पैसा नहीं वफादारी चाहिए... ईरान युद्ध में साथ न देने पर ट्रंप ने NATO को सुनाया, तो रूटे ने गिनाए अहसान; कहा- पूरे यूरोप से...
मार्क रूटे और डोनाल्ड ट्रंप. फोटो- स्क्रीनग्रैब.
Trump Slams NATO: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई में नाटो देशों के समर्थन नहीं देने पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि अमेरिका को यूरोप का पैसा नहीं चाहिए बल्कि वफादारी चाहिए. इस पर NATO प्रमुख मार्क रूटे ने सहयोगियों के योगदान का बचाव किया.
Trump Slams NATO: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने नाटो सहयोगी देशों पर नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी कार्रवाई के दौरान उन्हें गठबंधन के देशों से अपेक्षित समर्थन नहीं मिला. ट्रंप ने नाटो महासचिव मार्क रूटे के साथ व्हाइट हाउस में हुई मुलाकात के दौरान यह बात कही. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई अपने दम पर की, लेकिन अगर नाटो सहयोगी मदद की पेशकश करते तो उन्हें अच्छा लगता. अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को नाटो से पहले सलाह किए बिना ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई की थी. इसके बाद कई यूरोपीय सहयोगियों ने इस अभियान की जरूरत और तरीके पर सवाल उठाए थे.
व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, ‘हमें निराश किया गया. हमें इस मामले में बिल्कुल मदद की जरूरत नहीं थी. हमने सचमुच पहले ही हफ्ते में ईरान को पूरी तरह तबाह कर दिया, लेकिन अच्छा होता अगर उन्होंने (यूरोपीय देश) कहा होता कि ‘हम मदद करना चाहते हैं.” जब उनसे पूछा गया कि क्या यूरोपीय देशों ने अमेरिका के ईरान ऑपरेशन में समर्थन किया था, तो ट्रंप ने जवाब दिया, ‘उन्होंने ऐसा नहीं किया.’
कई नाटो देशों पर ट्रंप ने साधा निशाना
बैठक के दौरान ट्रंप ने कई नाटो सहयोगी देशों की आलोचना की. उन्होंने खास तौर पर स्पेन का नाम लेते हुए कहा, ‘स्पेन बहुत खराब है. मैं इटली से निराश था. मैं ब्रिटेन से निराश था. हम जर्मनी और फ्रांस से भी निराश थे. हम ज्यादातर देशों से निराश हैं. वे कुछ भी भुगतान नहीं करना चाहते. उन्हें लगता है कि वे मुफ्त में फायदा उठा सकते हैं.’
ट्रंप बोले- मुझे सहयोगियों से सिर्फ वफादारी चाहिए
जब एक पत्रकार ने पूछा कि वह नाटो सहयोगियों से क्या चाहते हैं, तो ट्रंप ने कहा, ‘मुझे सिर्फ वफादारी चाहिए. हमें उनके पैसे की जरूरत नहीं है, हमें किसी चीज की जरूरत नहीं है. हमारे पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है.’
ट्रंप ने आगे कहा, ‘हम हमेशा उनके लिए लड़ते हैं. यूरोप में हमारे हजारों सैनिक हैं. जर्मनी में हमारे 50 हजार सैनिक हैं. फिर आप कहते हैं कि हमें थोड़ा धक्का दें, थोड़ा साथ दें. हमें ज्यादा कुछ नहीं चाहिए. लेकिन वे कहते हैं- नहीं, हम ऐसा नहीं कर सकते.’ उन्होंने कहा कि जर्मनी, ब्रिटेन और पूरे यूरोप में तैनात अमेरिकी सैनिक नाटो सहयोगियों की सुरक्षा के लिए मौजूद हैं.
नाटो प्रमुख मार्क रूटे ने किया सहयोगियों का बचाव
वहीं नाटो महासचिव मार्क रूटे ने ट्रंप की बातों का जवाब देते हुए कहा कि यूरोपीय सहयोगी अमेरिका के साथ खड़े रहे हैं. रूटे ने कहा कि ईरान की परमाणु क्षमता का बढ़ना केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरा था. नाटो प्रमुख ने ईरान के खिलाफ ट्रंप की भूमिका की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह सिर्फ अमेरिका तक सीमित मुद्दा नहीं था.
रूटे ने बताया कि इस अभियान के दौरान यूरोप में मौजूद अमेरिकी ठिकानों से 4 हजार से 5 हजार अमेरिकी विमान उड़ान भर चुके थे. उन्होंने कहा कि रोमानिया के बुखारेस्ट एयरपोर्ट को व्यावसायिक उड़ानों के लिए बंद करना पड़ा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आप अपने टैंकर विमानों को हवा में भेज सकें. कुछ अलग-अलग मामले जरूर हैं, जिनसे आप निराश हैं, लेकिन सामान्य तौर पर आपके यूरोपीय सहयोगी आपके साथ खड़े रहे हैं.’
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रूटे ने बताया ‘ट्रंप ट्रिलियन’, रक्षा खर्च बढ़ाने का दावा
मार्क रूटे ने यूरोपीय देशों और कनाडा की बढ़ी हुई रक्षा खर्च योजनाओं को ‘ट्रंप ट्रिलियन’ नाम दिया. बातचीत के दौरान वह अपनी सीट से खड़े हुए और बोर्ड पर उन्होंने पाई चार्ट और बार ग्राफ दिखाए. उन्होंने कहा कि ट्रंप के पहली बार सत्ता में आने के बाद से यूरोप और कनाडा ने रक्षा क्षेत्र में करीब 1.2 ट्रिलियन डॉलर अतिरिक्त खर्च जोड़ा है. इसके अलावा अमेरिकी रक्षा कंपनियों के साथ सैकड़ों अरब डॉलर के ऑर्डर भी किए गए हैं. रूटे ने कहा कि यह आंकड़े दिखाते हैं कि नाटो धीरे-धीरे अमेरिका के साथ रक्षा बोझ साझा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है.
ट्रंप का यह बयान नाटो नेताओं की बैठक से पहले आया है. यह सम्मेलन 7-8 जुलाई को तुर्की के अंकारा में आयोजित होना है, जिसमें गठबंधन के 32 सदस्य देशों के प्रमुख शामिल होंगे.
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By Anant Narayan Shukla
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