ईरान पर 'फाइनल स्ट्राइक' की तैयारी, सेंटकॉम ट्रंप को सौंपेगा नया ब्लूप्रिंट; होर्मुज और न्यूक्लियर ठिकानों पर नजर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप. इमेज- एक्स/@WhiteHouse
US-Iran Military Strike Plan: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है. राष्ट्रपति ट्रंप अब 'आर्थिक घेराबंदी' के बाद सैन्य एक्शन की तैयारी में हैं. इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण और परमाणु ठिकानों को सुरक्षित करने जैसे कड़े कदम शामिल हो सकते हैं. जानिए क्या है सेंटकॉम का नया मिलिट्री प्लान और क्यों तेहरान झुकने को तैयार नहीं.
US-Iran Military Strike Plan: एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, सेंटकॉम (CENTCOM) कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ईरान के खिलाफ नए मिलिट्री ऑप्शंस की जानकारी देंगे. अमेरिका अब ईरान पर एक निर्णायक हमला करने का मन बना रहा है क्योंकि दोनों देशों के बीच चल रहा सीजफायर अब बेअसर होता दिख रहा है. एक्सियोस के मुताबिक, सेंटकॉम ने ईरान के बुनियादी ढांचे (इंफ्रास्ट्रक्चर) पर ‘छोटे लेकिन शक्तिशाली’ हमलों की योजना बनाई है ताकि मौजूदा गतिरोध को तोड़ा जा सके.
सेंटकॉम (CENTCOM) अमेरिकी सेना का वह प्रमुख कमांड है जो मध्य पूर्व, मध्य एशिया और दक्षिण एशिया के कुछ हिस्सों में सुरक्षा और सैन्य अभियानों की जिम्मेदारी संभालता है.
होर्मुज पर कब्जा करने का मिशन
इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिकी सेना के पास दो और बड़े प्लान हैं. पहला प्लान होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) पर पूरी तरह कंट्रोल करना है ताकि वहां से कमर्शियल जहाजों का रास्ता साफ रहे. दूसरा प्लान स्पेशल फोर्सेज का एक ऑपरेशन है, जिसका मकसद ईरान के संवर्धित यूरेनियम के भंडार को अपने कब्जे में लेना है. गुरुवार को होने वाली इस ब्रीफिंग में ज्वाइंट चीफ्स चेयरमैन जनरल डैन केन भी मौजूद रहेंगे.
ट्रंप की दो टूक: बमबारी से बेहतर है ब्लॉकेड
एक्सियोस को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने साफ कर दिया कि ईरान के खिलाफ समुद्री घेराबंदी (ब्लॉकेड) जारी रहेगी. ट्रंप ने कहा कि बमबारी से ज्यादा असरदार यह ब्लॉकेड है, जिससे ईरान की हालत खराब हो रही है. उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान को न्यूक्लियर हथियार बनाने की इजाजत बिल्कुल नहीं दी जाएगी. ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को भी ठुकरा दिया जिसमें होर्मुज खोलने और ब्लॉकेड हटाने के बाद बातचीत की बात कही गई थी. ट्रंप चाहते हैं कि कोई भी राहत देने से पहले ईरान अमेरिकी चिंताओं को दूर करे.
ईरान का सख्त रुख: झुकने को तैयार नहीं तेहरान
इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) की स्टडी के अनुसार, ईरान अब झुकने के मूड में नहीं है. आईआरजीसी (IRGC) चीफ मेजर जनरल अहमद वाहिदी का सख्त रुख तेहरान में हावी है. स्टडी कहती है कि ईरान होर्मुज और अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम पर कोई समझौता नहीं करना चाहता. वहां के नेता भी इस बात पर सहमत हैं कि जब तक अमेरिका समुद्री घेराबंदी नहीं हटाता, तब तक न्यूक्लियर मुद्दे पर कोई बात नहीं होगी.
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ओमान के साथ मिलकर ईरान की नई चाल
ISW की एनालिसिस के मुताबिक, ईरान अब होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने हक को जायज ठहराने के लिए ओमान को साथ लेने की कोशिश कर रहा है. वह जहाजों से टैक्स वसूलने की योजना बना रहा है ताकि अपनी शर्तों से समझौता किए बिना अमेरिका के सामने इसे एक ‘नए प्रस्ताव’ के रूप में पेश कर सके. उधर, राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिकी नौसेना की घेराबंदी को ‘शानदार’ बताया है और कहा है कि जब तक ईरान न्यूक्लियर महत्वाकांक्षा नहीं छोड़ता, तब तक कोई समझौता मुमकिन नहीं है.
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लेखक के बारे में
By Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.
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