नाटो देशों पर फिर भड़के ट्रंप, बताया- कागजी शेर, कभी नहीं भूलेगा अमेरिका

Updated at : 07 Apr 2026 12:51 PM (IST)
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Trump On NATO

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, फोटो- पीटीआई

Trump On NATO: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध में साथ न देने के लिए NATO सहयोगियों पर हमला बोला है. उन्होंने नाटो को एक बार फिर कागजी शेर कहा है. ट्रंप ने यह बात ऐसे समय में कही है कि जब इसी सप्ताह नाटो के चीफ मार्क रुटे वॉशिंगटन आने वाले हैं.

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Trump On NATO: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर अटलांटिक सं‍धि संगठन (NATO) पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने आरोप लगाया कि ईरान युद्ध के दौरान उनकी किसी भी नाटो देश ने मदद नहीं की. यहां तक की दक्षिण कोरिया, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे मित्र देशों ने भी अमेरिका की मदद को आगे नहीं आये. व्हाइट हाउस में मीडिया से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि ईरान युद्ध ने उनपर गहरा प्रभाव छोड़ा है, जो उनके दिमाग से कभी नहीं जाएगा. ट्रंप ने यह बात ऐसे समय में कही है जब नाटो के महासचिव मार्क रूट वाशिंगटन दौरे पर आने वाले हैं.

बोले ट्रंप- सभी देशों ने कहा नहीं- हम मदद नहीं करेंगे

अमेरिकी राष्ट्रपति ने मीडिया के सामने कहा- हम नाटो के पास गए. मैंने बहुत जोर नहीं दिया, बस इतना कहा- अगर आप मदद करना चाहें तो अच्छा होगा.” लेकिन सभी ने एक ही जवाब दिया नहीं, नहीं, हम मदद नहीं करेंगे. नाटो और अपने मित्र देशों पर भड़ास निकालते हुए ट्रंप ने कहा- नाटो एक कागजी शेर है, जिससे व्लादिमीर पुतिन भी नहीं डरते. ईरान युद्ध में नाटो सदस्य देशों ने जानबूझकर मदद नहीं की.

ट्रंप ने बताया कब शुरु हुआ नाटो से विवाद

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान युद्ध से उन्हें कभी सबक मिला है. इसका उनपर गहरा प्रभाव पड़ा है, जो उनके दिमाग से कभी नहीं जाएगा. उन्होंने मीडिया से बात करते हुए यह भी बताया कि नाटो से विवाद कब शुरू हुआ. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और नाटो के बीच मतभेद तब शुरू हुए जब उनका ग्रीनलैंड को अपने नियंत्रण में लेने का प्रस्ताव ठुकरा दिया गया. ट्रंप ने इसे नाटो की विश्वसनीयता पर बड़ा झटका बताया और कहा कि यह घटना उनकी नजर में नाटो के साथ संबंधों का अहम मोड़ है.

नाटो सदस्य देश अब करना चाहते हैं मदद- ट्रंप

ट्रंप ने कहा कि अब जब अमेरिका युद्ध जीत चुका है, तो नाटो देश उनसे मिलने और मदद की पेशकश करने आ रहे हैं. उन्होंने कहा- “वे बुधवार को मुझसे मिलने आ रहे हैं,” और अब अचानक मदद भेजना चाहते हैं. ट्रंप ने यह भी बताया कि जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया ने कोई मदद नहीं की, जबकि अमेरिका ने जापान में 50 हजार और दक्षिण कोरिया में 45 हजार सैनिक तैनात कर रखे हैं, ताकि इन देशों को खतरों से बचाया जा सके.

ट्रंप ने खारिज की अपनी आलोचना

ईरान युद्ध खत्म करने के लिए समझौता न होने और आपत्तिजनक भाषा इस्तेमाल करने को लेकर हो रही आलोचनाओं को ट्रंप ने खारिज कर दिया. उन्होंने कहा- मुझे आलोचकों की परवाह नहीं है. ट्रंप की मानसिक स्थिति की जांच की मांग पर उन्होंने कहा कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं सुना. दरअसल, ईस्टर संडे पर उनके पोस्ट पर काफी आलोचना हुई थी, और कुछ लोगों ने उनके मंत्रिमंडल से 25वें संशोधन लागू करने की मांग की. इस संशोधन के तहत अगर कोई राष्ट्रपति अपने कर्तव्यों का सही ढंग से पालन नहीं कर सकता, तो उसे पद से हटाया जा सकता है. (इनपुट भाषा)

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Pritish Sahay

लेखक के बारे में

By Pritish Sahay

12 वर्षों से टीवी पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सेवाएं दे रहा हूं. रांची विश्वविद्यालय के पत्रकारिता विभाग से पढ़ाई की है. राजनीतिक, अंतरराष्ट्रीय विषयों के साथ-साथ विज्ञान और ब्रह्मांड विषयों पर रुचि है. बीते छह वर्षों से प्रभात खबर.कॉम के लिए काम कर रहा हूं. इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में काम करने के बाद डिजिटल जर्नलिज्म का अनुभव काफी अच्छा रहा है.

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