19 C
Ranchi

लेटेस्ट वीडियो

मुस्लिम दुनिया का फिर से ‘खलीफा’ बनने चला था तुर्की, दुम दबाकर हुआ बाहर, तालिबान ने बिगाड़ा पाकिस्तान का काम 

Turkey Pulls Out of Pakistan-Afghanistan Mediation Talks: तुर्की ने पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच मध्यस्ता से खुद को बाहर कर लिया है. इस्लामाबाद और काबुल के बीच बढ़ता तनाव इसका सबसे बड़ा कारण है. अंकारा की ओर से किए गए बार-बार के प्रयास पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच जमे गहरे मतभेदों को दूर करने में नाकाम रहे.

Turkey Pulls Out of Pakistan-Afghanistan Mediation Talks: पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने की अंतरराष्ट्रीय कोशिशों को बड़ा झटका लगा है. लंबे समय से चल रही मध्यस्थता प्रक्रिया के ठप पड़ने के बाद अब क्षेत्रीय कूटनीति में नए सिरे से अनिश्चितता गहराती नजर आ रही है. शीर्ष सुरक्षा और कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान-अफगानिस्तान विवाद में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा तुर्की अब खुद को इस प्रक्रिया से अलग कर चुका है. अंकारा की ओर से किए गए बार-बार के प्रयास इस्लामाबाद और अफगान तालिबान के बीच जमे गहरे मतभेदों को दूर करने में नाकाम रहे.

तुर्की की पहल पर कतर और सऊदी अरब की मौजूदगी में कई दौर की बातचीत आयोजित की गई, लेकिन किसी भी बैठक से ठोस नतीजा नहीं निकल सका. काबुल ने पाकिस्तान की उन शर्तों को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिन्हें उसने व्यापक शांति समझौते के लिए अस्वीकार्य और “अवैध” बताया. इसके बाद तुर्की अधिकारियों ने औपचारिक रूप से इस्लामाबाद को सूचित किया कि अफगान नेतृत्व पाकिस्तान की प्रमुख सुरक्षा मांगों को मानने को तैयार नहीं है. न्यूज-18 की खबर के मुताबिक, इसी आधार पर अंकारा ने आगे मध्यस्थता जारी न रखने का निर्णय लिया.

इस गतिरोध की मुख्य वजह पाकिस्तान की वे मांगें हैं, जिनमें अफगान तालिबान से तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के कट्टरपंथी आतंकियों को सौंपने, डूरंड रेखा के साथ 5 किलोमीटर चौड़ा बफर जोन बनाने, अफगान ट्रांजिट व्यापार और माल की आवाजाही पर कड़ी निगरानी लगाने, काबुल पर इस्लामाबाद की सुरक्षा प्राथमिकता को स्वीकार कराने और पाकिस्तान से अफगान शरणार्थियों की तत्काल वापसी शामिल हैं. 

अफगान अधिकारियों का कहना है कि ये मांगें सीधे तौर पर देश की संप्रभुता पर आघात करती हैं, इसलिए इन्हें स्वीकार नहीं किया जा सकता. रिपोर्ट के अनुसार, अफगान तालिबान ने तुर्की, कतर और सऊदी अरब, तीनों को साफ संदेश दिया है कि अफगानिस्तान किसी भी तरह के दबाव में बनाए गए समझौतों का हिस्सा नहीं बनेगा. तुर्की की निरंतर कूटनीतिक कोशिशों के बावजूद पाकिस्तान मध्यस्थता प्रक्रिया के दौरान तालिबान से किसी तरह की लिखित प्रतिबद्धता हासिल नहीं कर पाया.

पाकिस्तान ने रात के अंधेर में किए हवाई हमले

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच अक्टूबर, 2025 में बॉर्डर इलाके में तीखी झड़प हुई थी, जब इस्लामाबाद ने काबुल के ऊपर हवाई हमला किया था. उसका दावा था कि टीटीपी के कमांडर नूर वली महसूद को निशाना बनाया गया है, लेकिन बाद में वह जिंदा निकला, जबकि इस हमले में कई लोग मारे गए. इसके बाद दो बार और पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के अंदर ड्रोन हमले किए, जिसमें एक हमले में एक क्रिकेटर और दूसरे हमले में 9 लोग मारे गए, जिनमें 5 बच्चे भी शामिल थे. पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में सभी हवाई हमले रात में ही किए थे.

कतर में भी नहीं बात

बॉर्डर को लेकर शुरू हुए मामले में तुर्की में बात नहीं बनी, तो दोनों देशों ने कतर में समझौता करने की कोशिश की. हालांकि यहां भी मामला सुलझ नहीं सका. रिपोर्ट के अनुसार, अब मध्यस्थ देशों के बीच भी मतभेद सामने आने लगे हैं. वरिष्ठ पाकिस्तानी राजनयिकों का कहना है कि कतर की भूमिका को लेकर इस्लामाबाद का भरोसा कमजोर पड़ा है और आरोप हैं कि दोहा धीरे-धीरे अफगान तालिबान के रुख के करीब जाता दिख रहा है. सूत्रों के अनुसार, अब पाकिस्तान सऊदी अरब को ही दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव कम करने और बातचीत को आगे बढ़ाने का आखिरी व्यवहारिक रास्ता मान रहा है.

तालिबान को हड़का रहा पाकिस्तान

इस बीच पाकिस्तान ने अपना रुख और सख्त कर लिया है. सुरक्षा सूत्रों के मुताबिक, इस्लामाबाद ने इस्तांबुल को साफ तौर पर सूचित किया है कि अफगान जमीन से पाकिस्तान को निशाना बनाकर किया गया कोई भी बड़ा आतंकी हमला सीधे काबुल की जिम्मेदारी माना जाएगा. पाकिस्तान ने दोहराया है कि वह अपने नागरिकों की सुरक्षा, संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा.

पाकिस्तान ने लगाया आरोप तो मिली लताड़

शीर्ष सुरक्षा सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान ने एक स्पष्ट और कठोर संदेश दे दिया है कि अगर सीमा पार आतंकवाद पर रोक नहीं लगी, तो वह अफगानिस्तान के भीतर कार्रवाई करने के लिए भी तैयार है. वहीं बीते दिन पाकिस्तान सेना के डीजी आईएसपीआर अहमद शरीफ चौधरी ने आरोप लगा दिया कि भारत और अफगानिस्तान मिलकर पाकिस्तान के खिलाफ हमले कर रहे हैं. इस पर तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पाकिस्तान आर्मी को अपने घर पर ध्यान देना चाहिए. उन्होंने सेना पर तंज कसते हुए यह भी कहा कि वह न तो प्रोफेशनल है और न ही जिम्मेदार. 

तुर्की का टूट रहा सपना

वहीं तुर्की का सपना भी टूटता बिखरता नजर आ रहा है. वह दुनिया के हर मामले में अपनी राय देता है, विशेषकर मुस्लिम देशों के मामले में. पाकिस्तान की सेना को मदद करने के अलावा उसका हाथ बांग्लादेश तक भी फैल रहा है, लेकिन गाजा से लेकर सोमालीलैंड तक अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिशों में जुटे तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन को बड़ा झटका लगा है. पाकिस्तान और तालिबान के बीच बढ़ते टकराव में खुद को प्रभावशाली मध्यस्थ के तौर पर पेश करने की तुर्की की रणनीति नाकाम हो गई है और अंकारा को उल्टे पांव पीछे हटना पड़ा है.

भारत से बढ़ रही तालिबान की नजदीकी

वहीं अफगानिस्तान और पाकिस्तान का तनाव इस समय अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है. पाकिस्तान द्वारा किए गए हवाई हमलों के बाद तालिबान ने कड़ा रुख अपनाया है, जिसके चलते दोनों देशों के बीच सीमा पर व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है. इसका सीधा असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ा है और उसे करोड़ों डॉलर का नुकसान झेलना पड़ रहा है. वहीं तालिबान भारत के साथ अपने संबंध बढ़ा रहा है. अफगानिस्तान अब ईरान में भारत द्वारा विकसित चाबहार पोर्ट का इस्तेमाल कर रहा है, जिससे कराची पोर्ट पर उसकी निर्भरता लगभग खत्म हो गई है. तालिबान ने भारत से दवाओं का आयात शुरू कर दिया है और भारत से दवाओं की खेप अफगानिस्तान पहुंचने लगी है. इसका सीधा असर पाकिस्तानी व्यापारियों पर पड़ा है, जिन्हें इस बदलाव से बड़ा झटका लगा है. 

बीते दिनों एक महीने के भीतर ही अफगान तालिबान के तीन बड़े मंत्री भारत आए थे. इनमें विदेश मंत्री अमीर खान मुत्तकी भी शामिल थे. आपको बता दें कि पाकिस्तान ने काबुल पर हमला इनकी यात्रा के दौरान ही किया था. भारत ने अफगानिस्तान के विकास में हमेशा मदद का हाथ बढ़ाया है. दोनों देश अफगानिस्तान के पानी की समस्या हल करने के लिए डैम और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर साथ आगे बढ़ने की दिशा में हैं.

ये भी पढ़ें:-

सऊदी अरब का कर्ज नहीं चुका पा रहा पाकिस्तान, बदले में देगा JF-17 फाइटर जेट, कंगाली में हुई डील?

बांग्लादेश को JF-17 ही नहीं, मुश्शाक एयरक्राफ्ट भी बेचेगा पाकिस्तान, इस्लामाबाद में हुई मीटिंग में डील डन!

बेला बनी मेरिनेरा, रूस का झंडा लगाकर 2 हफ्ते तक समंदर में भागी-छिपी, लेकिन अमेरिका ने धर दबोचा; बढ़ा तनाव

Anant Narayan Shukla
Anant Narayan Shukla
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

संबंधित ख़बरें

Trending News

जरूर पढ़ें

वायरल खबरें

ऐप पर पढें
होम आप का शहर
News Snap News Reel