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तेज गानों पर अब ‘हराम’? सऊदी, ईराक, ईरान नहीं, इस मुस्लिम देश में लाउडस्पीकर टावर पर लगी रोक, जानें वजह

Updated at : 24 Aug 2025 7:27 PM (IST)
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Loud Music Now Haram in Indonesia/ Ai Image

इंडोनेशिया में अब तेज़ आवाज में संगीत बजाना हराम/ एआई इमेज

Loud Music Now Haram: इस मुस्लिम देश ने उत्सवों और जुलूसों में तेज गाने अब गंभीर स्वास्थ्य और संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहा है. दीवारें फट रही हैं, लोग परेशान हैं और धार्मिक संस्थाओं ने इसे हराम घोषित किया है. प्रशासन ने अब सख्त नियम लागू कर सुरक्षा और शांति बनाए रखने की पहल की है.

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Loud Music Now Haram: इंडोनेशिया के ईस्ट जावा प्रांत के गांवों में दशकों से चली आ रही एक परंपरा अब विवाद का विषय बन गई है. शादी, मेला और स्वतंत्रता दिवस जैसे उत्सवों में ट्रकों पर लगे विशाल लाउडस्पीकर लगातार गानें बजाते हैं, जिसे स्थानीय लोग ‘साउंड होरेग’ कहते हैं. लंबे समय तक यह ग्रामीण संस्कृति का हिस्सा माना जाता रहा, लेकिन हाल ही में इसके कारण घरों और दुकानों में क्षति, दीवारों के फटने और स्वास्थ्य समस्याओं की बढ़ती घटनाओं ने प्रशासन और धार्मिक संस्थाओं को कदम उठाने पर मजबूर कर दिया.

Loud Music Now Haram in Hindi: साउंड होरेग, उत्सव का शोर या खतरा?

जावा के गांवों में ट्रकों पर लगाए गए विशाल साउंड सिस्टम दोपहर से सुबह तक लगातार संगीत बजाते हैं. इलेक्ट्रॉनिक डांस म्यूजिक और पारंपरिक धुन का यह मिश्रण कई बार इतनी तेज़ आवाज़ में बजता है कि घरों की दीवारें फट जाती हैं और छत की टाइलें गिर जाती हैं. गांव के निवासी अहमद सुलियत ने AFP को बताया कि शोर दोपहर 1 बजे से लेकर सुबह 3 बजे तक लगातार होता है. लोग तेज संगीत बजाते हैं और शराब पीते हैं. यह डरावना है. सोशल मीडिया पर भी ग्रामीणों ने इसकी कई वीडियो साझा की हैं, जिसमें ‘साउंड होरेग’ से होने वाले नुकसान साफ दिखाई देते हैं.

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Loud Music Now Haram Indonesia in Hindi: सरकार ने कड़े नियम लागू किए

सोशल मीडिया पर बढ़ते विरोध के बाद ईस्ट जावा की गवर्नर खोफिफा इंदर परवांसा ने इस महीने नए नियम लागू किए. अब लाउडस्पीकर टावर्स की आवाज़ 120 डेसिबल से अधिक नहीं हो सकती, जबकि परेड और प्रदर्शन में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल यूनिट्स की सीमा 85 डेसिबल होगी. साथ ही, इन यूनिट्स को स्कूल, अस्पताल, एम्बुलेंस और पूजा स्थलों के पास संचालित करने से रोका गया है. गवर्नर ने कहा कि यह नियम स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए बनाए गए हैं. आवाज़ का स्तर नियंत्रित होना चाहिए ताकि सार्वजनिक शांति प्रभावित न हो.

स्वास्थ्य और धार्मिक चेतावनी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, 85 डेसिबल से अधिक की आवाज़ स्थायी सुनने की क्षमता को नुकसान पहुंचा सकती है, जबकि 120 डेसिबल से अधिक तत्काल हानि पहुंचा सकती है. हाल ही में, एक कार्निवल में महिला की दिल की धड़कन रुकने से मौत की घटना ने खतरे को उजागर किया. इसी बीच, इंडोनेशियाई उलेमा काउंसिल ने फतवा जारी कर अत्यधिक लाउडस्पीकर उपयोग को हराम करार दिया. फतवे में कहा गया कि यह शोर पूजा में बाधा डालता है, सड़क उपयोगकर्ताओं को परेशान करता है और संपत्ति को नुकसान पहुंचा सकता है.

संस्कृति और विरोध

हालांकि, कई लोग इसे परंपरा मानते हैं. 61 वर्षीय दैनी कहती हैं कि पिछले साल साउंड होरेग में कांच टूट गया, लेकिन यहां के लोग तेज उत्सव पसंद करते हैं. वहीं, कुछ शिकायत करने से डरते हैं क्योंकि स्पीकर ऑपरेटर बदला लेने के लिए घंटों तेज आवाज बजा देते हैं. साउंड इंडस्ट्री के मालिक डेविड स्टीवनलक्समाना का कहना है कि यह उद्योग मलांग में लाखों लोगों को रोजगार देता है और आलोचक बाहर के लोग हैं जो संस्कृति को नहीं समझते. अभी प्रशासन सार्वजनिक स्वास्थ्य और शांति की सुरक्षा और संस्कृति की परंपरा के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहा है.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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