'ट्रंप की शक्तियों' पर US सीनेट का प्रहार, ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकने वाले प्रस्ताव को दी मंजूरी, क्या फर्क पड़ेगा?

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. फोटो- एक्स (@WhiteHouse).

US Senate Iran War Resolution: अमेरिका-ईरान तनाव के बीच अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य शक्तियों पर लगाम लगाने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इसकी वोटिंग के दौरान ट्रंप सरकार के खिलाफ उनकी पार्टी के नेताओं ने भी वोट दिया. लेकिन क्या इस रिजोल्यूशन के पास होने से ट्रंप सरकार पर कोई असर पड़ेगा?

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US Senate Iran War Resolution: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राजनीति में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य नीति को लेकर बड़ा टकराव सामने आया है. अमेरिकी सीनेट ने ईरान के खिलाफ आगे किसी भी सैन्य कार्रवाई को सीमित करने वाले प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. यह फैसला ऐसे समय आया है, जब ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ संभावित शांति समझौते को लेकर बातचीत भी कर रहा है.

सीनेट में 50-48 वोट से पास हुआ प्रस्ताव

अमेरिकी सीनेट ने मंगलवार को स्थानीय समय के अनुसार एक प्रस्ताव पर मतदान किया, जिसमें राष्ट्रपति ट्रंप से ईरान के साथ जारी संघर्ष में अमेरिकी सैन्य भागीदारी को सीमित करने की मांग की गई. प्रस्ताव के पक्ष में 50 वोट पड़े, जबकि 48 सांसदों ने इसका विरोध किया.

इस मतदान में ट्रंप की पार्टी के चार रिपब्लिकन सांसदों- रैंड पॉल, सुसान कॉलिन्स, लिसा मर्कोव्स्की और बिल कैसिडी ने डेमोक्रेट सांसदों के साथ मिलकर प्रस्ताव का समर्थन किया. वहीं डेमोक्रेट सांसद जॉन फेटरमैन ने प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया.

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, रिपब्लिकन सीनेटर मिच मैककॉनेल और डेव मैककॉर्मिक मतदान में मौजूद नहीं थे. दोनों पहले इस तरह के युद्ध शक्तियों से जुड़े प्रस्तावों को आगे बढ़ाने का विरोध कर चुके थे.

पहले प्रतिनिधि सभा में भी मिली थी मंजूरी

यह प्रस्ताव इससे पहले अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भी पारित हो चुका था. वहां इसे 215-208 वोट से मंजूरी मिली थी. प्रतिनिधि सभा में चार रिपब्लिकन सांसदों ने डेमोक्रेट्स के साथ मिलकर इसका समर्थन किया था.

इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर इस कदम की आलोचना की थी. उन्होंने प्रस्ताव का समर्थन करने वाले सांसदों को ‘ग्रैंडस्टैंडर्स’ बताया था और उनके कदम को ‘देशभक्ति के खिलाफ’ करार दिया था.

प्रस्ताव का मतलब क्या है?

यह प्रस्ताव अमेरिकी संविधान में कांग्रेस और राष्ट्रपति के बीच युद्ध शक्तियों के संतुलन से जुड़ा है. इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रपति बिना कांग्रेस की मंजूरी के किसी बड़े सैन्य संघर्ष को आगे न बढ़ा सकें.

हालांकि यह एक ‘कॉनकरेंट रिजॉल्यूशन’ है, इसलिए इसे राष्ट्रपति की मंजूरी की जरूरत नहीं है और यह कानून की तरह बाध्यकारी भी नहीं है.

व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने सीएनएन से बातचीत में कहा, ‘कॉनकरेंट रिजॉल्यूशन राष्ट्रपति के पास नहीं जाते और इनका कोई कानूनी प्रभाव नहीं होता.’

अधिकारी ने इसे मुख्य रूप से प्रतीकात्मक कदम बताया और कहा कि कुछ रिपब्लिकन सांसदों की अनुपस्थिति की वजह से यह प्रस्ताव पास हो पाया.

व्हाइट हाउस ने खारिज किया प्रभाव

ट्रंप प्रशासन का कहना है कि इस प्रस्ताव का सैन्य नीति पर कोई वास्तविक असर नहीं पड़ेगा. व्हाइट हाउस ने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सेना को ईरान के खिलाफ किसी संघर्ष से हटाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि उसके अनुसार ‘7 अप्रैल को युद्धविराम के साथ ही शत्रुता समाप्त हो चुकी है.’

हालांकि प्रस्ताव को आगे बढ़ाने वाले एक डेमोक्रेटिक सहयोगी ने इस दावे से असहमति जताई. उनका कहना है कि प्रस्ताव का प्रभाव होगा और अगर इसे लेकर विवाद पैदा होता है तो मामला कानूनी लड़ाई तक जा सकता है.

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कांग्रेस में बढ़ रही चिंता

सीनेट में यह मतदान दिखाता है कि ईरान के मुद्दे पर अमेरिकी संसद में चिंता बढ़ रही है. कई सांसदों को डर है कि बिना कांग्रेस की मंजूरी के राष्ट्रपति के पास सैन्य कार्रवाई का अधिकार बहुत अधिक बढ़ सकता है और इससे मध्य पूर्व में तनाव और गहरा सकता है.

सीएनएन के अनुसार, इस साल की शुरुआत से अब तक सीनेट ईरान से जुड़े युद्ध शक्तियों के प्रस्तावों पर 10 बार मतदान कर चुकी है. पिछले महीने भी ऐसा ही एक प्रस्ताव आगे बढ़ा था, लेकिन उस पर अंतिम मतदान नहीं हुआ.

ट्रंप प्रशासन और ईरान के बीच बातचीत जारी

सीनेट के फैसले के बावजूद अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक प्रयास जारी हैं. ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति के डिजिटल सिग्नेचर के बाद, स्विट्जरलैंड में जेडी वेंस और ईरानी अधिकारियों ने पीस डील को लागू करवाने के लिए चर्चा की. हालांकि इन वार्ताओं की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है.

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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