए एक मिसाइल हमले में एक प्राइमरी स्कूल पूरी तरह तबाह हो गया था. इस हमले में 168 से ज्यादा बच्चों और 14 शिक्षकों की मौत की खबर आई थी. सीएनएन और अन्य अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह हमला अमेरिका की ओर से हुआ था. जांच में सामने आया है कि अमेरिकी सेना ने जिस जगह को टारगेट किया था, वह असल में एक स्कूल था, लेकिन खुफिया एजेंसी ने उसे गलती से IRGC (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स) का बेस मान लिया था.
क्यों हुआ ये बड़ा हादसा?
शुरुआती जांच के अनुसार, अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) से मिले डेटा के आधार पर टारगेट तय किया था. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह डेटा काफी पुराना था. 2013 की सैटेलाइट तस्वीरों में स्कूल और IRGC बेस एक ही कंपाउंड का हिस्सा थे. लेकिन 2016 की तस्वीरों में साफ था कि वहां एक दीवार बनाकर स्कूल को बेस से अलग कर दिया गया था. दिसंबर 2025 की सैटेलाइट तस्वीरों में भी स्कूल के मैदान में बच्चों को खेलते हुए देखा जा सकता था. माना जा रहा है कि अमेरिकी सेना ने इन नए सबूतों को चेक ही नहीं किया.
क्या US मिसाइल ही थी जिम्मेदार?
ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी और अन्य एक्सपर्ट्स के एनालिसिस के मुताबिक, घटनास्थल से जो मिसाइल के टुकड़े मिले हैं, वे अमेरिकी ‘टोमाहॉक’ (Tomahawk) क्रूज मिसाइल के हैं. जानकारों का कहना है कि ये मिसाइल केवल अमेरिकी सेना के पास है, ईरान या किसी अन्य के पास ऐसे हथियार नहीं हैं. वीडियो फुटेज में IRGC बेस पर हमले के साथ ही पास के ‘शजरे तय्यिबा’ स्कूल से धुआं उठता हुआ साफ देखा गया था.
US प्रशासन और राष्ट्रपति का क्या कहना है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मामले में अनभिज्ञता (इग्नोरेंस) जताई है. जब उनसे पूछा गया कि क्या अमेरिका इस हमले की जिम्मेदारी लेगा, तो उन्होंने कहा कि मुझे इसके बारे में जानकारी नहीं है. हालांकि, बाद में उन्होंने कहा कि वे जांच के निष्कर्षों का पालन करेंगे. वहीं, पेंटागन के प्रवक्ता ने कहा कि मामला अभी जांच के अधीन है. अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने मामले की गहन जांच का वादा किया है और दावा किया कि अमेरिका हमेशा नागरिकों को नुकसान से बचाने की कोशिश करता है.
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वाशिंगटन में उठा विरोध
इस घटना के बाद अमेरिका के 45 से ज्यादा डेमोक्रेटिक सीनेटरों ने रक्षा सचिव को पत्र लिखकर कड़े सवाल पूछे हैं. उन्होंने पूछा है कि हमले से पहले किन-किन मापदंडों (assessments) की जांच की गई थी. साथ ही, अमेरिकी संसद में उन सरकारी प्रोग्राम्स में कटौती पर भी चिंता जताई गई है, जो मिलिट्री ऑपरेशन के दौरान नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाए गए थे.
ईरान का आरोप
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने इस हमले के लिए सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल को जिम्मेदार ठहराया है. दूसरी तरफ, इजरायल ने किसी भी तरह की संलिप्तता से साफ इनकार किया है. फिलहाल, इस पूरे मामले पर आधिकारिक जांच जारी है कि कैसे एक स्कूल को गलत खुफिया जानकारी के आधार पर युद्ध का अड्डा समझ लिया गया.
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लेखक के बारे में
By Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.
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