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PHOTOS: दुनिया के 5 सबसे पुराने देश, मिस्र ने मारी बाजी, भारत की पोजिशन जानकर रह जाएंगे हैरान!

Updated at : 06 Oct 2025 7:41 PM (IST)
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Oldest Countries In The World India And The Other Country / Ai Generated Image

ये तस्वीर भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को दिखा रहा है और ये ईमेज एआई के द्वारा बनाया गया है.

Oldest Countries In The World: दुनिया के सबसे पुराने देशों की कहानी जानिए. जहां से सभ्यता ने शुरू की थी अपनी यात्रा. मिस्र से भारत, चीन से यूनान तक, सात प्राचीन देशों का सफर जो आज भी इतिहास की सांसों में जिंदा है.

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Oldest Countries In The World: दुनिया में आज 195 देश हैं. हर देश की अपनी कहानी है, अपनी पहचान है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि इन देशों में कुछ ऐसे भी हैं जिनकी जड़ें हजारों साल पुरानी हैं? ऐसे देश जिनकी मिट्टी ने इंसानियत के पहले कदम देखे, जहां सभ्यता ने आंखें खोलीं, और जहां से ज्ञान, संस्कृति और कला ने पूरी दुनिया में अपनी राह बनाई. देश की अवधारणा यानी नेशन-स्टेट भले आधुनिक समय की देन हो, लेकिन कुछ जगहें ऐसी हैं जिनका इतिहास सभ्यता जितना पुराना है. आइए जानते हैं, सात ऐसे देशों या सभ्यताओं के बारे में जिन्हें इतिहास में सबसे पुराना माना जाता है जहां से इंसान की सभ्य यात्रा की शुरुआत हुई.

मिस्र (Egypt)- सभ्यता की जननी

अगर इतिहास का पहला अध्याय खोलेंगे तो नाम सबसे ऊपर मिलेगा मिस्र का. माना जाता है कि करीब 3100 ईसा पूर्व, राजा मेनिस ने ऊपरी और निचले मिस्र को एकीकृत किया था. मिस्र की पहचान है उसके फराओ, पिरामिड और हीरोग्लिफिक लेखन प्रणाली. 5,000 साल पुराना यह देश दुनिया की सबसे प्राचीन सभ्यताओं में गिना जाता है. नील नदी के किनारे बसा मिस्र आज भी अपनी मिट्टी में इतिहास की खुशबू समेटे है. यह धरती कहती है कि “मैं सभ्यता की मां हूं.”

मिस्र (Egypt)/ एआई के द्वारा बनाया गया इमेज

भारत (India)- विविधता में बसी प्राचीनता

भारत दुनिया की दूसरी सबसे पुरानी सभ्यता का घर है. 1500 ईसा पूर्व की सिंधु घाटी सभ्यता और उसके बाद का वैदिक काल. यही वो दौर था जिसने भारतीय संस्कृति की नींव रखी. यहां से ही दुनिया को मिले धर्म और दर्शन के अनमोल रत्न जो हिंदू धर्म, बौद्ध धर्म और जैन धर्म. गणित, खगोलशास्त्र और आयुर्वेद में भारत के योगदान ने पूरी दुनिया को दिशा दी. हड़प्पा और मोहनजोदड़ो की गलियों से लेकर वेदों की ऋचाओं तक, भारत हमेशा “ज्ञान और सह-अस्तित्व” की भूमि रहा है.

भारत / एआई के द्वारा बनाया गया इमेज

चीन (China)- हजार सालों की दीवारों के पार

2070 ईसा पूर्व में श्या वंश के साथ चीन के इतिहास की शुरुआत होती है. कागज, बारूद, कंपास और छपाई जैसी खोजें इसी देश ने दुनिया को दीं. कन्फ्यूशियस और लाओ-त्ज़ु जैसे दार्शनिकों ने विचारों की जो मशाल जलाई, वो आज भी दुनिया की सोच को दिशा दे रही है. चीन की महान दीवार सिर्फ एक निर्माण नहीं, बल्कि एक प्रतीक है जो स्थायित्व और आत्मविश्वास का.

चीन / एआई के द्वारा बनाया गया इमेज

यूनान (Greece)- लोकतंत्र और दर्शन का जन्मस्थान

800 ईसा पूर्व में जब दुनिया के अधिकांश हिस्से छोटे-छोटे कबीलों में बंटे थे, तब यूनान में विचारों की क्रांति शुरू हो चुकी थी. यह वही भूमि है जहां से लोकतंत्र की अवधारणा निकली. सुकरात, प्लेटो और अरस्तू जैसे महान दार्शनिकों ने मानवता की सोच को आकार दिया. एथेंस और स्पार्टा जैसे नगर-राज्यों ने राजनीतिक और सामाजिक संरचना का नया मॉडल दिया. और हां, ओलंपिक खेलों की शुरुआत भी यहीं से हुई थी.

यूनान / एआई के द्वारा बनाया गया इमेज

इथियोपिया (Ethiopia)- अफ्रीका की प्राचीन आत्मा

अफ्रीका की इस धरती की जड़ें 980 ईसा पूर्व तक जाती हैं, जब डी’एमटी साम्राज्य की स्थापना हुई थी. बाद में अक्सुम साम्राज्य ने इसे एक प्रमुख व्यापारिक और धार्मिक केंद्र बना दिया. इथियोपिया वो देश है जिसने अफ्रीका में सबसे पहले ईसाई धर्म अपनाया और कभी उपनिवेश नहीं बना. यह देश आज भी स्वतंत्रता, संस्कृति और गर्व का प्रतीक है जो अफ्रीका की आत्मा.

इथियोपिया / एआई के द्वारा बनाया गया इमेज

Oldest Countries In The World: सभ्यता की जड़ें कभी नहीं सूखतीं

आज दुनिया आधुनिकता की दौड़ में है, लेकिन इन देशों की कहानी हमें याद दिलाती है कि सभ्यता की असली ताकत उसकी जड़ों में होती है. मिस्र के पिरामिड, भारत की वेद परंपरा, चीन की दीवार, यूनान का लोकतंत्र, ईरान की कविता, जापान की अनुशासन संस्कृति और इथियोपिया की स्वतंत्र आत्मा को देखते हुए कह सकते है कि ये सब इस बात के सबूत हैं कि इंसान का इतिहास सिर्फ बीता हुआ कल नहीं, बल्कि हमारी पहचान का आधार है.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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