भारतीयों के खिलाफ जहर बो रहे जेडी वेंस! ब्रिटेन से पड़ी डांट; क्यों खतरनाक हैं US उपराष्ट्रपति के कमेंट्स?
Published by : Anant Narayan Shukla Updated At : 06 Jun 2026 1:43 PM
जेडी वेंस और कीर स्टार्रमर.
JD Vance Britain Row: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने ब्रिटेन और अमेरिका के बीच नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है. ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के कार्यालय ने उन पर लोकतांत्रिक विमर्श में दखल देने और समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश का आरोप लगाया है. वेंस की टिप्पणियों से भारतीय प्रवासियों पर भी काफी असर पड़ सकता है.
JD Vance Britain Row: ब्रिटेन में एक किशोर की हत्या का मामला अब अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक विवाद में बदल गया है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद ब्रिटिश सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया दी है. डाउनिंग स्ट्रीट ने बिना नाम लिए उन लोगों को निशाने पर लिया, जो ब्रिटेन के लोकतांत्रिक विमर्श में हस्तक्षेप करने और समाज में विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं. पूरा विवाद 18 वर्षीय हेनरी नोवाक की हत्या से जुड़ा है, जिसे भारतीय मूल के विक्रम डिगवा ने चाकू मारा था. जेडी वेंस ने इस घटना को इमिग्रेशन और सभ्यता के पतन से जोड़ दिया. उनकी टिप्पणी के बाद ब्रिटेन में राजनीतिक माहौल गरमा गया.
क्या हुआ था हेनरी नोवाक के साथ?
हेनरी नोवाक की दिसंबर 2025 में इंग्लैंड के दक्षिणी तट पर स्थित साउथैम्पटन में हत्या कर दी गई थी. इस मामले में 23 वर्षीय विक्रम डिगवा को दोषी ठहराए जाने के बाद 1 जून को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई.
अदालत में पेश सबूतों के मुताबिक, एक मामूली विवाद के बाद डिगवा ने नोवाक पर चाकू से हमला कर दिया था. घटना के बाद जब पुलिस मौके पर पहुंची तो डिगवा ने दावा किया कि नोवाक ने उसके साथ नस्लीय दुर्व्यवहार किया था और उस पर हमला भी किया था.
उसने यह भी आरोप लगाया कि झड़प के दौरान उसकी पगड़ी गिरा दी गई थी और उसकी आंख के पास चोट लगी थी. हालांकि, बाद की जांच में पुलिस ने पाया कि डिगवा के ये दावे सही नहीं थे.
बॉडी कैमरा वीडियो ने बढ़ाया विवाद
डिगवा को सजा सुनाए जाने के बाद पुलिस द्वारा जारी किए गए बॉडी कैमरा फुटेज ने इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया. वीडियो में घायल हेनरी नोवाक को कहते हुए सुना जा सकता है, ‘मुझे चाकू मारा गया है’ और ‘मैं सांस नहीं ले पा रहा हूं.’ इसके बावजूद पुलिस अधिकारियों ने उन्हें हथकड़ी लगा दी. एक अधिकारी को यह कहते हुए भी सुना गया, ‘मुझे नहीं लगता कि तुम्हें चाकू मारा गया है.’
यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद पुलिस की कार्रवाई को लेकर भारी नाराजगी देखने को मिली.
विवाद में कूदे जेडी वेंस
विवाद की शुरुआत तब हुई जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हेनरी नोवाक की मौत को लेकर टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि यह घटना उस बड़ी समस्या का प्रतीक है, जिसमें इमिग्रेशन और सिस्टम की विफलता है. वेंस ने कहा कि नोवाक की मौत केवल एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि एक सभ्यता के पतन की कहानी जैसी है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारियों ने पीड़ित की पर्याप्त परवाह नहीं की. उनकी यह टिप्पणी अदालत के फैसले के बाद आई.
कीर स्टार्मर की ब्रिटिश सरकार ने दिया जवाब
जेडी वेंस की टिप्पणी के बाद ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के कार्यालय ने अप्रत्यक्ष रूप से जवाब दिया, क्योंकि इसमें उनका नाम लिया गया था. हालांकि, यह साफ था कि यह वेंस को ही जवाब दिया जा रहा है. प्रधानमंत्री कार्यालय के प्रवक्ता ने कहा कि हेनरी नोवाक के परिवार की स्पष्ट इच्छा है कि उनके बेटे की मौत को नफरत या विभाजन फैलाने के लिए इस्तेमाल न किया जाए.
उन्होंने कहा कि ऐसी दुखद घटनाओं में राजनीति का उद्देश्य लोगों को बांटना नहीं, बल्कि एकजुट करना होना चाहिए. डाउनिंग स्ट्रीट ने यह भी कहा कि हाल के दिनों में कुछ लोग ब्रिटेन के लोकतंत्र में हस्तक्षेप करने और सड़कों पर विभाजन पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं.
जेडी वेंस ने क्यों की ऐसी टिप्पणी?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जेडी वेंस लंबे समय से इमिग्रेशन और कल्चरल आइडेंटिटी जैसे मुद्दों को अपनी राजनीति के केंद्र में रखते आए हैं. उनके राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी बीते दिनों भारतीयों को लेकर अपमानजनक टिप्पणी की थी. इसमें भारत को हेलहोल बताने से लेकर हाल ही में भारतीय पत्रकार को हॉलीवु़ड के सेंट्रल कास्टिंग जैसे टर्म से संबोधित किया था. ट्रंप इस तरह के बयानों की वजह से आए दिन दो चार होते रहते हैं, लेकिन जेडी वेंस, जिनकी खुद की पत्नी- उषा वेंस भारतीय मूल की हैं, वह भी आपराधिक घटनाओं को प्रवासी संस्कृति से जोड़कर विषवमन करते हैं.
हेनरी नोवाक मामले पर जेडी वेंस की टिप्पणी कोई पहली घटना नहीं है. अमेरिकी उपराष्ट्रपति पहले भी अमेरिका और यूरोप में बड़े पैमाने पर हो रहे प्रवासन को अपराध, सामाजिक अस्थिरता और ‘सभ्यतागत पतन’ से जोड़ते रहे हैं. आलोचकों का आरोप है कि वेंस अक्सर ऐसे मामलों को व्यापक आव्रजन बहस से जोड़कर राजनीतिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा देते हैं, जबकि उनके MAGA समर्थक इसे सीमा सुरक्षा और राष्ट्रीय पहचान से जुड़ी वैध चिंता बताते हैं.
पहले क्या बोल चुके हैं जेडी वेंस?
मिलियंस ऑफ इललीगल एलियंस वाला बयान: 2024 के अमेरिकी चुनाव अभियान के दौरान जेडी वेंस ने कई बार कहा था कि अमेरिका में ‘लाखों अवैध प्रवासियों का अनियंत्रित प्रवेश’ देश की सुरक्षा, नौकरियों और सामाजिक व्यवस्था के लिए खतरा बन रहा है. आलोचकों ने कहा कि उनकी भाषा प्रवासियों को अपराध और अव्यवस्था से जोड़ती है.
स्प्रिंगफील्ड (ओहायो) विवाद: 2024 में वेंस ने ओहायो के स्प्रिंगफील्ड शहर में हैती मूल के प्रवासियों को लेकर फैली विवादित और अपुष्ट चर्चाओं को सोशल मीडिया पर उठाया था. इस मामले में उन पर बिना पर्याप्त सबूत के प्रवासियों के खिलाफ माहौल बनाने का आरोप लगा. बाद में यह मुद्दा अमेरिकी राजनीति में बड़ा विवाद बन गया.
ओपन बॉर्डर को सभ्यता के लिए खतरा बताना: वेंस कई बार कह चुके हैं कि पश्चिमी देशों की उदार आव्रजन नीतियां ‘राष्ट्रीय पहचान’ और ‘सभ्यतागत मूल्यों’ को कमजोर कर रही हैं. उनके भाषणों में ‘सिविलाइजेशनल डिक्लाइन’ (सभ्यतागत पतन) शब्द बार-बार दिखाई देता है, जिसका इस्तेमाल उन्होंने हेनरी नोवाक मामले में भी किया.
यूरोप की आव्रजन नीतियों पर हमले: अमेरिकी उपराष्ट्रपति बनने के बाद भी वेंस ने यूरोपीय देशों, खासकर ब्रिटेन और जर्मनी की प्रवासन नीतियों की आलोचना की. उन्होंने कई मौकों पर कहा कि यूरोपीय नेतृत्व बड़े पैमाने पर प्रवासन के सामाजिक और सुरक्षा प्रभावों को नजरअंदाज कर रहा है.
म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस का भाषण: 2025 में म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस में वेंस ने यूरोपीय नेताओं पर आरोप लगाया कि वे आम नागरिकों की आव्रजन संबंधी चिंताओं को दबा रहे हैं. इस भाषण को यूरोप के कई राजनीतिक नेताओं ने अनावश्यक हस्तक्षेप और दक्षिणपंथी राजनीतिक विमर्श को बढ़ावा देने वाला बताया.
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जेडी वेंस की टिप्पणी क्यों खतरनाक है?
ऐसे संवेदनशील मामलों को व्यापक राजनीतिक एजेंडे से जोड़ने से समाज में ध्रुवीकरण बढ़ सकता है. यही वजह है कि ब्रिटेन में कई लोगों ने वेंस की टिप्पणी को एक आपराधिक मामले के बजाय राजनीतिक संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा. वहीं पश्चिमी देशों में अच्छी खासी भारतीय प्रवासी रहते हैं. सोशल मीडिया पर आए दिन भारतीयों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार के वीडियो सामने आते रहते हैं. नस्लवादी टिप्पणियां और यहां तक कि हमले भी अब आम होते जा रहे हैं. विश्लेषकों का मानना है कि अगर, इस तरह के सबसे बड़े और ताकतवर देश के नेता ऐसे बयान देंगे, तो भारतीयों को और भी हिंसा का सामना करना पड़ सकता है.
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लेखक के बारे में
By Anant Narayan Shukla
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
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