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पाकिस्तान में कार से हुई सुसाइड बॉम्बिंग, उड़ी चौकी; 4 सैनिकों की मौत, ISPR ने भारत को ऐसे फंसाया

Updated at : 20 Dec 2025 11:58 AM (IST)
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Suicide Bombing in Pakistan North West Wajiristan

पाकिस्तान में सुसाइड बॉम्बिंग. फोटो- स्क्रीनग्रैब.

Suicide Bombing in Pakistan: पाकिस्तान के उत्तरी वजीरिस्तान में एक आत्मघाती कार हमलावर और तीन हथियारबंद आतंकियों ने एक गांव के नजदीक स्थित सैन्य चौकी पर धावा बोला. इसमें चार पाकिस्तानी सैनिकों की जान चली गई, जबकि महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 15 आम नागरिक घायल हो गए. सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि विस्फोट इतना भीषण था कि आसपास के कई मकान ढह गए और एक मस्जिद को भी नुकसान पहुंचा. 

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Suicide Bombing in Pakistan: अफगानिस्तान से सटे पाकिस्तान के अशांत उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में एक बार फिर हिंसा भड़क उठी है. उत्तर वजीरिस्तान में शुक्रवार को आतंकियों ने सुरक्षा बलों को निशाना बनाते हुए बड़ा हमला किया, जिससे पूरे इलाके में दहशत फैल गई. इस हमले ने एक बार फिर पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा क्षेत्र में सक्रिय आतंकी नेटवर्क और दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव को उजागर कर दिया है. डॉन न्यूज के अनुसार एक आत्मघाती कार हमलावर और तीन हथियारबंद आतंकियों ने एक गांव के नजदीक स्थित सैन्य चौकी पर धावा बोला. इसके बाद करीब एक घंटे लंबी मुठभेड़ चली, जिसमें चार पाकिस्तानी सैनिकों की जान चली गई, जबकि महिलाओं और बच्चों समेत कम से कम 15 आम नागरिक घायल हो गए. सुरक्षा एजेंसियों ने बताया कि विस्फोट इतना भीषण था कि आसपास के कई मकान ढह गए और एक मस्जिद को भी नुकसान पहुंचा. 

पाकिस्तानी सेना ने कहा कि हमलावर पहले चौकी की सुरक्षा तोड़ने में नाकाम रहे और बाद में विस्फोटकों से भरी गाड़ी को चौकी की बाहरी दीवार से टकरा दिया. मुठभेड़ के दौरान सभी हमलावरों को मार गिराया गया. किसी संगठन ने आधिकारिक तौर पर हमले की जिम्मेदारी नहीं ली, लेकिन पाकिस्तानी सेना ने इसके पीछे तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) का हाथ बताया है. सेना का दावा है कि इस हमले की साजिश अफगान सीमा के पार रची गई थी. काबुल की ओर से इस पर तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई. अफगान सरकार लंबे समय से यह कहती रही है कि वह किसी भी देश, खासकर पाकिस्तान के खिलाफ, अपने क्षेत्र का इस्तेमाल नहीं होने देती.

पाकिस्तान ने जताया कड़ा विरोध

सेना ने कहा कि पाकिस्तान को उम्मीद है कि अफगान तालिबान शासक आतंकियों को अफगान जमीन से पाकिस्तान पर हमले करने से रोकेंगे. साथ ही यह भी कहा गया कि पाकिस्तान आतंकियों और उनके मददगारों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार सुरक्षित रखता है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इस्लामाबाद में अफगान तालिबान के उप-मिशन प्रमुख को तलब कर कड़ा विरोध दर्ज कराया और अफगान भूमि से संचालित आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई की मांग की. इस घटना ने दोनों पड़ोसी देशों के बीच पहले से तनावपूर्ण रिश्तों को और अधिक जटिल बना दिया है.

बयान में कहा गया कि “अफगान तालिबान शासन से आग्रह किया गया है कि वह अपने क्षेत्र से संचालित सभी आतंकी संगठनों, उनके नेतृत्व समेत, के खिलाफ तुरंत ठोस और सत्यापन योग्य कदम उठाए और पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवाद के लिए अफगान भूमि के इस्तेमाल को रोके.” साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया कि पाकिस्तान अपनी संप्रभुता की रक्षा और नागरिकों की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का अधिकार सुरक्षित रखता है.

भारत के ऊपर अप्रत्यक्ष निशाना

वहीं पाकिस्तान की सेना की मीडिया शाखा इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस (ISPR) ने इस हमले के पीछे भारत को जोड़ दिया. डॉन न्यूज के अनुसार आईएसपीआर ने कहा कि 19 दिसंबर 2025 को एक घिनौने और कायरतापूर्ण आतंकी हमले में भारतीय प्रॉक्सी ‘फितना अल-ख्वारिज’ से जुड़े ख्वारिज आतंकियों ने उत्तर वजीरिस्तान जिले के बोया क्षेत्र में सुरक्षा बलों के शिविर पर हमला किया. ‘फितना अल-ख्वारिज’ शब्द का इस्तेमाल पाकिस्तचान में प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े आतंकियों के लिए करता है. आईएसपीआर के अनुसार, भीषण गोलीबारी के दौरान हवलदार मुहम्मद वकास (42 वर्ष, जिला कोटली निवासी), नायक खानवाइज (38 वर्ष, जिला मंसेहरा निवासी), सिपाही सुफयान हैदर (25 वर्ष, जिला वेहारी निवासी) और सिपाही रिफ्फत (32 वर्ष, जिला लैयाह निवासी) की मौत हो गई..

पाकिस्तान अक्सर अफगान तालिबान पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को पनाह देने का आरोप लगाता है, जो 2021 से पाकिस्तान में हमलों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार रहा है. काबुल इन आरोपों से इनकार करता रहा है और कहता है कि वह अपने क्षेत्र का इस्तेमाल किसी अन्य देश के खिलाफ नहीं होने देता. हालांकि अफगान तालिबान से अलग होने के बावजूद TTP उसके साथ करीबी संबंध रखता है.

बीते कुछ महीने से बढ़ा हुआ है तनाव

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव अक्टूबर से बढ़ा हुआ है, जब 9 अक्टूबर को काबुल में हुए विस्फोटों के बाद सीमा पर झड़पें हुईं, जिनका आरोप अफगानिस्तान ने पाकिस्तान पर लगाया था. कतर की मध्यस्थता से युद्धविराम तो हुआ, लेकिन नवंबर में तुर्की की मेजबानी में हुई बातचीत में दोनों पक्ष किसी समझौते पर नहीं पहुंच सके. इसके बाद सऊदी अरब में भी दोनों देशों के बीच बातचीत हुई, लेकिन यहां भी कोई नतीजा नहीं निकल सका. 

इस साल पाकिस्तान ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2025 में दूसरे स्थान पर रहा, जहां पिछले वर्ष की तुलना में आतंकी हमलों में मौतों की संख्या में 45 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है. डॉन न्यूज के अनुसार, यह घटना उस हमले के दो महीने बाद हुई है, जब उत्तर वजीरिस्तान के मीर अली इलाके में सुरक्षा बलों ने एक सैन्य शिविर पर आत्मघाती हमले की कोशिश को नाकाम करते हुए चार आतंकियों को मार गिराया था. वहीं पिछले महीने पेशावर में फेडेरल कांस्टेबुलरी में भी फिदायीन हमला हुआ, जहां तीन सुरक्षा कर्मियों के मारे जाने की सूचना सामने आई थी. 

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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