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'बिना लड़े ही मान ली हार', राष्ट्रपति जो बाईडेन ने अशरफ गनी पर फोड़ा ठीकरा, ट्रंप ने बताया सबसे बड़ी पराजय

Updated at : 17 Aug 2021 8:37 AM (IST)
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'बिना लड़े ही मान ली हार', राष्ट्रपति जो बाईडेन ने अशरफ गनी पर फोड़ा ठीकरा, ट्रंप ने बताया सबसे बड़ी पराजय

Taliban, America, Afghanistan: बाईडेन प्रशासन में कई प्रमुख लोगों ने भी माना है कि, अफगान सुरक्षा बलों के तेजी से हारने से वे अचंभे में हैं क्योंकि उन्होंने ऐसा अनुमान नहीं लगाया था. वहीं, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी हार करार दिया है.

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Taliban, America, Afghanistan: अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने देश को संबोधित किया. संबोधन में उन्होंने अचरज जताते हुए कहा कि बड़ी तेजी से अफगानिस्तान के हालात बदल गए. हालांकि, उन्होंने कहा है कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी. अफगान सरकार का तेजी से पतन और वहां फैली अराजकता कमांडर इन चीफ के रूप में बाइडन के लिए एक गंभीर परीक्षा की तरह है.

बता दें, बाईडेन प्रशासन में कई प्रमुख लोगों ने भी माना है कि, अफगान सुरक्षा बलों के तेजी से हारने से वे अचंभे में हैं क्योंकि उन्होंने ऐसा अनुमान नहीं लगाया था. वहीं, काबुल हवाई अड्डे पर छिटपुट गोलीबारी की खबरों ने अमेरिकियों को शरण लेने पर मजबूर किया जो उड़ानों की प्रतीक्षा कर रहे थे. विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने अफगान सेना का जिक्र करते हुए सीएनएन को बताया, “हमने देखा कि बल देश की रक्षा करने में असमर्थ है और यह हमारे पूर्वानुमान से बहुत ज्यादा जल्दी हुआ है. वहीं, पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि, तालिबान का विरोध किए बिना काबुल का पतन होना अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी हार है.

इधर, वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में भी बताया गया है कि अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे का सबसे बड़ा कारण अफगान नेता हैं. जिन्होंने तालिबान से समझौता करके अफगानिस्तान का भविष्य उसे सौंप दिया. सरकारी भ्रष्टाचार और अक्षम नेतृत्व भी इसकी सबसे बड़ी वजह रही. सरकार समर्थक मिलिशिया बलों की भर्ती को अफगान अफसरों ने कमाई का जरिया बना लिया था.

राष्ट्रीय सुरक्षा निदेशालय के पूर्व प्रमुख रहमतुल्ला नबील के मुताबिक, सरकार के भीतर कुछ हलकों ने वेतन को जेब में रखने के लिए घोस्ट यानी जिनका अस्तित्व ही नहीं है ऐसे मिलिशिया समूह बनाये. सरकार की तरफ से 1,000 स्थानीय मिलिशिया के लिए पैसे भेजे जाते और भ्रष्टाचारी केवल 200 को ही काम पर रखकर बाकी पैसे को गटक जाते. अफसरों और नेताओं के गठजोड़ ने अफगान पुलिस का भी हौसला तोड़ दिया और उसे महीनों तक तनख्वाह के लिए भटकाया. यही नहीं जो अफगान सेना तालिबान से लड़ रही थी उसे खाने-पीने, हथियार तक के लिए मोहताज कर दिया.

यूरोपीय संघ के विदेश मंत्री आज करेंगे आपात बैठक: यूरोपीय संघ (इयू) के विदेश मंत्रीगण अफगानिस्तान से राष्ट्रपति के देश छोड़ देने औ राजधानी काबुल पर तालिबान के काबिज हो जाने के बाद वहां के संकट पर चर्चा करने के लिए आज आपात बैठक करेंगे. इयू के विदेश नीति प्रमुख जोसेफ बोरेल ने सोमवार को ट्वीट किया कि उन्होंने असाधारण वीडियो-कॉन्फ्रेंस सम्मेलन बुलाने का फैसला किया है ताकि मंत्री वहां के घटनाक्रम पर ‘प्रथम आकलन’ कर पायें.

बोरेल ने कहा कि अफगानिस्तान दोराहे पर खड़ा है और उसके नागरिकों का कल्याण एवं अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा दांव पर है. बोरेल ने कहा कि यूरोपीय राष्ट्र इस तख्तापलट से हक्काबक्का हैं. वे अपने दूतावास के कर्मियों को निकालने में लगे हैं. यूरोपीय संघ का काबुल में एक छोटा से राजनयिक मिशन है. वह अफगानिस्तान के सबसे बड़े दानकर्ताओं में से एक है.

भाषा इनपुट के साथ

Posted by: Pritish Sahay

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