आखिर इमरान खान को जीतने से कौन रोकना चाहता है ? खुद पाकिस्तान के पूर्व पीएम ने बताया

Will Imran Khan
Pakistan Political Crisis : पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान ने कहा कि जब आपके पास एक बड़ा संकट होता है, तो आप इतिहास में पीछे मुड़कर देखते हैं. यहां की मजबूत सरकारों ने भी संकटों से निपटा है.
Pakistan Political Crisis : पाकिस्तान में राजनीतिक हलचल अभी भी तेज हैं. इस बीच पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा है कि पाकिस्तान का सैन्य प्रतिष्ठान उनकी विपक्षी पार्टी को अगला चुनाव जीतने से रोकना चाहती है. वह देश में एक कमजोर सरकार चाहती है. हालांकि देश के लोग चाहते हैं कि ऐसी सरकार बने जो पाकिस्तान को इस वित्तीय संकट से उबार सके.
लाहौर में अपने घर में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मौजूद पाकिस्तान के पूर्व इमरान खान ने ब्लूमबर्ग को इंटरव्यू दिया है जिसमें उन्होंने वर्तमान सरकार की अलोचना की और सेना पर जोरदार हमला किया. उन्होंने कहा कि सरकार मेरे समर्थकों को गिरफ्तार करवा रही है. पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ को कुचलना इनका मकसद है.
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान, जो पिछले साल संसद में विश्वास मत खोने के बाद सत्ता से बेदखल हो चुके हैं, वे लोकप्रियता के सर्वेक्षण में बहुत आगे हैं. उन्होंने इंटरव्यू में कहा है कि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के लोगों ने ये हमले नहीं किये हैं. मुझे बदनाम करने और मुझपर कार्रवाई करने के उद्देश्य से ये हमले करवाये गये हैं. हमले के पीछे किसी और का हाथ है.
पाकिस्तान में चुनाव को लेकर भी पाकिस्तान के पूर्व पीएम इमरान खान ने बात की. उन्होंने कहा कि जब वे इस बात से आश्वस्त हो जाएंगे कि पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ यानी पीटीआई के चुनाव जीतने की क्षमता समाप्त हो गयी है तो वे देश में चुनाव का ऐलान करेंगे. ये एक सोची समझी साजिश का हिस्सा है. सरकार और सेना के प्रतिनिधियों ने खान के दावों पर टिप्पणी पर कोई जवाब नहीं दिया है. ब्लूमबर्ग ने इनसे खान के दावों पर जवाब देने का अनुरोध किया था. इमरान खान और उनके समर्थकों पर सरकार और सेना ने सरकारी संपत्ति पर हमले का आरोप लगाया था.
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आपको बता दें कि पाकिस्तान की सेना देश की सबसे शक्तिशाली संस्था है. सेना देश में प्रत्यक्ष रूप से शासन करते हुए विदेश और सुरक्षा नीतियों में एक बड़ी भूमिका निभाती है. इमरान खान सहित अधिकांश प्रधान मंत्री सत्ता में बने रहने के लिए सेना के समर्थन पर निर्भर रहे हैं, लेकिन सेना की नियुक्तियों को प्रभावित करने के प्रयास के बाद सरकार को उसकी कीमत चुकानी पड़ी है.
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By Amitabh Kumar
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