Suchir Balaji : सुचिर बालाजी कौन हैं? OpenAI व्हिसलब्लोअर की खुदकुशी से एलन मस्क भी दुखी

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 14 Dec 2024 10:42 AM

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सुचिर बालाजी

Suchir Balaji : सुचिर बालाजी ने खुदकुशी कर ली है. जानें ओपनएआई के फार्मर रिसर्चर के बारे में खास बातें.

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Suchir Balaji : सुचिर बालाजी को लेकर लोग लगातार सर्च कर रहे हैं. जानकारी के अनुसार, ओपनएआई के फार्मर रिसर्चर बालाजी की सैन फ्रांसिस्को स्थित अपने अपार्टमेंट में लाश मिली है. उन्होंने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली है. 26 वर्षीय भारतीय अमेरिकी ने अक्टूबर में न्यूयॉर्क टाइम्स को दिए एक साक्षात्कार में ओपनएआई द्वारा कॉपीराइट कानून तोड़ने के बारे में चिंता जताई थी.

ऑफिस ऑफ चीफ मेडिकल एग्जामिनर (OCME) ने बताया कि मृतक की पहचान सैन फ्रांसिस्को के 26 वर्षीय सुचिर बालाजी के रूप में की है. आत्महत्या किए जाने का शक है. OCME ने निकटतम रिश्तेदारों को सूचित कर दिया है. इस बीच, एलन मस्क समेत कई लोगों ने सोशल मीडिया पर इस घटना पर रिएक्शन दिया है.

सुचिर बालाजी कौन थे?

ओपनएआई में काम करने से पहले बालाजी ने यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई की थी. कॉलेज में रहते हुए उन्होंने ओपनएआई और स्केल एआई में इंटर्नशिप की. ओपनएआई में अपने शुरुआती दिनों में बालाजी ने वेबजीपीटी पर काम किया. इसके बाद उन्होंने जीपीटी-4 के लिए प्रीट्रेनिंग टीम, O-1 के साथ रीजनिंग टीम और चैटजीपीटी के लिए पोस्ट-ट्रेनिंग पर काम किया. यह जानकारी उनके लिंक्डइन में दी गई है.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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