इतिहास बदल कर दुनिया को गुमराह करने में जुटा पाकिस्तान, अब 'सिंधु घाटी सभ्यता' के सहारे पानी पर ठोक रहा दावा

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सांकेतिक फोटो, PHOTO AI

Pakistan Indus Valley: पाकिस्तान रह-रहकर दुनिया के सामने गिरगिट की तरह अपना रंग बदलता रहता है. जो देश अपना इतिहास 712 ई. में मुस्लिम आक्रमणकारी मोहम्मद बिन कासिम की सिंध विजय से शुरू मानता था, वह अचानक 5,000 साल पुरानी 'सिंधु घाटी सभ्यता' (Indus Valley Civilisation) के प्रेम में पड़ गया है.

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Pakistan Indus Valley: पाकिस्तान अब खुद को सिंधु नदी का असली मालिक साबित करने के लिए इतिहास को ढाल बना रहा है. हड़प्पा और मोहनजोदड़ो को लेकर पाकिस्तान का यह नया नैरेटिव कोई सांस्कृतिक प्रेम नहीं, बल्कि भारत के खिलाफ एक सोची-समझी अंतरराष्ट्रीय साजिश है. दरअसल पहलगाम हमले के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते (Indus Waters Treaty) को स्थगित कर दिया है, जिससे पाकिस्तान बिलबिला उठा है.

ऑपरेशन सिंदूर से सहमा पाकिस्तान, जून 2025 में अचानक मोहनजोदड़ो में खुदाई शुरू कर दी

पहलगाम आतंकवादी हमले में 26 बेगुनाह नागरिकों की हत्या का बदला भारत ने ऑपरेशन सिंदूर चलाकर लिया था. उसी दौरान सिंधु जल समझौते को ठंडे बस्ते (Abeyance) में डाल दिया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साफ शब्दों में चेतावनी दी थी कि खून और पानी एक साथ नहीं बह सकते. भारत के इस कड़े फैसले के ठीक कुछ महीने बाद, जून 2025 में पाकिस्तान ने आनन-फानन में मोहनजोदड़ो में नए सिरे से खुदाई शुरू कर दी. बता दें कि 1965 के बाद से इस ऐतिहासिक स्थल को लगभग अछूता छोड़ दिया गया था, लेकिन भारत की पानी की नाकेबंदी से घबराए पाकिस्तान को अचानक अपनी इस प्राचीन विरासत की याद आ गई.

बिलावल भुट्टो ने खेला सभ्यता का कार्ड, युद्ध की धमकी दी

पाकिस्तान की इस चाल को वहां के नेताओं के बयानों से आसानी से समझा जा सकता है. पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के प्रमुख बिलावल भुट्टो जरदारी ने भारत के विरोध में सीधे तौर पर सभ्यतागत दावा ठोक दिया है. बिलावल ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तर्क दिया कि चूंकि मोहनजोदड़ो पाकिस्तान में है, इसलिए पाकिस्तान ही सिंधु नदी का असली संरक्षक और रक्षक है और इस पानी पर उसका ऐतिहासिक अधिकार है. वहीं, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ समेत कई नेता भारत के खिलाफ जहर उगल रहे हैं और पानी के मुद्दे पर युद्ध तक की धमकियां दे रहे हैं.

तक्षशिला और गांधार पर भी नजर, मिटाया जा रहा कासिम का नाम

पाकिस्तान की हाइब्रिड (नागरिक-सैन्य) सरकार और वहां के बुद्धिजीवी अब केवल सिंधु घाटी ही नहीं, बल्कि तक्षशिला और गांधार जैसी इस्लाम-पूर्व (Pre-Islamic) बौद्ध और हिंदू विरासतों को भी अपनी राष्ट्रीय पहचान के रूप में चमकाने में जुटे हैं. भारत को पानी के मोर्चे पर घेरने और खुद को इस जमीन का मूल निवासी साबित करने के लिए पाकिस्तान अपने ही पुराने इस्लामिक इतिहास के नैरेटिव को पीछे छोड़ने को तैयार हो गया है.

ये भी पढ़ें: पानी के लिए भारत से युद्ध करेगा पाकिस्तान, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ की धमकी

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ArbindKumar Mishra

लेखक के बारे में

By ArbindKumar Mishra

अरबिंद कुमार मिश्रा वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में एक अनुभवी पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अप्रैल 2011 से संस्थान का हिस्सा रहे अरबिंद के पास पत्रकारिता के क्षेत्र में बतौर रिपोर्टर और डेस्क एडिटर 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वह नेशनल और इंटरनेशनल डेस्क की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. विशेषज्ञता और अनुभव अरबिंद की लेखनी में खबरों की गहराई और स्पष्टता है. उनकी मुख्य विशेषज्ञता इन क्षेत्रों में है. राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मामले: वैश्विक राजनीति और देश की बड़ी घटनाओं पर पैनी नजर. खेल पत्रकारिता: झारखंड में आयोजित 34वें नेशनल गेम्स से लेकर JSCA स्टेडियम में हुए कई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैचों की ग्राउंड रिपोर्टिंग का अनुभव. झारखंड की संस्कृति: राज्य की कला, संस्कृति और जनजातीय समुदायों की समस्याओं और उनकी जीवनशैली पर विशेष स्टोरीज. पंचायतनामा: ग्रामीण विकास और जमीनी मुद्दों पर 'पंचायतनामा' के लिए विशेष ग्राउंड रिपोर्टिंग. करियर का सफर प्रभात खबर डिजिटल से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अरबिंद ने पत्रकारिता के हर आयाम को बखूबी जिया है. डिजिटल मीडिया की बारीकियों को समझने से पहले उन्होंने आकाशवाणी (All India Radio) और दूरदर्शन जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में एंकरिंग के जरिए अपनी आवाज और व्यक्तित्व की छाप छोड़ी है. शिक्षा और योग्यता UGC NET: अरबिंद मिश्रा ने यूजीसी नेट (UGC NET) उत्तीर्ण की है. मास्टर्स (MA): रांची यूनिवर्सिटी के जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग से एमए की डिग्री. ग्रेजुएशन: रांची यूनिवर्सिटी से ही मास कम्युनिकेशन एंड जर्नलिज्म में स्नातक.

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