Pm Modi Japan Visit: शिंजो आबे की अंतिम विदाई एलिजाबेथ से खर्चीली, पीएम मोदी पहुंचे जापान

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 27 Sep 2022 8:52 AM

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PM MODI in Japan : पीएम मोदी ने प्रधानमंत्री किशिदा और श्रीमती आबे से मुलाकात कर सभी भारतीयों की ओर से शोक-संवेदना प्रकट की. उन्होंने कहा कि हम आबे की दृष्टि के अनुरूप भारत-जापान संबंधों को और मजबूत बनाने के लिए काम करना जारी रखेंगे. जानें शिंजो आबे की अंतिम विदाई एलिजाबेथ से कितनी खर्चीली है.

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जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे का राजकीय अंतिम संस्कार 27 सितंबर को यानी आज टोक्यो में होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दोस्त आबे को अंतिम विदाई देने के लिए पहुंच चुके हैं. आज पीएम मोदी ने टोक्यो में जापान के प्रधानमंत्री किशिदा से मुलाकात की है. अंतिम संस्कार कार्यक्रम में अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस, ब्रिटिश विदेश सचिव समेत 100 देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे. इसके अलावा, 700 विदेशी मेहमान भी मौजूद रहेंगे.

जापानी पीएम फुमियो किशिदा के साथ द्विपक्षीय बैठक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने टोक्यो में जापानी पीएम फुमियो किशिदा के साथ द्विपक्षीय बैठक की. पीएम मोदी ने कहा कि इस दुख की घड़ी में आज हम मिल रहे हैं. पिछली बार जब मैं आया तब शिंजो आबे से काफी लंबी बात हुई थी और कभी सोचा ही नहीं था कि जाने के बाद ऐसी खबर सुनने की नौबत आएगी. उन्होंने कहा कि भारत और जापान की दोस्ती ने एक वैश्विक प्रभाव पैदा करने में एक बहुत बड़ी भूमिका निभाई है. मुझे विश्वास है कि आपके नेतृत्व में भारत-जापान संबंध और अधिक गहरे होंगे. हम विश्व में समस्याओं के समाधान में एक उचित भूमिका निभाने के लिए समर्थ बनेंगे. आपको बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होंगे.

आबे के अंतिम संस्कार में 1.66 अरब येन (करीब 94 करोड़ रुपये) खर्च होने का अनुमान

शिंजो आबे की ये प्रतीकात्मक अंतिम विदाई होगी. आबे के अंतिम संस्कार में 1.66 अरब येन (करीब 94 करोड़ रुपये) खर्च होने का अनुमान है. वहीं, ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के अंतिम संस्कार की अनुमानित लागत 1.3 अरब येन (करीब 73.7 करोड़ रुपये) थी. हालांकि, एलिजाबेथ द्वितीय की अंत्येष्टि पर हुए खर्च का आंकड़ा जारी नहीं किया गया है. बता दें कि इस साल आठ जुलाई को शिंजो आबे की गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी. इसके बाद पारिवारिक तौर पर आबे का अंतिम संस्कार 15 जुलाई को हुआ था. इस लिहाज से आबे का यह अंतिम संस्कार प्रतीकात्मक होगा. वहीं, विरोधियों का कहना है कि कानूनी आधार नहीं होने के चलते आबे का राजकीय अंतिम संस्कार ‘अलोकतांत्रिक’ होने के साथ ही किशिदा मंत्रिमंडल का एकतरफा फैसला है.

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विरोधी इसे युद्ध काल में जापान के अत्याचारों पर आबे द्वारा पर्दा डालने, अधिक सैन्य खर्च के लिए उनके दबाव, लैंगिक भूमिकाओं पर उनके नजरिये, तानाशाह नेतृत्व और पूंजीपतियों के समर्थक के रूप में याद करते हैं.


1.18 करोड़ डॉलर होगा सुरक्षा पर खर्च

सरकार का कहना है कि आबे के राजकीय अंतिम संस्कार कार्यक्रम के लिए सुरक्षा, परिवहन एवं अन्य प्रबंधों पर करीब 1.18 करोड़ डॉलर का खर्च आयेगा. अंतिम संस्कार से कुछ घंटे पहले मेहमान सुरक्षा जांच के लिए तोक्यो के ‘बुडोकन मार्शल आर्ट एरिना’ में इकट्ठा होंगे. किसी भी तरह का खाने-पीने का सामान अंदर ले जाने की अनुमति नहीं होगी और कैमरों के उपयोग की अनुमति केवल मीडिया के लिए होगी. लगभग 1,000 जापानी सैनिक कार्यक्रम स्थल के चारों ओर तैनात रहेंगे. आबे की पत्नी अकी आबे के बाद किशिदा सहित सरकार, संसदीय और न्यायिक प्रणाली से जुड़े प्रतिनिधि शोक प्रकट करेंगे और मौजूद लोगों को संबोधित करेंगे.


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-सुरक्षा जांच के लिए तोक्यो के ‘बुडोकन मार्शल आर्ट एरिना’ में इकट्ठा होंगे मेहमान

-1,000 जापान के सैनिक कार्यक्रम स्थल के चारों ओर रहेंगे तैनात

भाषा इनपुट के साथ

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Amitabh Kumar

लेखक के बारे में

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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