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चीन-ताजिकिस्तान से सटे सीमा पर ‘आत्मघाती हमलावरों’ की फौज तैनात करेगा तालिबान, ‘मंसूर सेना’ है बटालियन का नाम

Taliban Deploy Suicide Bombers At Borders तालिबान ने अफगानिस्तान की सीमाओं पर तैनात करने के लिए आत्मघाती हमलावरों की एक विशेष बटालियन बनाई है. इनकी तैनाती विशेषकर बदख्शां प्रांत में, जो अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान के बीच की सीमा स्थित है.

By Prabhat khabar Digital
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तालिबान ने तैयार की आत्मघाती हमलावरों की फौज
तालिबान ने तैयार की आत्मघाती हमलावरों की फौज
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Taliban Deploy Suicide Bombers At Borders तालिबान ने अफगानिस्तान की सीमाओं पर तैनात करने के लिए आत्मघाती हमलावरों की एक विशेष बटालियन बनाई है. इनकी तैनाती विशेषकर बदख्शां प्रांत में, जो अफगानिस्तान और ताजिकिस्तान के बीच की सीमा स्थित है. प्रांत के डिप्टी गवर्नर मुल्ला निसार अहमद अहमदी ने कहा कि बटालियन का नाम लश्कर-ए-मंसूरी या 'मंसूर सेना' है.

स्थानीय मीडिया आउटलेट खाना प्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रांत के डिप्टी गवर्नर मुल्लाह निसार अहमद अहमदी ने उत्तरपूर्वी प्रांत बदख्शां में आत्मघाती हमलावरों की बटालियन के निर्माण के बारे में जानकारी देते हुए आगे बताया कि लश्कर-ए-मंसूरी (Mansoor Army) को देश की सीमाओं पर तैनात किया जाएगा. उन्होंने कहा कि ये बटालियन वही है, जो पिछली अफगान सरकार के सुरक्षा बलों को निशाना बनाकर आत्मघाती हमले करती थी.

मुल्ला निसार अहमद अहमदी ने बताया कि इस बटालियन के बिना अमेरिका की हार संभव नहीं थी. ये बहादुर लोग विस्फोटक वास्कट पहनेंगे और अफगानिस्तान में अमेरिकी ठिकानों को उड़ा देंगे. अहमदी ने कहा कि आत्मघाती हमलावरों को किसी का डर नहीं है और वह खुद को बम से उड़ाने के लिए तैयार हैं.

डिप्टी गवर्नर ने बताया कि ये वो लोग हैं, जो वाकई में डरते नहीं है और इन्होंने खुद को अल्लाह को समर्पित कर दिया है. खाना प्रेस ने आगे बताया कि तालिबान के पास लश्कर-ए-मंसूरी के अलावा बद्री 313 बटालियन भी है, जिसे काबुल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर तैनात किया गया है. इसे तालिबान के सबसे सुसज्जित और आधुनिक सैन्य समूहों में से एक माना जाता है.

उल्लेखनीय है कि तालिबान ने 15 अगस्त को काबुल पर कब्जा कर लिया था. इसी दिन अफगानिस्तान की सरकार गिर गई. इसके बाद से तालिबान ने देश में कई अमानवीय नियम लागू कर दिए हैं. उसने 2020 के दोहा समझौते का भी पूरी तरह उल्लंघन किया है. समावेशी सरकार बनाने के बजाय तालिबान ने आतंकी संगठन हक्कानी नेटवर्क के साथ मिलकर सरकार बनाई है. जिसमें एक भी महिला, अल्पसंख्यक या फिर अफगान राजनेता शामिल नहीं है. सरकार में उच्च पदों पर मोस्ट वॉन्टेड आतंकी हैं.

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